पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने प्राइवेट नर्सिंग होम,अस्पताल के प्रबंधकों के साथ एक बैठक कर चिकित्सा सेवा में हो रही अनैतिकता, धांधलियों पर कड़े सवाल करते हुए जिस तरह से फटकारते हुए उन्हें भविष्य के लिए आगाह किया है इसका ह्रदय से स्वागत किया जाना चाहिए।
ममता जी ने अपने सवालो के साथ जब उनको इस प्रोफेशन से जुडी मानवीय उसूलों को याद दिलाते हुए कहा कि यह व्यवसाय कोई ईंट पत्थर बेचने का नहीं है बल्कि इसके साथ किसी व्यक्ति का जीवन जुड़ा है और उस व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी संवेदना जुडी है ।
गौरतलब है कि दक्षिण भारत को छोड़कर लगभग समूचे देश में चिकित्सा के नाम पर लूट मची है -यहाँ पर जान की परवाह कम मगर मरीज के पॉकेट को कतरने का ख्याल अधिक रहता है--जान बूझ कर बेवजह की टेस्टिंग, क्योकि उसमे डॉक्टर्स के करीब 45%तक के कमीशन रहते है और कई मामलों में डॉक्टर विजिट को बढ़ा कर बिल में जोड़ना,तथा दवाइयां भी उन कंपनी की महँगी देना जिसमे डॉक्टर्स को अच्छा कमीशन मिलता है और मरीज को उस कंपनी की ही दवा लेनी पड़ती है जो अत्यधिक महंगी होती है।
हद तो तब हो जाती है कि वेंटिलेटर का भी दुरुप्रयोग होता है और कई बार तो मरीज की मौत हो जाने के बाद भी उसकी जानकारी मरीज के परिजनों को नहीं दी जाती बल्कि बिल बढ़ाया जाता है और बेचारे परिजन दोहरी मार से मरते है-परिजन भी खोते है और बेतहाशा बिल भी भुगतान के लिए मजबूर होते है।
कई बार तो ऐसा भी होता है कि बिल भुगतान जब तक पूरा नहीं होता तब तक डेड बॉडी भी नहीं दी जाती।
ममता बनर्जी ने अपने राज्य में चिकित्सा सुविधा को सरल और नैतिक करने के लिए जिस तरह से गंभीरता दिखाई है वो केंद्र सरकार के लिए अनुकरणीय है क्योंकि जनता शिक्षा,व् स्वास्थ्य सेवा में हो रही लूट से त्रस्त है और इन क्षेत्रों में अनैतिक हथकंडों से निजात चाहती है।
ममता बनर्जी ने अपोलो हॉस्पिटल,आमरी, वेलव्यू, सी ऍम आर आई, बी ऍम बिड़ला,रूबी, मेडिका,नेवटिया जैसे कई बड़े स्वास्थ्य सेवा संस्थानों से न सिर्फ कड़े सवाल किए बल्कि भविष्य के लिए उनको अपनी कार्य प्रणाली दुरुस्त करने के लिए आगाह किया।
इतना ही नहीं ममता सरकार 3 मार्च को विधान सभा में एक बिल भी लायेगी और यह कमिशन हर माह राज्य सरकार को इसकी रिपोर्ट देगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 10 लोगो वाले इस कमिशन के मुखिया पूर्व चीफ जस्टिस होंगे तथा 5 डॉक्टर व् मुख्य सचिव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी इसका हिस्सा होंगे।
चिकित्सा क्षेत्र की अनियमितताओं पर जो एक्सन अब तक मोदी जी की सरकार नहीं ले सकी उस काम को ममता ने अपने प्रदेश में कर दिखाया है और इस कदम की सर्वत्र सरहाना हो रही है।
संजय सनम
संपादक-फर्स्ट न्यूज़
72780-27381
ममता जी ने अपने सवालो के साथ जब उनको इस प्रोफेशन से जुडी मानवीय उसूलों को याद दिलाते हुए कहा कि यह व्यवसाय कोई ईंट पत्थर बेचने का नहीं है बल्कि इसके साथ किसी व्यक्ति का जीवन जुड़ा है और उस व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी संवेदना जुडी है ।
गौरतलब है कि दक्षिण भारत को छोड़कर लगभग समूचे देश में चिकित्सा के नाम पर लूट मची है -यहाँ पर जान की परवाह कम मगर मरीज के पॉकेट को कतरने का ख्याल अधिक रहता है--जान बूझ कर बेवजह की टेस्टिंग, क्योकि उसमे डॉक्टर्स के करीब 45%तक के कमीशन रहते है और कई मामलों में डॉक्टर विजिट को बढ़ा कर बिल में जोड़ना,तथा दवाइयां भी उन कंपनी की महँगी देना जिसमे डॉक्टर्स को अच्छा कमीशन मिलता है और मरीज को उस कंपनी की ही दवा लेनी पड़ती है जो अत्यधिक महंगी होती है।
हद तो तब हो जाती है कि वेंटिलेटर का भी दुरुप्रयोग होता है और कई बार तो मरीज की मौत हो जाने के बाद भी उसकी जानकारी मरीज के परिजनों को नहीं दी जाती बल्कि बिल बढ़ाया जाता है और बेचारे परिजन दोहरी मार से मरते है-परिजन भी खोते है और बेतहाशा बिल भी भुगतान के लिए मजबूर होते है।
कई बार तो ऐसा भी होता है कि बिल भुगतान जब तक पूरा नहीं होता तब तक डेड बॉडी भी नहीं दी जाती।
ममता बनर्जी ने अपने राज्य में चिकित्सा सुविधा को सरल और नैतिक करने के लिए जिस तरह से गंभीरता दिखाई है वो केंद्र सरकार के लिए अनुकरणीय है क्योंकि जनता शिक्षा,व् स्वास्थ्य सेवा में हो रही लूट से त्रस्त है और इन क्षेत्रों में अनैतिक हथकंडों से निजात चाहती है।
ममता बनर्जी ने अपोलो हॉस्पिटल,आमरी, वेलव्यू, सी ऍम आर आई, बी ऍम बिड़ला,रूबी, मेडिका,नेवटिया जैसे कई बड़े स्वास्थ्य सेवा संस्थानों से न सिर्फ कड़े सवाल किए बल्कि भविष्य के लिए उनको अपनी कार्य प्रणाली दुरुस्त करने के लिए आगाह किया।
इतना ही नहीं ममता सरकार 3 मार्च को विधान सभा में एक बिल भी लायेगी और यह कमिशन हर माह राज्य सरकार को इसकी रिपोर्ट देगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 10 लोगो वाले इस कमिशन के मुखिया पूर्व चीफ जस्टिस होंगे तथा 5 डॉक्टर व् मुख्य सचिव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी इसका हिस्सा होंगे।
चिकित्सा क्षेत्र की अनियमितताओं पर जो एक्सन अब तक मोदी जी की सरकार नहीं ले सकी उस काम को ममता ने अपने प्रदेश में कर दिखाया है और इस कदम की सर्वत्र सरहाना हो रही है।
संजय सनम
संपादक-फर्स्ट न्यूज़
72780-27381
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