मारवाड़ी सम्मेलन किसी व्यक्ति की जागीर नहीं है..

मारवाड़ी सम्मेलन किसी व्यक्ति की जागीर नहीं है!!!!!!
 समाज को पोकेट कि  संस्था बनाने वालों को पहचानिए ।।।।।।-----

आज अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन की प्रादेशिक इकाई पश्चिम बंग प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन, पश्चिम बंगाल में रहने वाले लाखों  मारवाड़ी  समाजगण के प्रतिनिधित्व का दावा करती है। आज भी साधारण मारवाड़ी मूकदर्शक बनकर टकटकी लगाए समाज के उन पूरोधाओ की ओर देख रहा है जिन्होंने इस सम्मेलन को अपने परिश्रम और उपार्जित धन से पूजा।

 किंतु आज प्रादेशिक सम्मेलन में सारे नियम , कायदों को अंगूठा दिखाने का कार्य हो रहा है ।
सम्मेलन के सभी आजीवन एवं कार्यकारिणी  सदस्यों को खिलौना समझ लिया गया है।
। वर्तमान में सम्मेलन में देखा जा रहा है कि कैसे सारे नियम कायदों को रद्दी में फेंक कर सिर्फ" स्व"  सिद्धि प्रतिस्थापित हुई है। मारवाड़ी समाज के नाम से गर्वित एवं प्रतिष्ठित संस्थान में एकाधिकार ,अहंकार की दूषित मानसिकता, अनियमितताओं की पराकाष्ठा ,कथनी और करनी में अंतर, कायदे कानून की अपेक्षा, हिंसा और अराजकता का  आधिपत्य , सदस्यों की शिकायतों की अवहेलना एवं यहां तक की सिंडिकेट राज के द्वारा मारवाड़ी सम्मेलन  को पॉकेट की संस्था बनाने का दुष प्रयास एवं संविधान की खुलेआम अवहेलना, आवाज उठाने वालों के विरुद्ध हिंसा एवं उस को बदनाम करने की  घृणित धृष्टता  का आज खुलकर विरोध करना जरूरी है।

 मारवाड़ी समाज की इस प्रतिष्ठित एवं सिरमौर संस्था का सदस्य शुल्क 5000 कर देना कहां तक उचित है सिर्फ इसलिए कि समाज का साधारण व्यक्ति सम्मेलन का सदस्य ना बन पाए एवं कुछ लोगों के एकाधिकार पर अंकुश ना लगे।

 सम्मेलन के पदाधिकारी क्या सिर्फ मंच पर स्वागत करवाने, माला पहनने  अपनी तस्वीर अखबारों में छपवाने या सिर्फ मंच से बड़ी-बड़ी बातें करने तक के लिए ही सीमित है !!?

अब तो यहां तक जानकारी मिली है की रातों-रात बिना किसी को कानो कान खबर लगे ,बिना किसी पूर्व सूचना के, बिना कोई मीटिंग किए बिना किसी साधारण सभा में पास किए हि संस्था के स्वीकृत एवं मान्य संविधान को भी तथाकथित पदाधिकारियों ने अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए असंवैधानिक तरीके से बदलकर संस्था का एक नया असंवैधानिक एवं जाली संविधान भी बना दिया है ,इससे ज्यादा संस्था के साथ और क्या खिलवाड़ हो सकता है।
 संविधान के नकली एवं जाली दस्तावेज बनाना सिर्फ अनैतिकता पूर्ण कार्य ही नहीं है बल्कि एक अपराधिक मानसिकता को भी दर्शाता है जोकि एक कानूनी संगीन दंडनीय अपराध भी है।।


 जरा चिंतन करें क्या प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन मैं वर्चस्व एवं एकाधिकार कायम रखने की परंपरा को पराजित करना बहुत जरूरी नहीं है। पारदर्शिता की अर्थी निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं कुछ पदाधिकारी और उनके समर्थक ।

,इसीलिए तो लगातार खुलने वाले सम्मेलन कार्यालय को अखिल भारतीय स्तर के पदाधिकारियों द्वारा ताला लगाकर सप्ताह में मात्र 3 दिन २  घंटे सांकेतिक रूप से खोलना -उनके वर्चस्व एवं  आधिपत्य की मानसिकता को उजागर करता है, 
ऐसे षड्यंत्रकारी पदाधिकारी और तमाम उनके अंधभक्त समर्थक जो समस्त असंवैधानिक और अनैतिक कार्यों का समर्थन करकर बढ़ावा दे रहे हैं-उन सब को चिन्हित करकर बाहर का रास्ता दिखाने का समय आ गया है!!!
प्रकाश किला
(9830222818)

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