पेड़ पौधे भी सब समझते है....

पेड़ पौधों में भी संवेदना होती है...
सुगाल चंद जैन:चेन्नई


आज मैंने सोशल मीडिया पर एक विडियो पाश्चात्य देशों का देखा| जिसमें बताया गया था कि पेड़-पोधों में संवेदना होती है| वह आपस में बात करते हैं| अपने दोस्त एवं दुश्मन के आगमन पर सांकेतिक भाषा में समाचार भी देते हैं|
जैन दर्शन हजारों वर्षों से वनस्पति में जीवन मानता आया है| जैन दर्शन में मान्यता है कि  पेड़-पोधों में भी आत्मा/संवेदनाएँ होती है वह अपने मित्र एवं दुश्मन की पहचान का अनुमान लगा लेते हैं| 
अतः इसी भावनानुरूप जैन दर्शन में वनस्पतिकाय को अभयदान देने के लिए श्रावक-श्राविकाएँ  अमुक वनस्पति को छोड़कर बाकी सब वनस्पति का त्याग करते हैं| जिससे त्यागस्त वनस्पति के जीव को त्यागस्त जीवात्मा को देखकर निर्भीक होती है| प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक श्री जगदीश चन्द्र बसु ने वनस्पति में जीव को आज के संदर्भ में प्रमाणित किया एवं सम्पूर्ण विश्व जगदीश चन्द्र बसु का सम्मान कर रहा है| 
फिर क्यों न हम अपने ग्रंथों में लिखित सिद्धांतों को प्रयोग एवं उदाहरणों के माध्यम से प्रमाणित करने का पर्यास करें| जिससे विश्व, जैन दर्शन को जिन दर्शन, जन दर्शन, वैज्ञानिक दर्शन एवं जीवन जीने की एक कला के रूप में स्वीकार कर सकें| विश्व जैन दर्शन एवं जैनत्व को अपनाकर सुख, शान्ति, वैभव एवं सहोदर भाव से रहें| किसी के मध्य द्वन्द-युद्ध या कटुता का भाव नहीं हो| सब एक-दुसरे के प्रति सम्मान का भाव रखेंगे।
जैन दर्शन को मानने वाले संख्यात्मक दृष्टि से भले ही कुछ कम है परन्तु यदि उन्हें गुरु भगवन्तों से दिशा-निर्देश मिले तो वह निश्चित ही जैन धर्म के प्रसार में अपना अभूतपूर्व योगदान दे सकते हैं| तब वह दिन दूर नहीं जब समूचा विश्व जैनत्व के रंग में रंग जायेगा एवं सम्पूर्ण संसार शांति, सोहार्द भाव से रहते हुए जीवनपथ पर आगे बढेगा|

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