आज भी सिहरन होती है उस रात की घटना से।
एक सच्ची घटना.......
- मीनाक्षी शर्मा(ग्वालियर)
डॉक्टर ने सुबह कहा कि अब बेटू ठीक है बस निगरानी में रखेंगे 1 दिन तब जाकर जान में जान आई लेकिन मानिए आज भी जब वो रात याद आती है तो आत्मा कांप जाती है
कभी-कभी बीते दिनों में झांक कर देखो बहुत कुछ बातें बहुत याद आती हैं और उनमें से कुछ याद ऐसी भी है जो कभी भुलाई नहीं जा सकती ऐसी ही एक घटना मुझे भी याद आती है जब भी दिमाग में उस घटना का ख्याल आता है मन सिहर उठता है
बात आज से 14 साल पुरानी है उस वक्त मेरा बेटा साल भर का हुआ ही था चलना सीख लिया था उसने
सारा दिन घर में अपनी दूध की बोतल मुंह में लगाए घूमता रहता था, ऐसे ही एक दिन शाम के समय बोतल मुंह में लगाए बाहर बरामदे में चला गया, बरामदे के बाहर उसकी बाबा अपने कुछ मित्र मंडली के साथ बैठे थे इसलिए वह भी बाहर चला गया अचानक पता नहीं क्या हुआ वह जोर जोर से रोने लगा हमने से किसी को कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिर उसे हुआ क्या है, उसकी आवाज सुनकर बाहर से उसके बाबा भी आ गए
बेटा बस बार-बार अपने पैरों की तरफ इशारा कर रहा था और रोए जा रहा था हमें लगा पैरों में कुछ लगा होगा पर पता ही नहीं चल रहा था कि आखिर वो क्यों रो रहा था
इतने में उसके बाबा बाहर गेट तक गए हालांकि बाहर काफी अंधेरा था पर फिर भी कुछ काला काला दिखा, बाबा ने सोचा मिट्टी है और इसमें पैर पड़ जाने की वजह से ही बेटा रो रहा है तभी उन्होंने हाथ आगे बढ़ाया उसे हटाने के लिए तभी वह काली सी चीज बड़ी हो गई और उसने बाबा के हाथ में काट लिया तब पता चला वह मिट्टी नहीं काला बिच्छू था
हमारे घर के सामने एक लकड़ी की टाल हुआ करती थी वहां जो लकड़ियां लाई गई शायद उन्हीं में बिच्छू भी आ गया जो धीरे-धीरे रेंगता हुआ हमारे घर के दरवाजे तक आ पहुंचा और इस बिच्छू नहीं बेटू को डंक मार दिया बस हम सब यही चिल्ला रहे थे अरे बिच्छू ने काट लिया अरे बिच्छू ने काट लिया
बेटू तो बस रोए जा रहा था उसके बाबा ने हाथ से उस बिच्छू को मारा पर वह नहीं जानते थे कि वह बिच्छू पूरी तरह से मरा ही नहीं था वह तो बस कुछ पल के लिए खामोश हो गया था
हम सब तो बेटू को देखने में ही लगे थे , फोन करके आनन-फानन में उसके पापा चाचा को बुलाया।
हम उसे पास के ही एक प्राइवेट हॉस्पिटल में ले गए पर वहां भी डॉक्टर कुछ विशेष नहीं कर पाए बेटा बस रोये जा रहा था तभी बेटू के चाचा जो कि एक पत्रकार है ने उसे सरकारी अस्पताल में ले जाने की सलाह दी।
उनकी कुछ परिचित डॉक्टर थे वहां जो उसे देख सकते थे इसलिए हम सब उसे सरकारी अस्पताल में ले गए
इधर दूसरी तरफ बेटू के छोटे चाचा ने जब बिच्छू को देखा तो वो वहां से आगे जा चुका था तब उन्होंने उसे ढूंढ कर मार डाला और उसे उठाकर घर ले आए
मुझे याद आया जब हम कॉलेज में थे तब इंग्लिश में एक poem पड़ी थी A night stung by the scorpion
उसने मैंने पढ़ा था कि अगर बिच्छू काट ले तो उसे तुरंत मार देना चाहिए क्योंकि बिच्छू की यह खासियत है कि वह डंक मारने के बाद जितना चलेगा इंसान के शरीर में उतना ही जहर चलेगा
जब हम बेटे को सरकारी अस्पताल ले जा रहे थे तो वह भी बहुत पैर पटक रहा था यकीनन बिच्छू के चलने से जहर फैल रहा था वह तो अच्छा था कि बिच्छू बहुत ज्यादा चल नहीं पाया और जल्दी से उसे मार दिया गया।
जैसे तैसे हम बेटू को लेकर सरकारी अस्पताल आए मैंने तो जिंदगी में पहली बार सरकारी अस्पताल देखा था सच मानिए मेरे लिए तो किसी डरावने महल जैसा ही था मैं अकेली महिला थी मेरे साथ घर की और कोई महिला भी नहीं थी बस साथ थे तो मेरे पति देवर और जेठ।
वो लोग बेटू को अंदर ले गए और मैं बाहर अकेली खड़ी रह गई बहुत देर तक डर के मारे बहुत हालत खराब हो गई थी।
बेटू को एक कमरे में एक बेड पर लेटा दिया , पता नहीं क्या कमरा था वहां पहले से एक बच्चा लेटा था किसी भी तरह से डॉक्टर के कमरे जैसा तो नहीं था
उस बच्चे को पहले से ही कुछ डॉक्टर देख रहे थे तभी उनमें से कुछ डॉक्टर बेटू के पास आए ,
बेटू रो-रो कर बहुत थक चुका था और शायद जहर का असर था कि वह चुप हो गया था डॉक्टर इंजेक्शन देने के लिए उसकी नस ढूंढ रहे थे जो उन्हें मिल नहीं रही थी डॉक्टर ने यहां तक कह दिया कि अगर इंजेक्शन नहीं दिया नस नहीं मिली तो वह कुछ नहीं कर पाएंगे खैर जैसे-तैसे नस मिली और उन्होंने इंजेक्शन लगा ही दिया
जहां तक मैं जानती हूं मुझे मालूम है बिच्छू अगर काट ले तो उसका डंक उतरवाना पड़ता है कोई तांत्रिक पंडित या साधु लोग होते हैं जो यह काम करते हैं बेटू के लिए भी हमें ऐसे ही किसी पंडित या तांत्रिक को ढूंढना पड़ा जिन्होंने हॉस्पिटल आकर मंत्र से उसका जहर उतारापता नहीं उन मंत्रों का असर था यह डॉक्टर की मेहनत और दवा का जो बेटू को कुछ आराम मिला एक बार डंक मारने के बाद बिच्छू का डंक कमजोर हो गया था इसीलिए बेटू के बाबा को शायद ज्यादा असर नहीं हुआ पर फिर भी उन्हें दवा दे दी जिससे वह ठीक हो गए जल्दी ही
बेटू को वंहा से आईसीयू में ले जाया गया पता नहीं उसे आईसी कहूं या कुछ और एक बड़ा सा हॉल था जिसमें 10 या 12 बेड थे और यहां तक कि जमीन पर भी बच्चे लेटे हुए थे ऐसा आईसीयू मैंने पहली बार देखा मैंने तो कभी हॉस्पिटल देखे ही नहीं थी पहली बार तब देखा जब मेरा बेटा हुआ वह तो एक प्राइवेट हॉस्पिटल था आज देख रही थी एक सरकारी अस्पताल
बच्चों का आईसीयू था तो सब बेड पर बच्चे ही थे बीमार बच्चे
एक बच्चे को सांप ने डस लिया था एक को शायद कुछ बीमारी थी जो लाइलाज सी डॉक्टर पहले ही उसे जवाब दे चुके थे एक बहुत छोटी सी बच्ची थी जिसे किसी ऐसे कीड़े ने काटा था जिससे वह बेहोश हो गई थी 3 दिन से बेहोशी थी
रात भर उस कमरे में गुजारना किसी डरावने महल में गुजारने जैसा था क्योंकि हम सभी जानते हैं हमारे यहां सरकारी अस्पतालों की स्थिति क्या है 14 साल पहले जो स्थिति थी आज भी वैसी ही स्थिति है
जैसे-जैसे रात आगे बढ़ रही थी डर भी बढ़ रहा था मेरी जिंदगी की सबसे खतरनाक और डरावनी रात थी वो उस रात उस कमरे में सुबह होने तक 3 बच्चों ने अपनी जिंदगी का दामन छोड़ दिया पहली बार ऐसा कुछ देखा था भगवान का नाम लेकर रात गुजारी
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