सूरत टेक्सटाइल्स मॉर्केटों में ग्राहकी चलने की उम्मीद नए वर्ष से पहले नजर नही आती,
● आर्थिक संकट रूपी सुनामी की आशंका, बढ़ सकते है लेनदेन सम्बन्धी विवाद, घट सकती है अनहोनी घटनाएं।
● विकट हालातो के चलते सूरत के कपड़ा व्यापारियों को कुछ सूझ नही रहा कि क्या करें और क्या न करें?
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(गणपत भंसाली)
(सूरत)
विश्व व्यापी कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है उसका असर अधिकांश देशों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा है, भारत के अन्य उद्योगों के साथ-साथ टेक्सटाइल्स उद्योग अत्यंत ही विकट दौर से गुजर रहा है, अतः देश के टेक्सटाइल्स उद्योग के विकास में सूरत के मेन मैड फायबर अतार्थ आर्ट सिल्क कपड़ा उद्योग की बहुत बड़ी भूमिका है, लेकिन कोरोनो महामारी के प्रकोप के चलते सरकार द्वारा लागू लॉक डाउन अवधि में या यूं कहें कि पिछले 4 माह से सूरत का टेक्सटाइल्स उद्योग चरमरा सा गया है, पहले लॉक डाउन में तो सूरत रिंग रोड़ विस्तार की 180 के करीब टेक्सटाइल्स मार्केटे व उससे जुड़े 70 हजार से ज्यादा व्यापारी बड़े ही पेशोपेश में है, उन सभी को कुछ भी सूझ नही रहा कि वे क्या करे और क्या न करे? मात्र कपड़ा व्यापारी ही नही बल्कि कपड़ा उद्योग से जुड़े तमाम घटक असमंजस में हैं, भले ही वो स्पिनिंग उद्योग हो या वीविंग उद्योग या फिर कपड़ा प्रोसेसिंग इकाइयां तथा एम्ब्रॉयडरी, हस्तशिल्प व मशीनरी वर्क जैसे वेल्यू एडेड वर्क तमाम घटक परेशान है, अनलॉक की घोषणा के बाद पहले सारोली विस्तार और फिर रिंग रोड़ विस्तार में ओड इवन की प्रणाली से दुकाने भले ही खुलने लग गई, रिंग रोड़ विस्तार के बाजार में भले ही थोड़ी चहल-पहल हो गई, लेकिन शहर में रोजी रोटी के लिए आए उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, छतीसगढ़ आदि राज्यों के लाखों मजदूर अपने अपने गृह राज्यों की और जा चुके हैं, चूंकि वे गए भी तीसरे लॉक डाउन के समय मई माह के अंत मे ही गए थे अतः उनके फिलहाल जल्दी वापस आने की संभावना कम ही लग रही है, उत्तरप्रदेश व बिहार जैसे अनेक राज्यों में मनरेगा के तहत भी प्रवासी मजदूरों को रोजगारी भी मिल जाती है, ऊपर से बारिश की सीजन है तो यहां से गये मजदूर अपने परिवार वालों के साथ खेती बाड़ी में जुट गए हैं, ऐसे में सूरत की टेक्सटाइल्स इंडस्ट्रीज की गाड़ी कैसे पटरी पर लौट पाएगी? ये भी संभावना है कि कोरोनो कंट्रोल म्लांके आने के बाद सूरत से प्रशासक, उद्यमी, नेता व व्यवसायिक संगठन अग्रणी मजदूरों को वापस बुलाने हेतु उड़ीसा व यूपी बिहार, झारखंड आदि राज्यो की परिक्रमा भी करें, ऐसा अतीत में हो चुका है सांसद काशीराम राणा उड़ीसा में पहुंच कर व वहां डेरा डाल कर मजदूरों को मनुहार पूर्वक वापस ला भी चुके हैं, बहरहाल देश भर से कपड़ें में कोई पूछपरख नही है ऐसे में मजदूर होते भी तो उनके द्वारा लिया गया प्रॉडक्शन आखिर बेचते किसे?, अनलॉक के अनेक साइड इफेक्ट दिखने लगे है,सूरत महानगर में कोरोना वायरस अब तीव्र गति से पांव पसार रहा है, सूरत में एक ही दिन में 155 नए पॉजिटिव चिन्हित किए गए व 24 घण्टे में 5 लोगों की इस रोग की वजह से मौत हो गई, अब तक कुल 3684 केस आए है व कुल 153 लोग कोरोना की वजह से अपनी जान गंवा चुके है, जबकि ठीक होने वालों की संख्या 2555 है। टी वी न्यूज चैनलों पर गुजरात में कोरोना महामारी से संक्रमितों व मौत के आंकड़ों से गुजरात आने से कपड़ा व्यापारी घबरा रहे हैं कि जाने अनजाने में कहीं इस रोग के चपेट में न आ जाएं ? ये उल्लेखनीय है कि गुजरात मे पिछले 24 घण्टे में 25 मौतें कोरोना मरीजों की हुई है, वैसे पूरे राज्य में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 29000 तक पहुंच चुका है व राज्य में अब तक 1736 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, अहमदाबाद व सूरत में कोरोना वायरस की व्यापकता के चलते ऐसी खबरें सुन कर देशावरी व्यापारी सूरत आने का साहस नही जुटा पा रहा है, हालांकि टेक्नोलॉजी के इस दौर में रंग, डिजाइनें व पेटेंट आदि वॉट्सऐप व वीडियो कॉलिंग व के द्वारा देखी जा सकती है, वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा मीटिंग की जा सकती है लेकिन जब कपड़ा हाथ से देख कर परखना होता है तो वो तो रूबरू व प्रत्यक्ष रूप से ही सम्भव है, कोरोना रोग की व्यापकता के चलते बुधवार को सूरत के मेयर डॉ श्री जगदीश पटेल, महानगर पालिका आयुक्त बच्छानिधि पाणी तथा साउथ गुजरात टेक्सटाइल्स ट्रेडर्स एसोसिएशन के श्री सांवर प्रसाद बुधिया, कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र जैन, महेश जैन, फेडरेशन ऑफ टेक्सटाइल्स ट्रेडर्स एसोसिएशन (फोस्टा) के अध्यक्ष श्री मनोज अग्रवाल, मीडिया प्रवक्ता श्री रंगनाथ सारड़ा व वीवर्स एसोसिएशन, प्रोसेसिंग एसोसिएशन, एम्ब्रॉयडरी एसोशिएशन आदि के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग की जिसमें कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप से अवगत कराया, मीटिंग में मनपा आयुक्त ने बताया कि अब टेक्सटाइल्स मॉर्केट सप्ताह में 5 दिन अतार्थ सोमवार से शुक्रवार तक चालू रखा जा सकेगा, शनिवार व रविवार को अवकाश रहेगा, मॉर्केटों सुबह 9 से शाम 7 बजे तक शुरू रह सकेगा, वैसे सूरत महानगर में रात्रि 9 से प्रातः 5 बजे तक कर्फ़्यू लागू है, मॉर्केटों के लिए सतर्कता बरतने की हिदायत देते हुए कहा कि मॉर्केट के टॉयलेट्स आदि सेनेटराइज करते रहें, 60 साल से ऊपर उम्र के कोई व्यक्ति को कार्य पर न बुलाएं, मॉर्केटों में आने वाले तमाम पार्सलों को सेनेटराइज करना होगा, मॉर्केटों की दुकानों आदि में एयरकंडीशनर का उपयोग न्यूनतम करना व वेंटिलेशन खिड़कियां आदि खुले रखना, श्रमिको कारीगरों आदि के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा, गर्म पानी दवाइयों आदि का प्रबंध करना, कारखानों में लगी मशीनों को सेनेटराइज करते रहना, बाहर से आने वाले रो मटेरियल्स का उपयोग तीन दिन बाद करना, वर्तमान हालात को देखते हुए लूम्स कारखानों, प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज, एम्ब्रॉयडरी आदि कारखानों में अपने गृहराज्य गए श्रमिकों को कोरोना के नियंत्रण में आने तक फिलहाल नही बुलाना, बार बार सेनेटराइज व साबुन आदि से प्रत्येक व्यक्ति को हाथ धोना, वॉशेबल कॉटन के मास्क उपयोग में लेना आवश्यक है, सोश्यल डिस्टेसिंग की पालना करना, व कारखानों आदि में सामूहिक रूप से बैठ कर भोजन करने की बजाय दूरी बना कर भोजन करना, कारखानों में मजदूरों की आवाज़ व्यवस्था अंदर ही रखने को प्राथमिकता दी जाएं व बाहर से आए श्रमिको की आवास व्यवस्था में एक कमरे में चार से ज्यादा व्यक्ति साथ में नही रहना चाहिए, मीटिंग में मनपा आयुक्त का ध्यान इस और भी दिलाया गया कि दुकानदार अगर दुकान पर अकेला बैठा है और मास्क नही पहना हो तो उस पर पेनल्टी न लगे, आयुक्त ने कहा कि जब व्यापारी आये तो दोनों व कर्मचारियों सभी को मास्क तो आवश्यक पहने ही चाहिए। इतनी तमाम शर्तो व ऊपर से ग्राहकी का टोटा तथा गले में अटका पुराना रेडी स्टॉक व्यापारियों के लिए मुसीबत का कारण बनी है, इस कोरोनो महामारी के चलते पहले वैवाहिक सीजन कोरी गई, फिर रमजान माह की ग्राहकी बेरंग गई, अब स्कूल यूनिफॉर्म, सावन, रक्षा बंधन, ऑडी, ओणम आदि तमाम सिजनें पिटती नजर आ रही है, जून व जुलाई माह में दक्षिण भारत के तमिलनाडु से ऑडी अतार्थ ऑफ सीजन की सेल रूपी इतनी बम्पर ग्राहकी चलती आई है कि जितना भी डेमेज, फटा, कटा तथा आउट ऑफ फैशन जैसा प्रत्येक तरह का स्टॉक साफ हो जाता था, लेकिन अब वो माल बिकना तो दूर उल्टा जनवरी से मार्च तक कि अवधि में लिया स्टॉक भी ऑफ सीजन के डिस्काउंट दरों पर ही बिकना है, अप्रैल मई व जून माह में अमृतसर के कपड़ा व्यापारियों ने कपड़े में भरपूर कामकाज कर दिया कारण पंजाब के मुख्यमंत्री श्री अमरेंद्र सिंह ने व्यापारियों व उद्योगपतियों को उस दौर में इंडस्ट्रीज चालू रखने की छूट दे रखी थी तो अमृतसर के उद्यमियों ने भिवंडी व सूरत में पी वी, पी सी आदि ग्रे खूब खरीदा और लेडीज ड्रेस मटेरियल्स का उत्पादन लेकर कुर्ती, सलवार कमीज के फेब्रिक्स के रूप में बड़ी मात्रा में मंगाया और तैयार करा कर दिल्ली पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू कश्मीर जैसी मंडियों में भेजा जो कि रमजान ईद की ग्राहकी में खप गया, भिवंडी के ग्रे कपड़ा आढ़तिया श्री महावीर मेहता के सनुसार कोरोना महामारी के विपरीत हालातों में भी कुछ जागते व तांकते कपड़ा व्यापारी करीब 100 ट्रक कपड़े का व्यापार कर बैठे, बालोतरा के टेक्सटाइल्स उद्योग से जुड़े युवा उद्यमी श्री मुकेश सालेचा के अनुसार बालोतरा (राज) में भी कुछ उद्यमियों ने नाइटी प्रिंट कपड़े का भरपूर उत्पादन लिया और केरला मंडी में भारी मात्रा में भिजाया, बहरहाल सूरत के हालात विकट है स्थानीय व्यवसायियों को पुराना बकाया यानी जनवरी फरवरी ही नही बल्कि 2019 का भी बकाया भुगतान नही आ पा रहा है, अब हालात ऐसे खराब है कि बकाया पेमेंट मांगने पर व्यापारी अपने पास पड़ा कपड़ा वापस भेजने की कहता दिखता है, ऐसे में व्यापारियों ने बकाया भुगतान के मामले में खामोशी अख्तियार कर रखी है, अब जुलाई, अगस्त, सितम्बर तो बरसात भरे रहने है और कोरोना विदा होता फिलहाल तो दिख नही रहा है, ऐसे में वर्ष 2021 पर सभी की निगाहें टिकी हुई है, गरीब वर्ग को तो अपना पेट भरने की चिंता सता रही है, मध्यम वर्ग तो सबसे ज्यादा तकलीफ में है वो तो किसी के आगे हाथ भी नही पसार सकता, देश मे सर्वाधिक आबादी गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों की है ये दोनों वर्ग कपड़ा फटा कटा भी पहन कर गुजारा कर देगा, कहावत भी है कि कपड़े को तो कारी (पैबंद) भी लग जाती है लेकिन पेट को कारी नही लगती, लॉक डाउन में जो भी शादियां हुई वे 50 जनों के सीमित परिवार जनों की उपस्थिति में हुई तथा शादियों के लिए दूल्हा दुल्हन के कपड़े आदि खरीदे गए वे आम खरीदी के मुकाबले 40 प्रतिशत के भी नही है, इन तमाम हालातों में स्थिति बहुत ही विकट हो सकती है, कपड़ा बाजार में आर्थिक रूप से कमजोर पार्टियां बड़े पैमाने पर पलायन कर सकती है, आर्थिक विवाद बेतहाशा बढ़ सकते हैं, तथा अनेक अनहोनी घटनाएं घटनी सम्भव है, ऐसे में सूरत के मध्यमवर्गीय दुकानदारों के लिए दुकान, मकान किराया, हाउसिंग व कार आदि लोन की किश्तें, घर व दवाई आदि का खर्च नियोजित करना भारी पड़ रहा है, इन हालातों में कपड़े की कई दुकानें बंद भी हो सकती है, कपड़ा व्यापारी अपना कारोबार बदल कर किराना, सब्जी, फ्रूट, दवाइयां, खाद एंव कीटनाशक, तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के बिजनेश की और डायवर्ट हो सकते है, ये भी सम्भव है कि राजस्थान आदि प्रदेशो से आए मध्यमवर्गीय व्यवसायी पुनः पलायन कर अपने गांवों शहरों की और जा सकते हैं। बहरहाल आर्थिक संकट भरी सुनामी के परिदृश्य सामने नजर आ रहे हैं।
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