एक प्रेरक घटना श्री डूंगरगढ़ राजस्थान की...पंडित इन्हे कहते है...।

पंडित हो तो गौरीशंकर जैसा प्राण बचाकर चमत्कार पैदा करने वाला। 

मुनि भूपेंद्र कुमार 

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संसार में मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है यह कहावत अनेकों बार कानों से सुन चुके हैं पर जब यथार्थ का दिग्दर्शन होता है तब हमारे को पता लगता है कोई भी कहावत चलती है तो वह ऐसे ही नहीं चलती है उसके पीछे कोई न कोई बहुत बड़ा राज  अवश्य ही छुपा हुआ रहता है। जब ऐसी घटना सामने आती है तब मन के भीतर आश्चर्य और कुतूहल के भाव  जागृत होने प्रारंभ हो जाते
 हैं । 


क्या ऐसी घटना भी किसी के जीवन में घट सकती है? पंडित गौरी शंकर श्री डूंगरगढ़ के बहुत बड़े नामी पंडित थे । झाड़ा झपटा करने में नंबर वन थे। एक बार ऎसा ही योग मिलता है श्री डूंगरगढ़ के प्रमुख व्यक्ति सोहन लाल जी बाफना उनकी लाडली पुत्री मान कवर जिसको सब मांगी, मांगी कहकर पुकारते थे। मानो कोई सोहन लाल जी ने कहीं से मांग कर ही उसको लाए हों। सबके लिए वह आकर्षण का केंद्र बिंदु बनी हुई थी।  वह जब 17 वर्ष की अवस्था में आती है तब अपनी लाडली की शादी  राजलदेसर के बेगवानी परिवार में परि संपन्न करवा देते हैं। बेगवानी परिवार का नवयुवक लक्ष्मीपत बेगवानी  आसाम प्रदेश गुवाहाटी में सर्विस करता था। जब शादी संपन्न हो जाती है वहां पर बड़े ही लाड और दुलार के साथ में मान कवर अपना जीवन आगे बढ़ाना प्रारंभ कर देती है। 

कुछ ही समय के पश्चात उसके एक लड़का होता है जो देखने में रंगरूप में राजकुमार जैसा लग रहा था जब वह 6 महीने का था तो मान कवर अपने लाडले को लेकर अपने पीहर जाती है
 जब पीहर जाती है और उसी समय वह बच्चे को खेलने के लिए जमीन पर छोड़ देती है और वह बच्चा अपने हाथ और पैर ऊपर नीचे करके हंसता रहता है और सारे परिवार वाले उसके आसपास में बैठ जाती है उसको खिलाना प्रारंभ कर देते  है। उसी समय मान कवर का मामा डालचंद नाहटा उसका आना हो जाता है जब वह आता है और उस बालक को खेलते हुएदेखता है उसका मन भी उस बच्चे को खिलाने के लिए अपने आप ही होना प्रारंभ हो जाता है। 

बच्चे को अपनी गोद में ले लेता है और कहता है भाणजी मैं इसको अपने घर पर ले जा रहा हूं वह अपने घर पर लेकर चले जाता है 
वहां पर खिलाना प्रारंभ कर देता है। उनके घर में एक किरायेदार परिवार भी रहता था जिसकी एक बहन उस बालक को अपने पास में अपनी गोद में बिठा लेती है और उस बालक का रंग रूप देखकर वह उस पर मोहित हो जाती है और उस बच्चे के प्राण लेने के लिए तैयार हो जाती है। बालक के जो बाल है बहुत ही सुंदर थे श्री कृष्ण की तरह उसके बाल लग रहे थे। वह तत्काल एक कैंची अपने हाथ में लेकर उसबालक के बालों में से थोड़े से बाल है वह काट लेती है। 

 अपनी बेटी के हाथ में उन बालों को थमाते हुए कहा जा बालों को श्मशान भूमि में डाल दे। माता का आदेश प्राप्त होते हीं वह बालों को अपनी अंटी में दबाकर तत्काल अपने घर से बाहर निकल जाती है। 

बाल कटते ही वह बालक रोना और चिल्लाना प्रारंभ कर देता हैं। तत्काल मामा डालचंद उस लड़के को लेकर अपनी बहन के घर पर पंहुचा जाता है। मान कवर के हाथ में वह लड़का थमाते हुए कहा भाणजी यह तेरा बेटा संभाल यह रोता ही जा रहा है। इतना कहकर डालचंद तत्काल वहां से रवाना हो जाता है। 

बच्चा मान कवर के हाथ में आता है। मानकवर आश्चर्य चकित रह जाती है यह क्या हो गया? बालक का शरीर  गरम तवे की तरह तपना प्रारंभ हो जाता है। बालक को उल्टियां व दस्त  लगनी प्रारंभ हो जाती है। 

बालक जोर जोर से रोना प्रारंभ कर देता है। चुप होने का नाम ही नहीं ले रहा है यह देखकर मान कवर घबरा जाती है। उसने अपने पिता श्री सोहन लाल जी बाफना को कहा पिताजी इसके बुखार हो गई है और डॉक्टर को दिखा कर लाओ इसको दवाई दिला कर ठीक करना है वरना मैं ससुराल केसे जाउंगी? मेरी सास जेठानी लड़ेंगे वह घबराने लग जाती है। 


सोहन लाल जी ने कहा यह लड़का डाक्टरसे ठीक होने वाला नहीं है। इस लड़के को तो पंडित गौरीशंकर के पास ले जाना ही पड़ेगा। पंडित जी इस लड़के को ठीक करेंगे।  मान कवर पंडित गौरीशंकर का नाम भी पहली बार सुन रही थी उसको पता ही नहीं था पंडित कहां रहता है? उसने कहा  पिता जी मेरे को तो पता नहीं है पंडित कौन है? कहां रहता है? मैं कहां जाऊं इस बच्चे को लेकर? 


तब सोहन लाल जी ने कहा मैं जाता हूं और पंडित जी को खोज कर ले कर आता हूं। सोहन लाल जी हाथ में गेडिया लेकर तत्काल घर से बाहर रवाना हो जाते हैंह उनका घर से बाहर निकलना हुआऔर उधर से पंडित जी का बाजार की तरफ जाना होता है तत्काल सोहन लाल जी ने पंडित जी से रामा सामा करते हुए  कहा पहले मेरे घर पर चलना होगा। मेरी बेटी आई हुई है उसका 6 महीने का बेटा वह रो रहा है, चिल्ला रहा है, उल्टियां कर रहा है  उसके लगता है किसी ने कोई नजर लगा दी है। पहले उसको  देख कर आप को ठीक करना पड़ेगा। 


 पंडित गौरीशंकर तत्काल बाजार जाना भूल ही जाते हैं। मकान में प्रवेश करते हैं आंगन में आते हैं मान कवर जब रो रही थी। पंडित जी ने कहा रोने की क्या जरूरत है क्या हो गया बालक को? मानकवर ने रोते हुएकहा पंडित जी यह मेरा बेटा है ना खा रहा है, ना पी रहाहै केवल रो रहा है, उल्टियां कर रहा है, दस्ते कर रहा है अब अपने ससुराल जाऊंगी तो कैसे जाऊंगी? मेरी सास है वह मेरे को लड़ेगी अब मैं क्या करूं? मानकवर ने धुजते हुए अपने मन की बात को पंडित जी के सामने प्रस्तुत की। 


तब पंडित जी ने कहा इस बच्चे को जमीन पर लेटा दे यह बच्चा केवल 2 दिन का रह गया है यह बात सुनकर एक बार परिवार वाले आश्चर्यचकित रह जाते हैं। पंडित जी क्या यह बच्चादो ही दिन जिंदा रहेगा? 
पंडित जी ने कहा इसका आयुष्य दो दिन का ही रह गया है  पर अब  और घबराने की जरूरत नहीं है यह बच्चा अब मेरे हाथ में आ गया है इस बच्चे को कोई लेकर कहीं गया था क्या? 


पंडीत जी का प्रश्न सुनकर  मान कवर ने कहा मेरा मामा आया था डालचंद नाहटा वह इसको अपने घर पर लेकर गया था। 
 पंडित जी ने कहा उनके घर पर कोई किराएदार रहता है क्या? 
तब परीवार वालो ने कहा एक किराएदार रहता है उस घर के अंदर। 
पंडित जी ने कहा वहा पर जो औरत रहतीहै यह सारा काम उस का ही किया हुआ है उसको मजा आता है ऐसे काम करने में। 
अपने आप ही अब वह सीधी हो जायेगी थोड़ी सी देर ठहर जाओ। 

2 मिनट बाद ही उस महिला की लड़की जिसको बाल काट कर दिए थे वह सोहनलाल जी के घर पर आती है कोई काम के लिए पंडित जी की नजर उस पर टिक जाती है। पंडित जी ने तत्काल उसको अपने निकट बुलाया और कहा क्या कर रही है? कहां से आई है? कहां जा रही है? यह बात सुनकर वह कन्या एक बार घबरा जाती है, डर जाती है, रोते हुए कहा मेरी मां ने जो मेरे को काम सोंपा है वह काम करने के लिए मैं जा रही हूं। 


 पंडित जी ने कहा तेरी मां ने काम सौंपा बोल तेरी अंटी के अंदर क्या है? 
उसने कहा पंडित जी कुछ भी नहीं है, कुछ भी नहीं है 
पंडित जी ने कहा देख ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं है जो भी चीज है वह निकाल कर यहां रख दे वरना आज तेरी खैरियत नहीं है। 
 वह कन्या रोने लग जाती है और तत्काल जो उसके पास  अंटी में जो केस थे वह निकालकर पंडित जी के सामने रख देती है। 

जब वह अपनी अंटी से केश निकाल कर रखती है तो सारे परिवार वाले आश्चर्यचकित रह जाते हैं पंडित जी की इतनी बड़ी दीर्घ दृष्टि को देखकर 
पंडित जी ने कहा तेरी मां ऐसा काम कर रही है अब तेरी मां जिंदगी भर रोती रहेगी। वह घर के अंदर रो रही है चिल्ला रही है। 

यह जो बाल है इनबालो को अभी यहां पर अग्नि जलाओ और इस अग्नि के अंदर  जला कर बाल को राख बना दो। आग जलाकर बाल उसके भीतर में डालते हैं इधर बाल जलते हैं इधर बच्चे की बुखार है उतर जाती है। उल्टियां व दस्ते लगनी  बंद हो जाती है। बच्चा पहले की तरह खेलने कूदने लग जाता है। 

माता मांन कवर के मन में थोड़ा सा विश्वास का भाव जागृत होना प्रारंभ हो जाता है। अब मेरा बेटा ठीक हो गया है मैं आराम से ससुराल जा सकती हूं। 


 पंडित जी ने कहा एक काम कर इस बच्चे के सारे बाल है इन सारे बालों को उतार दें और इन बालों को नदी के अंदर बहा दे। तत्काल नाई को बुलाया गया और सारे बाल  उतार दिए गए। 
एक समस्या सामने आ जाती है मानकवर ने कहा कहां पंडित जी आपने कहा नदी में बालों को बहा देना पर श्री डूंगरगढ़ के अंदर नदी कहां आएगी? 
 तब पंडित जी ने कहा देख तेरा वह काका का बेटा है वह दिल्ली जा रहा है उसके हाथ में दे दे रास्ते में गंगा नदी आएगी और वह गंगा के अंदर अपने आप ही बालों को बहा देगा। 
वह कन्या जो बाल पंडित जी के हाथ में देती है रोने लग जाती है और रोती हुई  अपने घर पर पहुंचती है। उसकी मां जिसका पेट  भयंकर रूप से दर्द करना प्रारंभ कर देता है। रोने लग जाती है चिल्लाने लग जाती है। हाय हाय करने लग जाती है। 

डालचंद जी ने कहा क्या हो गया? क्यों रो रही है? क्या हुआ तेरे को? तब उसने कहा मेरे पेट में भयंकर पीड़ा हो रही है, दर्द हो रहा है मेरी बेटी  बाहर गई थी अभी तक नहीं आई। इतने में वह कन्या अपने घर में प्रवेश करती है। 

डालचंद जी ने चिल्लाते हुए कहा तू कहां गई थी? तेरी मां तो मर रही है पेट दुख रहा है और तुम बाहर घुमने चली गई। कहां गई थी? 


 उसने कहा मैं तुम्हारे बहन के घर पर चली गई थी और मेरे अंटी के अंदर जो बाल थे वह बाहर मैंने उनको दे दिए। बाल पंडित जी ने जला दियाहै तब से मेरी मां के पेट में दर्द हो रहा है और मां के शरीर में आग आग लग गई है। 
 यह बात सुनकर डालचंद जी को क्रोध आ जाता है। गुस्सा आ जाता है कहता है मेरे घर में रहती है और  ऐसा काम करतीं है। डालचंद जी को इतना गुस्सा आता है उस महिला का सारा सामान  उसी समय सड़क पर फेंक देता है और उसको घर से बाहर निकाल देता है। मेरे घर के अंदर अब कभी भी तेरे को पैर रखने की जरूरत नहीं है। 



 डालचंद जी तत्काल अपने घर से तेज़ गति से चल कर अपनी बहन के घर पर पहुंचते हैं। 
 मान कवर के पास में पहुंच कर कहते हैं मान कवर क्या हो गया? तेरे क्या तेरा बेटा ठीक हो गया है? इसको किसने ठीक किया? 
 तब मानकवर ने कहा मामा जी आप तो मेरे बेटे को अपने घर पर ले गए थे। क्या मारने के लिए ले गए थे? 
 यह बात सुनकर डालचंद ने कहा मांगी ऐसा काम में कभी नहीं कर सकता और तुम ऐसा क्यों कह रही हो? 


 तब मान कवर ने कहा मामा जी आप ही तो इसको खिलाने के लिए ले गए थे और आपके घर पर जाने के बाद ही यह बीमार हुआ है तो यह सारा दोष आपका ही तो है। 


तब उन्होंने कहा मांगी अब तेरे को चिंता करने की जरूरत नहीं है मैंने उसको घर से बाहर निकाल दिया है उसके सारे वस्त्र है और जितना सामान है मैंने उसको गली में फेंक दीया है और अब मैं तेरे से माफी मांगता हूं। 
 इतना कहकर डालचंद वहां से रवाना हो जाता है। 
उस समय पंडित जी ने कहा तेरा नाम मांगी है तेरे को ₹11 देने पड़ेंगे। 


 यह बात सुनकर मान कवर आश्चर्यचकित रह जाती है। पंडित जी को मेरे नाम का कैसे पता लगा? और ₹11 पंडित जी मांग रहे हैं? 
मानकवर ने कहा पंडित जी आपने मेरे बेटे को ठीक कर दिया ₹11क्या 100 रूपये भी आप मांगो गे तो मैं देने के लिए तैयार हूं। 


 पंडित जी ने कहा बेटी मेरे को सौ रुपए नहीं चाहिए  केवल इस बच्चे को ठीक करने के लिए मेरे को 11रूपये ही चाहिए। मैंने अपने इष्ट देव के सामने प्रार्थना कर दी थी ₹11 की प्रसाद चढ़ा दुगा । इसलिए तेरे को ₹11 ही देने हैं। 


 पर याद रखना आज से तू मेरे धर्म की बेटी है और मैं तेरा बाप हूं इस दुनिया में अब तेरा बाल है वह कोई भी बांका करने वाला नहीं है तेरे जीवन में जब कभी भी कोई समस्या आये तत्काल मेरे पास में पहुंच जाना तेरे सारे दुख हैं वह अपने आप ही दूर हो जाएंगे। इतना कहकर पंडित जी तत्काल मांगी के माथे पर हाथ फेरते हुए और बच्चे कोदुलारते हुए रवाना हो जाते हैं। 
बस तेरा संकट है वह टल गया है। यह सारा घटनाचक्र देखकर पूरा परिवार है वह आश्चर्यचकित रह जाता है। 


इस संसार के अंदर ऐसाभी कोई पंडित है जो इस प्रकार मरते हुए को जीवनदान प्रदान कर सकता है। यह कहावत चरितार्थ हो जाती है गुंजायमान हो जाती है मारने से बचाने वाला महान होता है हइस संसार में कोई पंडितहो तो वह  गोरी शंकर जैसा होना चाहिएजो ऐसे कार्यों को भी मिनटों के अंदर निपटा देता है। 
आज भी मांगी बाई  जब कभी भी उस घटना को याद करती है गौरी शंकर की तस्वीर है वह अपने आप ही सामने आनी प्रारंभ हो जाती है। दुनिया में इस तरह के पंडित भी होते हैं पर करोड़ों में एक दो ही होते हैं जो इस तरह से अपने जीवन को औरों की सेवा के लिए समर्पित कर देते हैं। 


आज पंडित गौरीशंकर भले ही विद्यमान नहीं है पर श्रीडूंगरगढ़ ही नहीं आसपास के लोग  आज भी पंडित जी को याद करते रहते हैं। संसार में कोई पंडित हो तो वह गोरीशंकर जैसा होना चाहिए।

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