कांग्रेस के नेताओं ने खुले आम गाय काटी
और जिनकी केंद्र में सरकार है
वो निंदा करके रह गए--
काश काट दिए होते
वे हाथ
जो गाय की गर्दन तक आये थे
और
सियासत के खुले बाजार में
गाय को घसीटकर लाये थे
जिनकी सरकार है केंद्र में
वे यह तमाशा क्यों देखते रहे?
गाय काटने वाले
जितने दोषी
उससे अधिक
गाय को न बचाने वाले दोषी है
फिर क्या मतलब है शक्ति का
जब जरूरत हो तब भी
तीर का इस्तेमाल न करो
क्या मतलब है ऐसी भक्ति का
जो मगरमच्छी आंसू बहाती है
पहले गाय के कटने का इंतजार करती है
और फिर निंदा का प्रस्ताव पास करती है।
गाय के कटने का मुझको भी दुःख है
पर गुस्सा इस बात पर है
मोदी जी क्यों चुप है?
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