रिटायरमेंट के बाद आपका जीवन कैसा हो!

छोटी छोटी बाते  जो रिटायरमेंट के बाद आपके जीवन को खुश मिजाज बना देगी....
: एन सुगालचंद जैन
         (एन सुगालचन्द जैन)

यदि आप सेवानिवृत्ति के बाद स्वस्थ रहना चाहते हैं और शांतिपूर्ण व सुखपूर्वक लंबा जीवन जीना चाहते हैं।
कृपया निम्नलिखित उपायों का अनुसरण करें : 
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सेवानिवृत्ति की स्थति को अपने दिलो-दिमाग में न आने दें, यह सोचकर कि मैंने बहुत मेहनत की है बहुत काम कर लिया और अब मैं आराम करना चाहता हूं। 
सेवानिवृति को विश्राम या आराम नही समझे क्योंकि आप अपने जीवन की एक अहम पारी अब शुरू करने जा रहे है जिसमे आपकी सक्रियता सामाजिक सेवा,राष्ट्रीय सेवा में अहम भूमिका अदा कर सकती है...आप अपने जीवन के अनुभवों के साथ खड़े है जहां एक मार्गदर्शक,शिक्षक की भूमिका आपका इंतजार कर रही है।
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अब तक आपने अपने परिवार अपने बच्चों को भी उतना समय नहीं दिया अब तक आपके बच्चे तो बड़े हो गए और वे भी अपने कार्य क्षेत्र में व्यस्त हो गए...अब आपका समय आपके नाती बच्चों के साथ खेलते हुए उनको बड़ा बनाने का भी है।
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आध्यात्मिक क्षेत्र जिसमें आगे की कमाई(धर्मलाभ) जो साथ जाती है उसको भी कमाने का है...यह समय तीर्थाटन,पूजा जप  का भी है...
और याद रखिए पढ़ने और सीखने की उम्र कभी खत्म नहीं होती और यह ज्ञान भी हमारे साथ आगे के जीवन में भी सफर करता है इसलिए
समय का एक भाग अपने आपको विद्यार्थी के रूप में भी रखिए...
पर इन सबके लिए आपकी सेहत अच्छी होनी चाहिए...मन में  लंबे समय तक जीवन जीने का उत्साह होना चाहिए।
इसके लिए आपको कुछ आदतें बनानी होगी...
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यदि आप पहले से मोर्निंग वॉक  पर नहीं जा रहे हैं तो मॉर्निंग वॉक पर जाना शुरू कर दें।
 ध्यान और योग का अभ्यास करें।
संतुलित आहार लेंवें। 
सामाजिक ,साहित्यिक,सांस्कृतिक गतिविधियों में अपने समय और अनुभव का विसर्जन करने की मानसिकता बनाए।
सामुदायिक कार्य करने से आप अपने मन को व्यस्त रखेंगे, जिससे आपका तन और मन दोनों  ऊर्जित रहेंगे.  और यह ऊर्जित मन ही दूसरों को ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
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घर में अब आप हुकुम चलाने वाली कार्यक्षेत्र वाली भाषा का प्रयोग करने की आदत को छोड़ कर घर के कार्यों में परिवार के सदस्यों का सहयोग करे ताकि उनके मन में आपके लिए आत्मीय आदर का भाव आए और आपका रिटायरमेंट आपके परिवार को बोझ न लगे।
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 दोस्तों से मिलें, आप रोजगार में कितने भी बड़े व्यक्ति रहे हों, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद सब बराबर हैं।  इसलिए मिलने-जुलने में संकोच न करें, ऐसे लोगों से भी बात करें जो कार्यस्थल पर पदानुक्रम में नहीं थे।
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सामाजिक संपर्क, लोगों से मिलना, परिवार के सदस्यों, विस्तारित परिवार के सदस्यों, समूहों से जुड़े रहना, अच्छे उत्साह और लंबी उम्र के लिए एक सिद्ध और परखा हुआ तरीका है। 

 किताबें इस उम्र की सच्ची साथी होती है …...आदमी के अंदर सीखने की भावना उसे 80 की उम्र में विधार्थी बनाए रखती है
 यह मेरा अपना अनुभव है कि  मैंने 45 की उम्र में B A किया , 55 की उम्र में post ग्रैजूएट डिप्लोमा इन N G O मनेजमेंट किया , 65 में M A किया अब phd करनी शेष बची है।
आप ने अवलोकन किया होगा कि व्यापारी, उद्योगपति , पेशेवर जैसे डॉक्टर , CA , advocate, सलाहकार (consultant),etc जो हमेशा अपने कर्मक्षेत्र में सक्रिय रहते है इसलिए दीर्घायु ही होते है।
इन उपायों का पालन करने से हम सब सेवानिवृत्ति के बाद अपना जीवन सुख एवं शांती पूर्वक व्यतीत कर सकते हैं और परिवार के सदस्यों को भी ऊर्जित और तरंगित रख सकते है।

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