महासभा के पूर्व महामंत्री श्री बिनोद बेद जी के स्पष्टीकरण के संदेश को समाज के कुछ प्रबुद्ध पाठक देखना चाहते थे उनकी इस भावना का सम्मान करते हुए 2भाग में आए इस संदेश को एक साथ जोड़ कर आप तक पहुंचा रहा हूं।
व्यक्तिश:यह संदेश भेजना मुझे उचित नहीं लगा लेकिन ब्लॉग के माध्यम से इस संदेश की गरिमा सुरक्षित रहेगी।
संजय सनम
महासभा के पूर्व महामंत्री का संदेश....
श्रीमान संजय जी सनम
मेरे एक मित्र ने आपके द्वारा बनाए हुए एक वीडियो को मुझे प्रेषित किया है जिसमें आपने मेरे ऊपर आरोप लगाया है कि मैंने एक टैग लाइन लगाकर के एक वीडियो कमल जी के माध्यम से आपको भिजवाया है,जिसमें में मेने आपके लिए और आपके अतिथियों के लिए किसी पशु के शब्द का उपयोग किया है ।
मैंने आपके लिए या अन्य किसी भी व्यक्ति के लिए ना तो पशु शब्द का प्रयोग किया है और ना ही इस प्रकार की कोई टैगलाइन मेरे द्वारा बनाई गई है मैंने जो वीडियो कमल जी को भेजा था वह वीडियो मैंने यूट्यूब से लिया था और वह स्वामी राजेश्वरानंद जी के प्रवचन का अंश था मेरी नजर में अकारण निदको के लिए जिसमें आप, मैं ,या अन्य कोई भी हो सकता है यह वीडियो बढ़ा ही शिक्षा प्रदान करने वाला है और बड़ा ही उपयोगी है, इस वीडियो को भेजने का मकसद ना तो आपके ऊपर या आपके द्वारा बुलाए गए अन्य किसी अतिथि पर प्रहार करना था और ना ही मेरी नजर में मेने ऐसा किया है मेरा ऐसा मानना था और अब भी मानता हूं कि समय-समय पर हमें आत्मा व लोचन करना चाहिए ।और इस प्रकार की वीडियो हमारे आत्मा व लोचन करने में सहयोगी बनते हैं और हमें सही रास्ता दिखाते हैं। संजय जी मेरे मंतव्य में आपने जो हैदराबाद सभा के बारे में साक्षात्कार करके वीडियो बनाया था वह सत्यता से परे हैं और यह बात मैंने श्री कमल जी कमल जी को मैसेज दिया था लेकिन मैंने उन्हें यह प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए नहीं कहा था क्योंकि मैं आपके द्वारा लिए गए किसी भी साक्षात्कार को आपके विचार और आपके जो अतिथि होते हैं उनके विचार मानता हूं और मैं उन विचारों से सहमत ना होते हुए भी किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं करता आपने पहले भी अनेक वीडियो महासभा के बारे में बताएं मैंने कभी किसी वीडियो के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं की क्योंकि मैं उसको उचित नहीं समझता महासभा का पदाधिकारी जब मैं था तब जो भी निर्णय महासभा के प्रबंध मंडल द्वारा किए गए चाहे संविधान से संबंधित हो या अन्य किसी विषय से या सभा से संबंधित हो उसकी प्रतिक्रिया में उस सभा को तो दे सकता हूं लेकिन अन्य किसी व्यक्ति को उसकी प्रतिक्रिया देना ना तो मेरे अधिकार क्षेत्र में हैं और ना ही मैं उसे उचित मानता हूं। सोशल मीडिया में भी कभी किसी बात पर कमेंट नहीं करता कोई मुझे नहीं लगता कि उससे कोई फर्क पड़ने वाला है जो व्यक्ति सत्य जानते हैं उन्हें कोई बरगला नहीं सकता और जो व्यक्ति सत्य नहीं जानते हैं उनके लिए यही उचित होता है वो उपयुक्त स्थान से अपना समाधान प्राप्त करें। मैं एक बार फिर दोहरा देना चाहूंगा कि स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी के जिस वीडियो को मैंने कमल जी भेजा था वह हूबहू यूट्यूब पर अवेलेबल है और मैंने अपनी ओर से कोई टैग लाइन उसमें नहीं लगाई है आप चाहे तो इस बात इस बात की पुष्टि यूट्यूब पर जाकर कर सकते हैं। मेरे लिए जिन शब्दों का प्रयोग आप के सम्माननिय वक्ताओं ने किया वो उनके विचार थे और मैं उसका बुरा भी नहीं मानता, मेरे द्वारा महासभा में या अन्य किसी संस्था में किए कार्यों के लिए मुझे किसी प्रमाण पत्र या प्रशंसा की आवश्यकता नहीं है मेरा आत्मसंतोष ही मेरे लिए बहुत है ,
फिर भी आपको यदि लगता है कि मेने आपके लिए या आपके अथितियो किसी अतरिक्त भासा क प्रयोग किया है जो कि मेरी मंतव्य में मेने नहीं किया है फिर भी आपका दिल दुखा हो तो सरल हृदय से खमात खामना ।
आप बार बार दोहराते है कि मै अपनी ऊर्जा क सकारात्मक उपयोग नहीं करता , हो सकता है आपको या अन्य कुछ व्यक्तियों को ऐसा लगता है,लेकिन मै उससे विचलित नहीं होता क्योंकि मेने उनको यह निर्णय करने का अधिकार नहीं दिया है ,में उनके भी विचारों का सम्मान करता हूं लेकिन अपशब्दों का उपयोग उनके लिए भी नहीं करता ,और उनके द्वारा मेरे लिए किए गए अपशब्दों का या आरोप का बुरा भी नहीं मानता, आपकी किसी टिपनी पर मुझे प्रतिक्रिया कर नी होती तो क्या आपका नंबर मेरे पास नहीं था ,आप तो पत्रकार है और सोशल मीडिया में भी कुछ लोगो द्वारा मेरे ऊपर किए गए प्रहारो से परिचित होंगे कि में उन पर किसी भी प्रकार की प्रतिक्रया कर उन्हे महत्व नहीं देता ।
निंदा और प्रशंसा में सम रहने का प्रयास करता हूं और प्रसन्न रहता हूं,में व्यर्थ के वाद विवादों में उलझने को उचित नहीं मानता और ना ही किसी पर कोई टिप्पणी करता हूं ।
धर्मसंघ की अनेक संस्थाओं से लगभग तीस वर्षों से जुड़ा हुआ हूं और परम पूज्य आचार्य श्री तुलसी परमपूज्य आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी और वर्तमान में परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में अनेक सस्थावो से निरंतर जुड़ा हुआ हूं और अपने सामर्थ्य और निष्ठा के सेवाएं दी है और दे रहा हूं और उस हेतु पूरे समाज का सम्मान और वात्सलय भी निरंतर प्राप्त होता है , हा जो व्यक्ति सामाजिक कार्य करते है उन्हे कुछ व्यक्तियों की निदा का भी भागी बनता पड़ता है लेकिन में इस से कभी विचलित नहीं होता,कोई व्यक्ति बिना जानकारी के धर्मसंघ पर या धर्मसंघ के आचार्यों पर साधु साध्वियों पर या सास्थावो पर मेरी नजर में जो अस्तय है या ग़लत है वो आरोप लगाए तो बुरा लगता है और उन आरोपों के बारे में कोई श्रावक पूछे तो अपनी जानकारी के अनुसार उसे समझाने का भी प्रयास करता हूं लेकिन कभी भी उन लोगो से ना तो कोई वाद विवाद करता और ना ही वाद विवाद करने को उपयुक्त मानता हूं।आप एक पत्रकार है तो पत्रकारिता के मूल सिद्धान्त कि किसी के बारे में कुछ लिखने के या बोलने के पहले एक बार उस व्यक्ति से संपर्क जरूर करना चाहिए ऐसा तो करते ।आपके पास मेरे नंबर है यदि कोई व्यक्ति मेरी अनुपस्थिति में मेरे ऊपर आरोप लगाए तो क्या आपको उनको रोकना नहीं चाहिए ? आप स्वयं सोचे संजय जी आपको मेरे बारे में जो बोलना है बोल सकते है में बुरा नहीं मानता वो आपके विचार है,
जो मुझे जानते है वो मुझे अच्छी तरह से जानते है और जो नहीं जानते वो यदि मुझे रूबरू होगे तो मेरे बारे में जान लेंगे ।
मेसेज आपको इसलिए लिख रहा हूं कि आपके आज के वीडियो में आप मुझे आहत लगे ,और में नहीं चाहता की कोई भी व्यक्ति बिना वजह मेरे कारण आहत हो या ऐसी धारणा बनाए की मेने उसका अपमान किया है,में ऐसा मानता हूं कि में किसे सम्मान दू या ना दू यह मेरा अधिकार है लेकिन किसी को भी अपमानित करने का मुझे अधिकार नहीं है और मेने आपके लिए कोई अपमानजनक भासा का उपयोग नहीं किया है ।
हा जब कभी धर्मसंघ के बारे कुछ व्यक्तियों को बार बार अपमानजनक और असत्य बात करते सुनता हूं तो आवेश आ जाता है लेकिन प्रयास यही करता हूं कि उनसे वार्तालाप ही ना करू और उनकी ऐसी बातो पर कोई प्रतिक्रया भी नहीं करू ।
अंत में एक बात पूछना चाहूंगा कि एक पत्रकार के रूप में मेरे बारे में चर्चा या बोलने के पूर्व क्या आपको मुझसे संपर्क नहीं करना चाइए था? क्या यह पत्रकारिता क मूल सिद्धांत नहीं है ?
यदि आप को मेरी टिप्पणी प्राप्त हुई की हैदराबाद सभा क चुनाव सविधान सम्मत नहीं था तो क्या आपने हैदराबाद सभा के पंजीकृत सविधान की प्रति मगा कर यह है नहीं देखना चाहिए था के चुनाव के बारे में सभा में क्या प्रावधान है और क्या उनका चुनाव सविधान के प्रावधानों को पालना करते हुए किया गया था । हैदराबाद सभा एक वैधानिक रूप में सरकार में पंजीकृत है तो क्या उन्हे पंजीकृत विधान क पालन नहीं करना चाहिए था ?आधी बात रखे जाने से भर्म उत्पन होता है ,यदि पहले कोई गलती हुई है तो क्या उसे दोहराना चाहिए ? आप पत्रकार है तो सत्य की तह तक पहुंचने का प्रयास करिए. में नहीं चाहता था कि मेरा और आपका समय यह सब बात कर के करू लेकिन में यह भी नहीं चाहता के अकारण मेरे को वजह समझ कर कोई भी आहत हो आपकी आवाज में आप दुखी लगे और वो भी किसी गलतफहमी के कारण इस लिए मेने मेरा भी समय लगाया और आप की पढ़ ने में समय लगेगा ।ना तो में किसी विसय पर कोई टिप्पणी करना चाहता हूं और ना ही आपके अतिथियों की किसी बात पर कोई वार्तालाप।बस इतना ही चाहता हूं कि व्यक्तिगत रूप में आप या आपके साथियों के लिए मेने किसी भी पशु सब्द का उपयोग किया है इसी गलतफहमी हो सके तो अपने में में ना रखे।
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