अब सब्सिडी छोड़ने को कहेगा रेल मंत्रालय
भारतीय रेल मंत्रालय अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए यात्रा में सब्सिडी पाने वाले यात्रियों से सब्सिडी छोड़ने का निवेदन करने जा रहा है -आमदनी बढ़ाने के लिए पी एम ओ के साथ 100 दिन की कार्य योजना पर काम किया जा रहा है।प्राप्त जानकारी के अनुसार रेलवे के पास टिकटो के मूल्य सिर्फ 53 प्रतिशत ही आते है शेष 47 प्रतिशत सब्सिडी में चले जाते है जिससे रेलवे की आय पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
अभी रेलवे की आय सालाना करीब 50 हजार करोड़ है पर सब्सिडी अगर कुछ प्रतिशत कम हो जाती है अर्थात अपील से लोग लेना छोड़ देते है तो यह आय 50 हजार से बढ़ सकती है इस हिसाब से रेलवे ने 56 हजार करोड़ की आय का लक्ष्य निर्धारित किया है।
अब रेलवे की बेबसाइट पर भी सब्सिडी लेने न लेने के दोनों विकल्प यात्रियों के पास आएंगे उनमें से यात्रियों को सब्सिडी लेने या न लेने के विकल्प को चुनने का अधिकार है। यात्रियों से सब्सिडी छोड़ने का एक निवेदन का ऐड कंपेन भी रेलवे के दुआरा चलाया जाएगा।सब्सिडी के इस स्रोत से रेलवे अपनी आय बढ़ाने पर अगस्त माह से कार्य शुरू कर देगा ऐसी संभावना है
गौरतलब है कि पूर्व रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु इस प्रस्ताव को लाये थे पर वो इसको अमली जामा नही पहना सके क्योकि उस वक्त विपक्ष का विरोध हो गया था पर अब रेल मंत्रालय पी एम ओ के दिशा निर्देश के आधार पर सब्सिडी लेने वाले यात्रियों को अपनी सब्सिडी छोड़ने के लिए प्रेरित करने जा रहा है और आने वाले दिनों में विज्ञापनों के माध्यम से यह अपील घर घर पहुंच सकती है
रेल सब्सिडी छुड़वाने की यह प्रेरणा गेस सिलेंडर की सब्सिडी छुड़वाने की मुहिम की कामयाबी से मिली है जिसमे प्रधानमंत्री ने आर्थिक रूप से सक्षम नागरिकों से सब्सिडी छोड़ने की भावनात्मक अपील इस रूप में की थी कि आप अगर सब्सिडी छोड़ते है तो इसका लाभ किसी गरीब के घर का चूल्हा जला देगा और इस अपील की वजह से करीब 1.25 करोड़ लोगों ने सब्सिडी छोड़ दी थी।
भारतीय रेल अपनी आय के खजाने को बढ़ाने के लिए नागरिकों से सब्सिडी छोड़ने की अपील कर रहा है पर क्या वो सब्सिडी ब्यूरोक्रेट्स,राजनेताओं की भी छुड़वाने की कोशिश की जाएगी या सिर्फ देश के आम नागरिकों की पॉकेट तक ही यह कतरनी जाएगी।
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