*राजस्थान सरकार का उपक्रम राजकोम्प में करोड़ों का घोटाला*।
क्या राजस्थान सरकार आरोपों के घेरे में नही आ रही!
क्या शासन प्रणाली में नैतिकता नही है?
क्या इस प्रकार का लेनदेन वाजिब है?
पढ़िए ये खबर......
राजस्थान उच्च न्यायालय के नामचीन अधिवक्ता श्री पूनम चंद भंडारी जी के माध्यम से आई यह खबर हैरान करने वाली है।
जुलाई 2017 में राजकोम्प ने सप्लाई इंस्टॉलेशन मेंटेनेंस ऑफ आरएफ लिंक्स एंड आउटडोर वाईफाई एक्सेस प्वाइंट के लिए टेंडर जारी किया पहले यह टेंडर 160 करोड रुपए का था बाद में इसे 240 करोड़ रुपए का कर दिया और मिलीभगत का खेल देखिए जिसको टेंडर दिया गया है वह सारा सामान खुद के गोडाउन में ही रखेगा और 60% पैसा उसे दे दिया जाएगा और वाईफाई इंस्टॉल करने के बाद 30% पैसा और दे दिया जाएगा इस घोटाले की जब जानकारी हुई तो पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था के सदस्य एडवोकेट निलेश बोर्ड ने सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगी जो 29 मई 2020 को दी गई उसने बताया गया कि 22500 पॉइंट के लिए वर्क आर्डर दिया गया था और उसमें से 1750 वाईफाई पोइंट लगाए गए जिसमें 1632 काम कर रहे हैं लेकिन 60% भुगतान 17750 वाईफाई एक्सेस प्वाइंट्स का कर दिया गया और जो 1750 पॉइंट लगाए गए थे उनका 90% भुगतान कर दिया गया यानी बिना काम के ही 60 परसेंट का भुगतान कर दिया गया जो करीब 150 करोड रुपए होता है और समय पर काम नहीं किया गया तथा जानकारी के अनुसार गोडाउन में माल कि कोई सरकारी अधिकारी द्वारा वेरिफिकेशन नहीं किया गया और जनता के पैसे को चूना लाया गया ।
पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्थान ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत जून 2020 में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को की पर विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की क्योंकि इसमें बड़े बड़े अधिकारी मिले हुए हैं पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई और हाईकोर्ट ने एसीबी से कमेंट मंगवाए भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने जवाब प्रस्तुत किया और एक पत्र जो प्रमुख शासन सचिव गृह एवं मुख्य सतर्कता आयुक्त राजस्थान को 4 फरवरी 2021 को लिखा था पेश किया गया और बताया गया की क्रिमिनल कार्रवाई करने के लिए धारा 17 भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 के तहत सरकार से अनुसंधान और जांच के लिए अनुमति मांगी गई लेकिन सरकार ने अभी तक अनुमति नहीं दी है। जिससे उन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकती है और ना ही जांच हो सकती है आज यह प्रकरण राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ में लगा था सरकार की ओर से महाधिवक्ता उपस्थित हुए याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी एवं काजल शर्मा उपस्थित हुए 1 घंटे बहस चली महाधिवक्ता ने राज कॉम्प की ओर से जवाब प्रस्तुत कर दिया भंडारी का यह कहना था कि अभी राज कॉम को नोटिस जारी नहीं किया गया है और फिर भी राज कॉम की ओर से महाधिवक्ता ने जवाब प्रस्तुत कर दिया है ।
सरकार भ्रष्टाचारियों को बचा रही है और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को जांच करने की अनुमति नहीं दे रही है जबकि दस्तावेजों से साबित है कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है तथा निवेदन किया कि गोदाम में माल ही नहीं आया है और एकसो पचास करोड़ रूपए का भुगतान कर दिया गया है इसलिए न्यायालय कमिश्नर नियुक्त करे जो गोडाउन में जाकर जांच करे बहस सुनने के पश्चात याचिकाकर्ता को राज कॉम्प के जवाब का जवाब देने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया गया है।
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