जीत की बाजी किशन मोदी के नाम

कटक मारवाड़ी समाज चुनाव में कड़ी टक्कर का रोमांच।

किशन मोदी के सर पर जीत का सेहरा...









5 जनवरी 2020 को सम्पन्न हुए कटक मारवाड़ी समाज के चुनाव में रहस्य व रोमांच का जो तड़का देखने को मिला उसको कटक मारवाड़ी समाज भूल नही पायेगा।


कहने को यह सामाजिक चुनाव था पर चुनाव  संरचना ,प्रत्याशियों की घोषणा की जाजम से ही जो सियासी पासे चलने शुरू हुए तथा वहां से लेकर चुनाव होने तक जिस तरह से चुनाव में समीकरणों के रंग बनते व बिगड़ते दिखे ..जिस तरह से प्रत्याशी एक एक वोट के लिए मतदाता के दुआर पर जा कर याचक के रूप में दामन फैलाते दिखे वो ऐसा था जैसे यह चुनाव कुछ खास है।


इस चुनाव में सबसे जबरदस्त घुमाव तब आया जब  पूर्व अध्यक्ष विजय खण्डेलवाल की टीम  टूटी औऱ एक समूह बड़े घडे के रूप में घोषित प्रत्याशी नथमल चेनानी उर्फ मामा जी से अलग होकर किशन मोदी के पक्ष में खड़ा हो गया....यहां पर यह सवाल भी था कि किशन मोदी की एंट्री भी इस पक्ष की वजह से ही हुई या बाद में समर्थन के रूप में तब्दील हुई।इस खेमेबाजी की वजह से चुनाव में प्रतिस्पर्धा आ गई और लड़ाई रोमांचक हो गयी।





गौरतलब है कि इस रण में श्री नथमल चेनानी पहले से ही विजयी माने जा रहे थे जब तक खेमे बाजी की दीवार नही बनी थी।फिर जैसे ही श्री किशन मोदी के समर्थन में विजय टीम की टूट का बड़ा धड़ा सामने आ गया वैसे ही चेनानी अर्थात मामा जी के लिए हल्की चुनोती का रूपक बन गया अब यहां दो और उम्मीदवार श्री सुरेश शर्मा व श्री पवन भावसिंका की उपस्थिति से उनके अपने वोटों की गणित भी इस चुनाव में कुछ असरकारी लगने लग गई।


इस चुनाव में दूसरा मोड़ नामांकन पत्र वापिस लेने की तारीख के आसपास था क्योंकि यहां नथमल चेनानी फिर जबरदस्त मजबूत लगने लग गए थे और अफवाहों का बाजार यहां तक गर्म हो गया था कि किशन मोदी मैदान से हटने के लिए समझौते की किसी गली का  इंतजार कर रहे है।

पर अफवाहे धरी रही और किशन मोदी ने मैदान से वापसी की जगह अपने प्रचार अभियान को तेज कर दिया इस बीच पूर्व सचिव व किशन मोदी के प्रबल समर्थक श्री रमन बगड़िया का एक साक्षात्कार डिजिटल फर्स्ट न्यूज़ संजय सनम के दुआरा सोशल मीडिया में प्रसरित हुआ और उसमें तीखे सवालों के बड़े संयमित,स्पष्ट जवाब देने से किशन मोदी की  सुस्त हवा को अचानक तेज रप्तार मिल गयी..फिर भी यहां तक श्री मोदी की स्थिति पहले से तो काफी बेहतर हुई पर श्री चेनानी के सामने वो अब भी कुछ पीछे ही लग रहे थे 

पर इस चुनाव में अचानक ट्विस्ट तब आया जब श्री  किशन मोदी ने  डिजिटल फर्स्ट न्यूज़ को दिए अपने साक्षात्कार में जैन तेरापंथ समाज के श्री मोहन लाल सिंगी के नाम की चर्चा करते हुए इस बात को उठाया कि अगर उनका नाम चुनाव चर्चा से पर्चा भरने तक रहा होता तो वो श्री मोहनलाल सिंगी के समर्थन में खड़े होते अर्थात चुनाव नही लड़ते।


श्री किशन मोदी के इस भावनात्मक बयान ने खासा असर किया और श्री मोहनलाल सिंगी  ने एक चुनावी सभा मे श्री मोदी के पक्ष में अपना समर्थन दे दिया...


गौरतलब है कि श्री मोहनलाल सिंगी इससे पहले श्री नथमल चेनानी के पक्ष में खुला समर्थन दे चुके थे तथा उनके पक्ष में खुले खड़े थे इसलिए अचानक श्री सिंगी का किशन मोदी के पक्ष में आ जाने से चुनावी समीकरण भी अचानक बदल गए और किशन मोदी की ट्रेन अब  चेनानी से आगे निकलती दिख रही थी।

चेनानी समूह से  इस  नुकसान की भरपाई की फिर पूरी कोशिश हुई और अब  उनको इसकी काट अपने विपक्षी खेमे की एक गलती से मिल गयी अर्थात किशन मोदी जी के चुनाव प्रचार के लिए एक चुनावी सभा मे  प्रत्याशी के चरित्र चित्रण व कटक मारवाड़ी समाज मे बाहरी शब्द के प्रयोग से  मोदी समूह फिर बेक फुट पर आ गया।अर्थात चुनाव का रोमांच हर दिन एक नए मिजाज के साथ बढ़ता दिख रहा था कभी चेनानी समूह आगे तो कभी मोदी समूह आगे पर विश्वस्त शायद कोई नही था इसलिए एक एक वोट के लिए अथक मेहनत प्रत्याशी कर रहे थे।


यह चुनाव रोमांचक इसलिए था क्योंकि विधानसभा चुनावों की तर्ज पर प्रत्याशी अपने घोषणा पत्र के साथ था..आरोप भी थे,वादे भी थे,याचना भी थी...ओर दरवाजे दरवाजे पर उम्मीदवार जाते दिख रहे थे...सियासी पार्टियों की तरह समर्थक,व विरोधी भी समझे जा रहे थे,रोड शो भी था,जन समूह के साथ जन सभाएं भी थी,पेम्पलेट ,बेनर की प्रचार सामग्री भी थी। मीडिया की इस चुनाव पर निगाहे थी तो लचकदार खबरों के कड़कदार शीर्षक भी थे अर्थात सियासी पार्टियों की तरह यह चुनाव प्रतिष्ठा की वो रण भूमि बन गया था जहां जीत के लिए हर सम्भव कोशिश का जुनून दिख रहा था।


श्री नथमल चेनानी  के पक्ष में शुरुआत से सर्वमान्यता दिखी थी तथा दर्जनों संस्थाओ में सक्रिय रूप से जुड़े होने का उनको अपने विस्तारित संर्पको का सीधा लाभ भी मिल रहा था तथा इसकी वजह से मातृ शक्ति,युवा शक्ति की सक्रिय जमात उनके चुनाव प्रचार को सम्हाले हुए दिख रही थी।

बहुत कुछ मामा जी के पक्ष में होने के बाद भी उनको जिस पिच पर बेटिंग करनी थी वो ग्राउंड उनके प्रमुख विपक्षी के लिए अपना होम ग्राउंड जैसा था इसलिए यह नकारात्मक पक्ष मामा जी के लिए भी विचारणीय था।


श्री किशन मोदी जी का प्रमुख परिचय भगवान गोपीनाथ जी के प्राचीनतम मंदिर से धार्मिक श्रद्धा व आस्था से जुड़ा था क्योंकि वे यहां सचिव के रूप में व्यवस्थाओ को संचालित कर रहे थे...औऱ मारवाड़ी पट्टी के अपने इस पिच पर श्री किशन मोदी मजबूत दिख रहे थे और चुनाव की वोटिंग भी यही होनी थी।यहां के मतदाताओं का वोट प्रतिशत बहुत अच्छा ही रहने की संभावना लगाई जा रही थी इसलिए यह पक्ष श्री मोदी के खाते में भी जा रहा था।


इस चुनाव में प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी थी कि यह डर लगने लगा था कि 5 जनवरी को चुनाव के दिन कही समर्थक आपस मे तकरार से टकरा न जाये पर चुनाव के दिन माहौल में नरमी व मतदाताओ के उत्साह में गर्मी थी।चुनाव समिति ने काफी हद तक चुनाव को व्यवस्थित स्वरूप दिया था जिसे देख कर लोगों के मन मे बड़ी शिकायत नही रही थी। मतदान का प्रतिशत  पिछले वर्ष की तुलना में रिकॉर्ड अर्थात 50 प्रतिशत से ऊपर बढ़ा था और यह निर्णायक प्रतीत हो रहा था।

श्री रमन बगड़िया(पूर्व सचिव)
विजय रथ का सारथी



विश्लेषण की दृष्टि से यह माना जा रहा था कि वोट प्रतिशत का असर सकारात्मक रूप से मामा जी के पक्ष में जायेगा क्योकि श्री मोदी को अपने होम ग्राउंड  मारवाड़ी पट्टी में वोट निकालने का लाभ जितना मिलेगा उसकी काट अन्यत्र क्षेत्रो से नामी गिरामी वोटों की बढ़त मामा जी की राह बन सकती है पर चुनाव परिणाम जब आना शुरू हुआ तब प्रथम दौर से तृतीय अर्थात आखिरी दौर तक किशन मोदी की बढ़त बरकरार बनी रही।तृतीय राऊंड में यह अंदेशा था कि यहां उलटफेर हो सकता है पर किशन मोदी  वहां पर भी बढ़त बनाये रहे और इस रोमांचकारी चुनाव के विजेता बन ही गए। 

किशन मोदी की इस विजय  में टीम विजय के महत्वपूर्ण  स्तम्भ पूर्व सचिव रमन बगड़िया की महत्वपूर्ण भूमिका रही बताई जाती है अर्थात रमन बगड़िया की सारथी की कुशल भूमिका ने श्री किशन मोदी को नथमल चेनानी के बड़े नाम व समर्थन के बड़े चक्रव्यूह को भेदने में सफल किया।

यद्धपि श्री किशन मोदी की अपनी पहिचान व प्रतिष्ठा भी श्री गोपीनाथ मन्दिर के सचिव के रूप में कम नही है पर कूटनीतिक दक्षता श्री रमन बगड़िया की बताई जा रही है।

मामा जी के खेमे में बड़े बड़े नाम  खुल कर जुड़े थे औऱ ऐसा लग रहा था कि मामा जी के रथ पर एक नही कई सारथी खड़े थे।कही निर्णयात्मक चूक या असमंजस की स्थिति में सही समय पर सही स्ट्रोक न खेल पाने की वजह से   मामा जी की जीती हुई बाजी हारने का कारण हो सकती है।

इस चुनाव में श्री सुरेश शर्मा  शतक तक पहुंचने में तो सफल हुए पर जमानत नही बचा पाए और सबसे आखिर में रहने वाले पवन भावसिंका के वोट तो बताने योग्य भी नही आये।कुल मिलाकर ये दोनों उम्मीदवार वोट काटने की भूमिका में भी खरे नही उतरे और मतदाताओ के मिजाज में सिर्फ दो ही प्रत्याशी रहे ।

श्री मोदी की यह विजय अद्धभुत कही जा सकती है पर अब उनको जिम्मेदारी भी उसी अंदाज में समाज के लिए निभानी होगी।श्री नथमल चेनानी भले ही इस टक्कर में जीत के आसपास रहे हो पर इस उम्र में उनकी यह मेहनत व दृढ़ इच्छा शक्ति अर्थात यह जज्बा निश्चित रूप से स्वागत योग्य कहा जायेगा।हम यह आशा करते है कि श्री मोदी सबका साथ-सबका सम्मान की तर्ज पर आगे बढ़ कर समाज की एकता के धागे को मजबूती प्रदान करेंगे।

-संजय सनम
संपादक-फर्स्ट न्यूज़

यह आलेख फर्स्ट न्यूज़ के नव वर्ष विशेषांक में प्रकाशित हो रहा है।


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