सेवा इसे कहते है।

श्री भरत भाई शाह के नेतृत्व में छायड़ो ने 56 लाख भोजन पैकेट वितरित किये।
दानदाताओं ने किया दिल खिल कर सहयोग, करीब 8 करोड़ की राशि से पूर्ण हुई ये सेवाएं
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सूरत 27 जून 2020
(गणपत भंसाली द्वारा)
दानवीरों, कर्मवीरों एंव धर्मवीरों की इस नगरी में सेवा  कार्यों से जुड़े सेकड़ो सामाजिक एंव धार्मिक संगठन है। ये संगठन नर सेवा नारायण सेवा की भावना से प्राणी मात्र की सेवाओं में जुटे हुए हैं।  इन तमाम सेवा भी संस्थाओं में एक ऐसा संगठन भी है जो एक वट वृक्ष के रूप में जन जन को छांया प्रदान कर रहा हैं, और वो संगठन है "छायड़ो"। 
 वैसे गुजराती भाषा मे छायड़ो का अर्थ ही छाया दार वृक्ष ही होता है। इस संगठन की स्थापना तो 1974 में गुजरात के पूर्व गृह मंत्री रहे श्री पोपट भाई व्यास ने की थी। फिर इस संस्था की बागडोर सेवाभावी व सह्रदयता के प्रतीक श्री भरतभाई शाह को सौंप डाली थी। 

वर्ष 1998 में श्री भरत भाई शाह ने गरीबों, वंचितों व जरूरतमन्दों को चिकित्सा, भोजन, शिक्षा आदि सुलभता से मुहैया कराने के उद्देश्य से इस संगठन को पुनः गतिशील किया। प्रारम्भ में न्यू सिविल हॉस्पिटल प्रांगण में मरीजों व उनके परिवार जनों को निःशुल्क व नाम मात्र के टोकन दर पर भोजन उपलब्ध कराने हेतु भोजन शाला प्रारम्भ की। और फिर धीरे धीरे सेवा कार्यों का विस्तार होता गया।  इस संगठन में श्री भरतभाई शाह के साथ कंधे से कंधा मिला कर श्री ओमप्रकाश टुटेजा व श्री रामजी भाई चांडक संगठन का गौरव बढ़ा रहे हैं। इस कोरोना काल में छायड़ो की सेवा इतनी अद्वितीय व प्रेरक थी कि तकरीबन 56 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया।  
छायड़ो ने अपना सेवा अभियान 27 मार्च से 31 मई तक चलाया। छायड़ो का नेटवर्क कितना विशाल था कि तकरीबन 26 हजार घरों में महिलाएं  5-5 एक्स्ट्रा रोटी छायड़ो के लिए बनाती और 1280 के करीब कार्यकर्ता इन रोटियों को छायड़ो तक पहुंचाते विशेष बात यह भी थी महिलाएं इन रोटियों के साथ 10, 20 रु के नोट भी पैक कर देती ताकि जिन्हें रोटियां मिले तो नगद राशि भी उनके पास पहुंचे। ये भोजन पैकेट जो कि सचिन, पर्वत पाटिया, खरवर नगर, डिंडोली, खरवासा, किम चौकड़ी, ओलपाड़, उधना व शहर के कौने कौने में जरूरतमन्दों व गरीबो तक भेजे जाते। 
अलग-अलग विस्तार में जगह-जगह छायड़ो के रसोई घर स्थापित कर रखे थे, जिसमें अमिधरा, बद्रीनारायण, पर्वत पटिया, श्री श्याम राठी के कामधेनु फार्म हाउस आदि स्थल प्रमुख है।  इसके अलावा श्री लक्ष्मीनाथ सेवा समिति से 7 हजार रोटी, श्री माहेश्वरी भवन सिमिति, श्री मानस मण्डल, श्री अन्नपूर्णा सेवा ट्र्स्ट से 5 हजार रोटी, श्री सेवा फाउंडेशन, श्री बाबा भोलेनाथ का भण्डारा 5-6 हजार रोटी, पंजाबी समाज द्वारा संचालित श्री राधाकृष्ण मंदिर ट्रस्ट से 5 हजार रोटी,, दादा भगवान मंदिर, श्री गोविन्द भाई ढोलकिया के यहां से ऑटोमेटिक रोटी मेकर मशीन से 5 हजार रोटी बन कर तैयार होती थी। करीब 100 टन सब्जियां तो गलतेश्वर मंदिर व अन्य जगह के किसानों ने भेजी, दानवीरों का समर्पण इतना था कि बिना किसी सूचना व किसी नाम के प्रचार के 100-100 डिब्बे तेल के भिजा देते। कलरटेक्स, चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स आदि का भी सहयोग अद्वितीय रहा। सहयोग राशि देने वालों में तीन दानदाता 10-10 लाख के व 5-5 लाख का सहयोग करने वाले दानवीर भी बहुत थे। एक दानवीर तो श्री भरत भाई के हाथ में नोटों से भरी एक थैली पकड़ा कर चला गया और जब थैली खोली तो अंदर 10 लाख रुपये के नोट थे। इसके अलावा एक-एक लाख, दो-दो लाख व 3 लाख, 4 लाख तक की थेलियाँ भरतभाई को थमा कर चले जाते।  यही नही आटा, दालें, चावल, तेल, मिर्च मसाले टनों बंद आता रहा। 
भरत भाई ने गत वर्ष का एक विरले दानदाता के समर्पण का एक उदाहरण दिया की सूरत के समीप सायण से सटे कठोल कस्बे के एक दानवीर मुम्बई के मलाड़ विस्तार में सिर्फ एक रूम किचन के मकान मैं निवास करते है उनके पास बमुश्किल  3-4 करोड़ की पूंजी होगी, उस व्यक्ति की दरियादिली ये रही कि छायड़ो को उन्होंने 65 लाख रु की धनराशि संगठन के आर्थिक पोषण हेतु सौंप डाली, उसी दानवीर को जब पता चला कि कोरोना महामारी में छायड़ो के बैनर तले सेवा का इतना बड़ा अभियान चला रहे है तो उन्होंने श्री भरत भाई को फोन किया और शिकायत करते हुए कहा कि आप इतना बड़ा सेवा कार्य कर रहे हैं और मुझे सूचित तक नही किया, कृपया इस सेवा यज्ञ में मेरा भी 10 लाख रुपये का एक छोटा सा योगदान स्वीकारें। श्री भरत भाई बताते हैं कि हर रोज़ कोई न कोई महानुभाव आर्थिक सहयोग करने मेरे पास पहुंच ही जाते हैं। भरत भाई ने के अनुसार उनके पास से तो इस सेवा उपक्रम पर महज ढाई करोड़ रु खर्च हुआ है। लेकिन अनाज, आटा, तेल, मसाले, सब्जियां, तैयार भोजन आदि के सहयोग राशि की गणना करें तो इस समूचे सेवा यज्ञ में लगभग 8 करोड़ की राशि नियोजित हुई है। 
श्री भरतभाई ने बताया कि इस सेवा यात्रा में जुटे एक ड्राइवर ने पूछा कि क्या में भी सहयोग कर सकता हूँ ? तो भरत भाई ने कहा क्यों नही, तो ड्राइवर ने अपनी जेब से अपनी क्षमता अनुसार सहयोग दिया। ये उल्लेखनीय है कि इस कोरोना महामारी में शहर  में छायड़ो की सेवा यात्रा  अभी भी चल रही है प्रतिदिन 1500 लोगो के लिए लंच व डिनर की व्यवस्था की जा रही है, 2 हजार पानी की बॉटलें भी उपलब्ध कराई जा रही है। 
डॉक्टरों के लिए नाश्ता,चाय, कॉफी, बिस्किट के अलावा पेस्ट, साबुन आदि जरूरत की वस्तुओं का प्रबंध भी किया जा रहा है। कोविड मरीजों को रोटी, सब्जी,, दाल, चावल, कठोल, नींबू  आदि का भोजन भी छायड़ो की और से दिया जा रहा है।  ये उल्लेखनीय है कि छायड़ो पिछले 23 वर्ष से न्यू सिविल हॉस्पिटल में मरीजों व उनके परिजनों को शुद्ध एंव सात्विक भोजन उपलब्ध करा रहा है 
वर्तमान में ये भोजन प्रति व्यक्ति महज 3 रु में दिया जा रहा है। नव प्रसूताओं को देसी घी में हलवा व प्रत्येक महिला को डेढ़ किलो डिलीवरी के समय उपयोगी मसाले तथा नवजात बच्चो के लिए 16 कपड़ो की किट निःशुल्क दी जा रही है। छायड़ो द्वारा एम आर आई, सी टी स्कैन, एक्सरे, डायलिसिस, पैथोलॉजी, आदि तमाम सेवाएं रियायती दर पर उपलब्ध है। इसके अलावा उधना में भी छायड़ो की जीवन ज्योत सेंटर पर एम आर आई, सी टी स्कैन आदि की सेवाएं जारी है। पर्वत पाटिया में राजस्थान युवा संघ संचालित हॉस्पिटल में भी छायड़ो सहयोगी के रूप में सेवाएं दे रही है।
 न्यू सिविल हॉस्पिटल में छायड़ो ने सबसे पहले 20 प्रतिशत की रियायती दर पर दवाइयां उपलब्ध कराई थी। जेनरिक दवाइयां 40 से 80 प्रतिशत डिस्काउंट में वहां मिल रही है। सर्जिकल मेडिकल आइटम मात्र 10 प्रतिशत मुनाफे के साथ बेचे जा रहे है। सचमुच में छायड़ो की सेवाएं अद्वितीय, अनूठी व अनुपम है। महावीर इंटरनेशनल सूरत मुख्य शाखा के वीर विराएं छायड़ो व श्री भरत भाई शाह तथा संचालक मंडल के इन नेक प्रयासों की सराहना करते है।

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