शक्ति पूजा में कलश व अखंड जोत का महत्व
नवरात्र के पूजा महोत्सव में कलश स्थापना का अपना महत्व है आइये जानते है कि कलश स्थापना में किन वस्तुओं की आवश्यकता होती है और उसकी स्थापना कैसे की जाती है।कलश स्थापना के बाद के बाद माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा नो दिनों तक की जाती है।
कलश की सामग्री
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मिट्टी का गोलाकार पात्र
जो बोने के लिए विशुद्ध साफ की हुई मिट्टी --ध्यान रहे इसमे किसी भी प्रकार के कंकर नहीं होने चाहिए
मिट्टी का कलश
रोली,मौली, सुपारी, कपूर,धूप
कलश में रखने के लिए सिक्का
आम के पत्ते
फूल माला, दीपक,मिठाई ,फल,प्रसाद
कलश स्थापना कैसे करे-
कलश पर सबसे पहले स्वास्तिक बनाये
उसके पश्चात कलश पर मौली बांधे
कलश में जल भर ले
कलश में साबुत सुपारी,फूल,इत्र, पंचरत्न, औऱ सिक्का मुद्रा रखे
कलश में चावल के दाने भी डाले
अखंड जोत का महत्व व आवश्यक सावधानी
Amar ujala
Na hindu.com
हमारी भारतीय आध्यत्मिक संस्कृति में जोत का बड़ा महत्व है पर अखंड जोत की महिमा ही अलग है और इसके लिए सतर्कता व सावधानी भी आवश्यक है।
अखंड जोत के प्रज्वलित होते रहने से दैविक शक्ति की कृपा बनी रहती है।हम नवरात्र में जब अखंड जोत की बात करते है तब उस कृपा का सम्बन्ध सीधे माँ दुर्गा से हो जाता है।
अखंड जोत के कुछ नियम,विधि विधान होते है जो नवरात्रा के साधक को पालन करने होते है।सनातन परंपरा में अखंड जोत से पूजा करने वाले साधक को जमीन पर ही सोना होता है । अखंड जोत खंडित नही होनी चाहिए इस बात का साधक को विशेष ध्यान रखना पड़ता है।पूजा सम्पूर्ण होने के बाद भी अगर जोत जल रही है तब उसको बुझाना नहीं चाहिए।
आलेख - संजय सनम( PLEASE LIKE SHARE FOLLOW ME
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