*सावधान हो जाइए, कहीं आपके साथ भी ऐसा ना हो जाए!!!*
जी हां फेसबुक के सभी मित्रों से मैं अपने साथ घटित घटना का जिक्र करना चाहता हूं। मेरे साथ घटित घटना का जिक्र मैं इसलिए भी करना चाहता हूं ताकि आप लोग सावधान रहें और आपके साथ यह घटना घटित ना होने पाए।
बीते कुछ समय से मेरा खाता कोटक महिंद्रा बैंक में संचालित हो रहा था। मैंने पेटीएम की सुविधा अपने मोबाइल में प्राप्त कर रखी थी। 21जनवरी की शाम को मेरे पास एक कॉल आई जिसमें कॉल करने वाले ने कहा कि आपका पेटीएम सस्पेंड हो रहा है इसलिए आपको केवाईसी की आवश्यकता है और उन्होंने मुझसे मेरे मोबाइल पर एक नया ऐप quick support डाउनलोड करवाया जिससे मेरा मोबाइल उसने हैक कर लिया और मेरे मोबाइल का कंट्रोल उसके हाथ में चला गया मैं इन सब बातों से अनजान था।
जानकारी प्राप्त करने के तत्काल बाद काॅल करने वाले ने कहा कि आप कंफर्मेशन के लिए ₹1पे टी एम में डालिए ,तब मैंने ₹1 डाल दिया उसके तत्काल बाद मेरी बिना इच्छा और अनुमति के ₹10000 का विदड्राल वहां से हो गया । चूंकि यह सारी कार्यवाही इंटरनेट पर मोबाइल से हो रही थी और जब ₹1 डाला गया था उस समय मेरा पासवर्ड वह ठगी करने वाला व्यक्ति देख रहा था जिसे प्राप्त करने के बाद उसने लगातार 4 किस्तों में मेरे खाते से 1 लाख 20000 रुपए निकाल लिए इस पूरे घटनाक्रम में ठगी करने वाला व्यक्ति तो दोषी है ही और उसके खिलाफ मेरे द्वारा एफ आई आर दर्ज करवा दी गई है लेकिन यहां बैंकिंग सिस्टम पर भी तमाम सारे सवाल खड़े होते हैं जिन्हें में बारी-बारी से आपके सामने रख रहा हूं।
सबसे पहली स्थिति इस पूरे घटनाक्रम में यह रही कि जैसे ही मेरे अकाउंट से ₹90000 निकले तो महिंद्रा कोटक बैंक से मेरे पास फोन आया जिसमें पूछा गया क्या आपने ₹90000 का money withdrawal किया है मैंने तत्काल मना किया और उनको कहा कि मेरे द्वारा किसी प्रकार का पैसा नहीं निकाला गया है यह मेरे साथ ठगी हो रही है मेरे अकाउंट को तत्काल सीज कीजिए और जहां के लिए भी पैसा ट्रांसफर किया गया है या जिसने भी किया है उससे वसूली के संबंध में कार्यवाही कीजिए। इस पर बैंक कर्मचारी ने यह कहा कि आपको पैसा वापस लेने के लिए और कार्यवाही करने के लिए बैंक मैनेजर से मिलना पड़ेगा ।मैं यह पूछना चाहता हूं कि अगर नेट बैंकिंग में इन बातों के लिए बैंक मैनेजर के पास जाकर और लिखित आवेदन देकर ही सारी कार्यवाही करना होगी तो फिर नेट बैंकिंग का अर्थ क्या रह जाएगा जब सारा ट्रांजैक्शन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से हो रहा है तो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के तहत ही मेरे द्वारा कही गई बात पर तत्काल कार्यवाही क्यों नहीं की गई उस ठगी करने वाले व्यक्ति को क्यों इतना मौका दिया गया कि वह लगातार ठगी करता जा रहा था और मेरे कहने के और मना करने के बावजूद बैंक उसको रोक नहीं रही थी।
यहां यह कहना लाजमी है के इस पूरे घटनाक्रम में बैंक की भूमिका को भी संदिग्ध माना जाना चाहिए क्योंकि जब बैंक का ग्राहक यह कह रहा है कि मेरे साथ ठगी हो रही है मैंने कोई पैसा नहीं निकाला और ना ही मुझे निकालना है मेरे खाते में जो भी पैसा है उसे सुरक्षित रखिए और जो पैसा निकाल लिया गया है उसे वापस लीजिए तो बैंक ने ऐसा सिस्टम डेवलप करके क्यों नहीं रखा कि जिस व्यक्ति को पैसा ट्रांसफर किया गया है जिस खाते में ट्रांसफर किया गया है उस खाते से उस व्यक्ति से पैसा वापस लिया जा सके।
कंप्यूटर के युग में पासवर्ड चोरी हो सकता है ठगी करने वाला व्यक्ति अपनी गलत पहचान बताकर ग्राहक से पासवर्ड प्राप्त कर सकता है यह बात तो समझ में आती है लेकिन बैंक का सिस्टम इतना लचर है कि कहने के बावजूद भी बैंक हमारी धनराशि को और उसके विदड्रोल को प्रतिबंधित नहीं कर रही है यह ना केवल दुखद स्थिति है बल्कि बैंकिंग सिस्टम और बैंक में लगे हुए कर्मचारियों के निष्ठा पर भी सवाल खड़ा करती है।
हालांकि मेरे द्वारा इस संबंध में पुलिस में एफ आई आर दर्ज करवा दी गई है लेकिन मैं एक पूरा का आवेदन देकर बैंक के मुख्य प्रबंधक को यह आग्रह कर रहा हूं कि मेरे साथ हुई ठगी और उस ठगी के द्वारा मेरे खाते से निकाले गए पैसों की रिकवरी तत्काल करवाने की कार्यवाही की जाए अन्यथा मैं इस मामले को लेकर ना केवल पुलिस थाने जाउंगा बल्कि बैंकिंग प्रबंधन पर प्राइवेट इस्तगासा दायर करूंगा।
इस पोस्ट के माध्यम से मैं आप सभी मित्रों को यह सूचित करना चाहता हूं कि यदि आपके एटीएम पेटीएम आधार कार्ड अथवा बैंकिंग डॉक्यूमेंट्री का कोई भी भाग यदि कोई भी व्यक्ति दूरभाष पर जानना चाहता है तो बिना यह कंफर्म किए कि अमुक व्यक्ति अधिकृत तौर पर ही यह जानकारी मांग रहा है तब तक आप अपने विषय में किसी भी प्रकार की जानकारी ना दें यहां तक कि बैंक में यदि केवाईसी देने जैसी कोई बात भी आती है तो आप जाकर सबसे पहले बैंक मैनेजर से संपर्क करें और यदि तत्काल यह कार्यवाही नहीं करते हैं तो फोन करने वाले व्यक्ति को बता दें कि हमारे द्वारा इतने समय के बाद यह कार्यवाही कर ली जावेगी।
यदि आप मेरे अनुभव को ठीक तरह से पढ़ेगे समझेंगे तो शायद आने वाले किसी खतरे से बच जाएंगे अन्यथा इस प्रकार की ठगी अनेक जगह हो चुकी है मेरे साथ भी हुई है और आगे भी होने की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता।
इस पूरे घटनाक्रम में जो भी अपराध हो रहे हैं उसमें बैंकिंग सिस्टम पर भी एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा होता है सभी बैंकों को चाहिए कि वे अपने सिस्टम को मजबूत करें ताकि उनके ग्राहकों को इस प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।
आपका मित्र
हेमन्त कुमार गुप्ता
शिमला
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