दुबारा टेस्ट क्यों जरूरी...DR S K AGARWAL

              "दुबारा कोरोना टेस्ट क्यों जरूरी है "

अभी किसी भी कॉरपोरेट अस्पताल से अगर कोई कोरोना पाजिटिव मरीज ठीक होता है तो दुबारा उसकी कोरोना निगेटिव के लिए टेस्ट नही की जाती है , उनका तर्क यह है कि ICMR के नियम के अनुसार यह जरूरी नहीं है ।

क्यों जरूरी नहीं है, इसका सही उत्तर कॉरपोरेट या शायद किसी के पास नही है , वे कुछ कारण बतलाते हैं जो तर्क संगत नहीं लगते हैं।

पहला कारण = Treatment Protocol will be same, 

अर्थात इलाज मे कोई बदलाव नहीं होता है अगर पाजिटिव से निगेटिव भी होजाए तो भी ।

दूसरा कारण = इलाज मे कोई बदलाव नहीं तो फिर टेस्ट  के लिए फालतू पैसों की बरबादी क्यों ? 

तीसरा और अंतिम कारण  = अगर किसी मरीज का दुबारा कोरोना पाजिटिव आता है तो , रेकोर्ड मे पोजिटिव केस  की संख्या बढ जाएगी और एक्चुवल डेली पोजिटिव की संख्या मे बृद्धि  हो जाएगी,और सही डाटा मेनटेन नही होगा ।

   पिछले आठ महीनों मे मैंने करीब डेढ़ हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमण मरीज को देखने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि कोरोना निगेटिव टेस्ट करवाना शायद बहुत जरूरी है। 

सबसे पहले जो पहले तीन कारण है उनका उत्तर यह है कि कॉरपोरेट के Treatment Protocol मे कोई हस्तक्षेप भी नही करते हैं, और अगर कोई करता भी है तो वे उसकी सुनते ही कहां हैं। सही क्या है उनको भी इसका सही पता नहीं है। दुसरा पैसा की बरबादी, लेकिन जब हजारों रुपयों के टेस्ट रोज होते हैं वहां डेढ हजार का नेजल स्वाब क्या मायने रखता है। तो फिर फालतू पैसों की बरबादी का नाटक क्यों? तीसरा कारण एक्चुवल पाजिटिव रिपोर्ट, अगर पोर्टल के साफ्टवेयर में थोड़ा परिवर्तन करदिया जाए तो एड्रेस , नाम,और उम्र एक रहने पर डबल एन्ट्री नही होगी।

      अब कोविड निगेटिव टेस्ट क्यों जरूरी है। इसके छः उचित कारण है ।

1= अगर मरीज कोरोना पाजिटिव से निगेटिव हो जाता है तो अस्पताल मे कोविड वार्ड या आईसोलेशन वार्ड से कहीं पर भी सिफ्ट किया जा सकता है ,लेकिन इलाज सेम रहेगा ।

2= मरीज अपने परिवार वालों से अपना दुःख दर्द बांट सकता है, वरना चौदह दिन का अकेला पन उसके लिए जान लेवा साबित हो जाता  है ।

3= अगर मरीज निगेटिव हो जाता है, बुखार नही है, और आक्सीजन की भी जरूरत नहीं है तो डिस्चार्ज कर होम आईसोलेशन किया जा सकता है ।

4= निगेटिव हो जाने पर मरीज अपने आप को साइको लॉजिकल स्वस्थ्य महसूस करने लगता है ।

5= मरीज के परिजनों का मानसिक तनाव काफी कम हो जाता है जो कि बहुत जरूरी है ।

6= सबसे अहम और जरूरी बात यह है कि अगर कोरोना निगेटिव हो जाता है और  इलाज के दौरान किसी वजह से    मरीज की मृत्यु हो जाती जाती है तो परिवार वालों को उसकी body मिल जाती है, और वो उसके दर्शन कर सकते हैं । वरना जब तक पाजिटिव का स्टाम्प लगा रहेगा उसका कारपोरेशन या म्युनिसिपल्टी के द्वारा ही क्रिया कर्म किया जाएगा, जो कि जग जाहिर है ।

डा  एस के अग्रवाल ( रिकवरी)

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