शिवसेना के उद्धव और शिंदे समूह को मिले नए नाम।
शिंदे समूह को मिला बालसाहेबांची शिवसेना
उद्धव समूह को मिला शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे
उद्धव समूह को मिला चुनावी चिन्ह मशाल
शिंदे समूह के नाम खारिज...नए नाम मांगे गए..
फर्स्ट न्यूज समाचार:
महाराष्ट्र में शिवसेना के श्री उद्धव ठाकरे गुट और दूसरी तरफ श्री एकनाथ शिंदे गुट के बीच शिवसेना पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपने अपने दावे की जो लड़ाई पिछले कुछ दिनों से अदालत में चल रही थी और दोनो समूह बालासाहेब के द्वारा सृजन की गई इस राजनीतिक भूमि और पेठ पर जिस तरह से अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे थे
अब निर्वाचन आयोग ने दोनो समूहों को अलग अलग नाम से एक नई पहिचान दे दी है उससे पहले शिव सेना के नाम और धुनुष तीर के उस निशान पर इस्तेमाल के लिए दोनों समूहों पर प्रतिबंध भी लगा दिया था।
निर्वाचन आयोग ने सोमवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को नया नाम आवंटित कर दिया। निर्वाचन आयोग ने शिंदे के लिए पार्टी के नाम के रूप में 'बालसाहेबांची शिवसेना' (Balasahebanchi ShivSena) नाम आवंटित किया है। 'बालसाहेबांची शिवसेना' मराठी नाम है जिसका हिंदी अर्थ 'बालासाहेब की शिवसेना' है।
वहीं उद्धव ठाकरे के गुट का नाम 'शिवसेना - उद्धव बालासाहेब ठाकरे' (ShivSena - Uddhav Balasaheb Thackeray) होगा। निर्वाचन आयोग द्वारा 'शिवसेना - उद्धव बालासाहेब ठाकरे' नाम आवंटित किए ।
कुल मिलाकर दोनो पक्ष को बालासाहेब के नाम के प्रयोग का अधिकार मिला इसको एकनाथ शिंदे समूह के पक्ष में देखा जा सकता है तो दूसरी तरफ उद्धव समूह को उद्धव के नाम के साथ बालासाहेब का नाम मिला है।
पर नाम की गहराई में शब्दों के अर्थ को समझा जाए तो शिंदे समूह को मिला नाम जिसका अर्थ "बालासाहेब की शिवसेना" यह शिंदे समूह की उस भावना के अनुरूप ही मिला है जिसके लिए अक्सर बयान में यह कहा जाता था कि बालासाहेब की असली शिवसेना हमारी ही है।
सोशल मीडिया की खबर यह बताती है कि इस नाम से उद्धव ठाकरे समूह भी खुश बताया जा रहा है और इनके लिए अच्छी खबर इनका चुनाव चिन्ह है जिन तीन चिन्हों के लिए उद्धव समूह ने विकल्प दिया था उनमें से मशाल चिन्ह उद्धव ठाकरे समूह को मिल गया है।
पर शिंदे समूह के दिए तीनों विकल्प चुनाव चिन्ह ने धर्म के चिन्ह की वजह से खारिज कर दिए है और दूसरे नाम देने का सुझाव दिया गया है।
कुल मिलाकर पार्टी और चुनाव चिन्ह के नाम पर अधिकार की खींचतान अब दोनों समूहों के बीच बंद हो जाएगी और जनता के बीच अपने नए नाम और चिन्ह को पहुंचाने की दौड़ में अब दोनो पार्टियां लग जायेगी।
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