जैन साधु की मर्यादा...

 🌻जय महावीर🌻

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चिन्तन करने योग्य:--👇

वर्तमान समय में जैन मान्यताओं के अनुसार यह पांचवां आरा चल रहा है, यह आरा भगवान महावीर द्वारा बताए गए सिद्धान्तों पर आधारित है अर्थात भगवान की आज्ञा ही महाव्रत धारी साधुओं के लिए मान्य है।।

भगवान की आज्ञा के अनुसार कोई भी जैन साधु, साध्वी या आचार्य ऐसे प्रवचन जिसमें राग द्वेष हो ऐसे प्रवचनों को साधु की मर्यादा के विपरीत माना है और ऐसे प्रवचन महाव्रतों का उल्लंघन है।।

अगर कोई साधु, साध्वी या आचार्य गृहस्थ के लौकिक कार्यों जैसे शादी ब्याह, व्यापार या अन्य कोई लौकिक कार्यों में हस्तकक्षेप करता है या अपना मत रखता है तो वो साधु की मर्यादा का उल्लघन करता है और पापकर्म का बंध करता है। अगर कोई ऐसे साधु को सहयोग करता है या अनुमोदना भी करता है तो वो श्रावक भी अपने कर्मों का बंध करता है।।

अगर कोई साधु भगवान की आज्ञा के विपरीत आचरण करता है, दिखावा, आडम्बर, आरम्भ सारम्भ, एवं चकाचोंध को ही भव्य चातुर्मास मानता हो तो वो साधु न तो खुद का आत्मकल्याण कर सकता है और नही श्रावकों के आत्मकल्याण में सहयोगी हो सकता है।।

🌸विशेष:--गृहस्थ के परिवार में उनके बच्चों की शादी कोनसे सम्प्रदाय एवं समाज में करें और कोनसे में नहीं यह उस परिवार का विषय है न कि जैन साधु संतों और आचार्यों का।।

जैन साधु संतों एवं आचार्यों को भगवान ने निग्रन्थ प्रवचन की आज्ञा दी है, लौकिक और राग द्वेष के प्रवचनों की नहीं।।

(अर्थात निग्रन्थ प्रवचनों को ही सत्य माना है)🌸

।।जय जिनेन्द्र।।

।।कैलाश राज सिंघवी।।

।।एक पथ-एक पंथ।।

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