वैज्ञानिक भी टोटकों का प्रयोग करते है।

इसरो- नासा के वैज्ञानिक भी राहु- मंगल से डरते है।

हमारे यहां अंधविश्वासों का भी प्रचलन है और कुछ बाते ऐसी भी है जो कहने को लोग अंधविश्वास कह भी देते पर उनको मानते भी है अर्थात उनको नजरअंदाज नहीं करते।
आज हम आपको आम आदमी की नही बल्कि उनकी वो सच्चाई आपको बता रहे है जो विज्ञान की दुनियां से जुड़े है और अंतरिक्ष अनुसंधान में अहम भूमिका निभा रहे है फिर वे भारत के इसरो से हो या अमेरिका के नासा औऱ रूस के ही क्यों न हो ये भी राहु,मंगल से डरते है तथा अपना कोई भी प्रयोग अंतरिक्ष मे करने से पहले कुछ टोटकों का प्रयोग भी करते है।


इसरो अर्थात भारत के वैज्ञानिक जब भी कोई प्रक्षेपण का कार्य करते है तब वे आंध्रप्रदेश के तिरूपति बालाजी के मंदिर में एक विशेष पूजा भी करते है तथा प्रतीक के रूप में एक छोटे सेटेलाइट को पहले भगवान को अर्पित करते है। अपनी सेटेलाइट व अन्य उपकरणों पर त्रिशूल की तरह व ओम का अंकन भी करते है तथा जिस दिन वे अनुसंधान को कसौटी पर कसने का कार्य करते है उस दिन इसरो के मुख्य नई शर्ट पहनते है।

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इसरो,नासा के वैज्ञानिक 13 नंबर से बचते है अर्थात अपना कोई प्रयोग 13 तारीख को नही करते तथा अनुसंधान का नाम 13 नंबर पर नही रखते क्योकि 13 नंबर को ये सब वैज्ञानिक अशुभ समझते है।किसी भी प्रयोग को संपादित करते वक्त मूंगफली खाने का प्रचलन भी इनके अंदर है।

इसरो के वैज्ञानिक अपने उपकरणों पर भगवान शिव के मस्तक पर दिखने वाली उभरती तीन रेखाओं की आकृति भी नीचे दिए चित्र के अनुरूप बनाते है।


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मंगलवार को यह अपना प्रयोग करने से बचते है इसी प्रकार राहु काल मे भी ये अपने किसी प्रयोग को नही करते उसके बाद ही करते है अर्थात राहु काल से भी डरते है।

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नासा के वैज्ञानिक भी प्रयोग करने से पहले अपने गॉड की पूजा करते है तथा सेटेलाइट को जिस गाड़ी में ले जाया जाता है उसके पहियों पर पेशाब करने का भी प्रचलन है इनकी मान्यता है कि ऐसा करने से प्रयोग सफल होते है।

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अब आप भी सोच रहे होंगे कि वैज्ञानिक भी अटपटी सी बातों का अनुसरण क्यो कर रहे है पर इन सब अटपटी तथ्यों के बीच भी उनके प्रयोग के दौरान मिली सफलता व असफलता का स्वाद है और उस परिणाम को देख कर इसरो,नासा व रूसी वैज्ञानिक इन टोटकों का आज भी अनुसरण करते है।

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