राफेल में मोदी सरकार को बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने दी क्लीन चिट
*राफेल सौदा*
*सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऑफसेट पार्टनर चुनने में किसी की तरफदारी करने के सबूत नहीं मिले; सभी याचिकाएं खारिज*
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कीमत की समीक्षा करना अदालत का काम नहीं
याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि राफेल डील में कथित अनियमितताओं की जांच अदालत की निगरानी में हो
सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले ने मोदी सरकार को बड़ी राहत दी है।बेक फुट पर खेल रही मोदी सरकार आज फ्रंट फुट पर स्ट्रोक लगाती दिखी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 अहम बातें
1.
ऐसे मामले में न्यायिक समीक्षा का नियम तय नहीं है। राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना गलत है।
2.
रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में कमर्शियल फेवर के कोई सबूत नहीं। देश फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारियां में कमी को नहीं झेल सकता।
3.
कुछ लोगों की धारणा के आधार पर कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता। इसलिए सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
जांच की मांग के लिए 3 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई थीं
इस मामले में अधिवक्ता एमएल शर्मा, विनीत ढांडा ने याचिका दायर की थी। इसके बाद आप नेता संजय सिंह ने भी याचिका दायर की।
तीन याचिकाएं दायर होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने याचिकाएं दायर की थीं। इसमें कहा गया था कि अदालत सीबीआई को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे।
कीमत पर सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा था
सरकार ने अदालत और याचिकाकर्ताओं को डील के संबंध में लिए गए फैसलों के दस्तावेज सौंपे थे। राफेल की कीमत को लेकर एक अलग सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा गया था।
सरकार ने कोर्ट को बताया था कि राफेल विमान खरीदने का फैसला सालभर में 74 बैठकों के बाद किया गया।
सरकार ने बताया था कि 126 राफेल खरीदने के लिए जनवरी 2012 में ही फ्रांस की दैसो एविएशन को चुन लिया गया था। लेकिन, दैसो और एचएएल के बीच आपसी सहमति नहीं बन पाने से ये सौदा आगे नहीं बढ़ पाया।
सरकार ने कहा कि एचएएल को राफेल बनाने के लिए दैसो से 2.7 गुना ज्यादा वक्त चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 अहम बातें
1.
ऐसे मामले में न्यायिक समीक्षा का नियम तय नहीं है। राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना गलत है।
2.
रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में कमर्शियल फेवर के कोई सबूत नहीं। देश फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारियां में कमी को नहीं झेल सकता।
3.
कुछ लोगों की धारणा के आधार पर कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता। इसलिए सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
जांच की मांग के लिए 3 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई थीं
इस मामले में अधिवक्ता एमएल शर्मा, विनीत ढांडा ने याचिका दायर की थी। इसके बाद आप नेता संजय सिंह ने भी याचिका दायर की।
तीन याचिकाएं दायर होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने याचिकाएं दायर की थीं। इसमें कहा गया था कि अदालत सीबीआई को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे।
कीमत पर सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा था
सरकार ने अदालत और याचिकाकर्ताओं को डील के संबंध में लिए गए फैसलों के दस्तावेज सौंपे थे। राफेल की कीमत को लेकर एक अलग सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा गया था।
सरकार ने कोर्ट को बताया था कि राफेल विमान खरीदने का फैसला सालभर में 74 बैठकों के बाद किया गया।
सरकार ने बताया था कि 126 राफेल खरीदने के लिए जनवरी 2012 में ही फ्रांस की दैसो एविएशन को चुन लिया गया था। लेकिन, दैसो और एचएएल के बीच आपसी सहमति नहीं बन पाने से ये सौदा आगे नहीं बढ़ पाया।
सरकार ने कहा कि एचएएल को राफेल बनाने के लिए दैसो से 2.7 गुना ज्यादा वक्त चाहिए था।
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