आरोपों के घेरे में लालू परिवार ..बिहार में फिर बदल सकते समीकरण..
क्या नीतीश कुमार फिर बदलेंगे पाला
तेजस्वी फूंक फूंक कर रख रहे कदम
फर्स्ट न्यूज:
बिहार में अब इस बात की चर्चा हो रही होगी कि नीतीश कुमार क्या लालू परिवार के लिए ग्रहण बन कर आए थे....इतने वर्षो तक उन पर कारवाई नही हुई पर अब तो पूरा परिवार इस कारवाई में फस गया है।
खुद नीतीश कुमार का यह बयान भी यही कहता है कि उनके महागठबंधन का हिस्सा होने के बाद ही यह कारवाई क्यों हुई!
आज तमाम राजनीतिक विपक्षी दल सरकारी एजेंसी के गलत इस्तेमाल का आरोप तो लगाते है पर जो माल पकड़ा जा रहा उस पर चुप्पी साध लेते है ...सुशासन बाबू भी इस पर चुप है इस पर हाल फिलहाल वे नहीं बोले है ...आने वाले दिनों में वो लालू परिवार का साथ छोड़ दे तब कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि वे ऐसा पहले भी कर चुके है।
अभी बिहार में लालू परिवार और राजद की स्थिति गंभीर है क्योंकि राजनीति के माहिर लालू जी अस्वस्थ है और पूरी जिम्मेदारी तेजस्वी पर है जो खुद इसमें फंसे हुए है।
नोकरी के बदले जमीन के इस घोटाले की आंच लालू परिवार की बेटियों तक भी आई है और सबसे बड़ी बात पार्टी पर अपनी मजबूत पकड़ और राजनीति की समझ रखने वाले तेजस्वी का इसमें घिरा होना है अन्यथा तेजस्वी पार्टी और राजनीति के मैदान दोनो को सम्हाल लेते।
एक तरफ कानूनी सजा का डर और दूसरी तरफ इनकी अनुपस्थिति में पार्टी में कही तोड़ फोड़ न हो जाए और सुशासन चाचा फिर कहीं पलटी न मार जाए ..तेजस्वी को इसकी चिंता सबसे अधिक है।
बिहार का माहौल भी यह बता रहा है कि तेजस्वी ने फूंक फूंक कर अपने कदम रखे है .. ई डी के सम्मन पर भी वो तारीख की मांग करते दिखे ताकी पार्टी और सरकार में अपनी स्थिति की समीक्षा हो सके तथा संभावित डैमेज को कंट्रोल किया जा सके।
तेजस्वी कही न कही नीतीश कुमार की चुप्पी से परेशान भी थे उनको नीतीश के बयान से उनके मन को समझने की अभी सबसे बड़ी जरूरत थी क्योंकि राजनीति में किसी का कोई भरोसा नहीं होता और इन चाचा का तो भरोसा किया भी नही जा सकता पर नीतीश के बयान को सुनकर तेजस्वी को कुछ सुकून मिला।
जहां तक नीतीश कुमार की बात है अब उनके हाथ में फिर बिहार का कंट्रोल आ गया है जो अभी तक तेजस्वी के हाथ में था।
अब नीतीश और उनकी पार्टी अपने हिसाब से बिहार को चलाएगी और इस वक्त लालू जी की पार्टी की मजबूरी भी रहेगी चुपचाप रहने की।
नीतीश के पास भविष्य का स्ट्रोक सोच समझ कर खेलने का पूरा समय है इसलिए लालू परिवार का आरोपो में फसना नीतीश कुमार के लिए शक्ति का आना है ...हो सकता है मन ही मन वो मोदी जी को धन्यवाद भी देते हो।
बिहार में राजद के एक विधायक ने नीतीश कुमार से यह मांग की है कि बंगाल वाला कानून बिहार सरकार भी पास करे ताकि केंद्रीय एजेंसी ईडी मुख्यमंत्री की बिना इजाजत लिए किसी पर कोई कारवाई नही कर सके। नीतीश कुमार के लिए यह करना अत्यंत मुश्किल है क्योंकि तब सुशासन वाली नाम की थोड़ी बहुत बची छवि भी चली जायेगी और भाजपा उन पर हावी हो जायेगी।
नीतीश को यह समझ में आ गया है कि प्रधानमंत्री का पद उनकी तकदीर में नहीं है और बिहार में मुख्यमंत्री पद जो राजद से वादे के मुताबिक अगले चुनाव से जाने वाला था अब उसको बचाना उनकी प्राथमिकता हो गई है! शायद इसलिए नीतीश ने राहुल गांधी के पक्ष में अपनी बोल फेंक कर विपक्ष के अन्य महत्वाकांक्षी नेताओं के साथ गेम खेलते हुए राजद अर्थात तेजस्वी को भी यह संकेत दे दिया है कि उनको प्रधानमंत्री नहीं बनना ...बिहार का मुख्यमंत्री ही रहना है।
अब बिहार की राजनीति लालू परिवार को मिलने वाली सजा विशेषकर तेजस्वी यादव पर इसके प्रभाव से रंग बदलेगी .. हाल फिलहाल लालू यादव के लिए मुश्किलों का पहाड़ है तो नीतीश कुमार के लिए यह समय सुकून से स्थिति को देख कर निर्णायक रणनीति बनाने और अंजाम देने का है।
जहां तक भाजपा से पुनः हाथ मिलाने की बात है तो इसकी संभावना भी पूरी बनी हुई है क्योंकि राजनीति में आदर्श नही अपने स्वार्थ देखे जाते है।
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