अंध निष्ठ प्रबुद्ध वर्ग के उस कमेंट का जवाब तब देना पड़ता है….
प्रसंग तेरापंथ के आचार्य जी की एक वीडियो क्लिप...जिसमे सुरेंद्र सुराना जी के लिए मनुहार के भाव से बोलते दिखते है....
सुरेंद्र सुराना इस आत्मीय भाव को अपने पुराने अनुभवों से षड्यंत्र बताते है....क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है...
इस वीडियो को सुनने के बाद प्रबुद्ध आदरणीया अपने कमेंट में लिखती है कि इंटरव्यू लेने वाले और देने वाले दोनो को आचार्य जी का आत्मीय भाव नहीं दिखा उनको यह भी षड्यंत्र लग रहा है....कमेंट सुरेंद्र सुराना के आचार्य जी के लिए बोले गए संबोधन पर सवाल उठाता हुआ इसको उनके व्यक्तित्व से भी जोड़ता दिखता है और इंटरव्यू की गरिमा को भी तोलता दिखता है।
यह प्रबुद्ध कमेंट सुरेंद्र सुराना का निष्कासन क्यों हुआ उसकी निंदा नहीं करता...
सुराना परिवार ने जो सामाजिक बहिष्कार का दर्द और साजिश झेली उसका जवाब उनसे नही मांगता जिन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्णय दिया था...
तब अंधी आस्था के कमेंट को जवाब देना जरूरी होता है...
इस वीडियो की लिंक को क्लिक करके वीडियो को सुनिए और समझिए जब समझदार लोग भी किसी के दर्द के साथ खेलते है और गलत निर्णय पर आवाज नहीं उठाते तब उस समाज में पीड़ित वर्ग का क्या हाल होता होगा!
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क्षमा याचना के साथ.....क्योंकि कड़वा सच बोला गया है....सब इसको पचा नहीं पाएंगे।
संजय सनम
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