क्या मेरे सवालों का आपके पास जवाब नहीं है...

मुनि भूपेंद्र कुमार जी...
क्या मेरे सवालों का आपके पास जवाब नहीं है!

जैन मुनि अब आचार्य भूपेंद्र कुमार जी को हमने जो सवाल अपनी पिछली ब्लॉग पोस्ट में पूछा था उसका जवाब अभी भी नदारद है...
यद्धपि भूपेंद्र मुनि जी ने धोखे से संबंधित सवाल का पहले भी जवाब दिया है पर जो मार्मिक सवाल उनकी साधना के पथ से जुड़े हुए थे उनका जवाब अभी भी वो नहीं दे पाए है।
एक बार पुनः मैं अपनी पोस्ट के उन सवालों को दे रहा हूं।
ज्ञानवान पाठक खुद तय करे कि क्या मुनि जी की पोस्ट में उनका जवाब दिया गया है..
मेरे सवाल कुछ इस प्रकार थे...
पहले मेरे सवाल पढ़िए फिर मुनि जी का जवाब पढ़िए..मुनि जी मेरे सवालों के आसपास आने से भी अपनी कलम से कतरा रहे है क्योंकि सवाल सीधे और सच्चे है....मुनि जी के लिए out of syllabus हो रहे है...
मेरे सवाल..
अब कुछ जिज्ञासा जो सवाल के रूप में भूपेंद्र मुनि जी से समाधान चाहते है...

साधना के पथ के राही को उन्ही के शब्दों में जिस व्यक्ति के लिए 1000 लोगों ने अपनी राय पहले ही दे दी थी
उसको समझने में इतनी भूल फिर भी हो गई..साधना की राह का व्यक्ति भी साधारण व्यक्ति की तरह कैसे चूक गया!

मुनि जी ...आपने जो तीन कारण अपने इस पत्र में बताए है वो तीनो कारण माया से जुड़े है...इसका अर्थ  आप माया पर अधिकार रखने का मानस रखते है और बाते साधना की करते है...यह अपने आप में विरोधाभास है...

क्या आप भी यहां दुकानदारी के हिसाब से आए थे...आपने यहां मंदिर,ट्रस्ट के नाम पर अपने भक्तो से  रकम दान करवाने में ही समय लगाया..साधना का पथिक इन सब से लाखो कोस दूर रहता है।
जब इस घटना का संवाद मुझे मिला मैंने मुनि जी और बोथरा जी दोनो को फोन किया पर दोनो का फोन नो रिप्लाई था...बाद में मुनि जी का व्हाट्स ऐप पर यह संदेश दिखा जिसके अंदर कथनी और करनी के बीच विरोध साफ दिख रहा था।
विजय बोथरा जी ने आपको धोखा दिया यह आप कह रहे है....हो सकता है पर आपने किसको धोखा दिया है इस पर आत्म चिंतन आप अभी भी नही कर पा रहे है।

आपकी हर पोस्ट में सिर्फ एक लक्ष्य साधना,साधना की बात जो कही जाती थी वो माया ...में तब्दील होती लग रही है।

आपका और विजय बोथरा का रिश्ता ही जब गुरु शिष्य का नहीं था...तब लगता है आप लोग गठबंधन की सरकार चला रहे थे...और माया की दौड़ में थे अब वो अधिकार जब आपका नही रहा तब दूसरी जगह फिर आप यही दौड़ लगाएंगे..
क्या आप माया की साधना करने अलग राह बनाए थे..!अब लोगों के मन में यह सवाल भी आयेगा..

क्षमायाचना सहित..
संजय सनम

प्रश्न आपके❗⁉️‼️❓

उत्तर मेरे💛💚❤️🖤💛

आचार्य भूपेंद्र कुमार जी हजार व्यक्तियों ने आपको राय जी फिर भी आपने राय को अनदेखी की क्या यह आपकी भूल नहीं है

🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔

एक पत्रकार ने मेरे लिए प्रश्न पूछा पर हमेशा यह ध्यान रहना चाहिए दीपक के नीचे हमेशा ही अंधेरा ही होता है पर हमारा ध्यान हमेशा दीपक की ज्योति पर ही लगा हुआ रहता है जब दीपक घुसता है तब अंधकार का भयावह रूप है सामने आना प्रारंभ हो जाता है दीपक जब तक जलता है तब तक दूसरे लोग कोई भी सलाह देते हैं वह सदा हमारे लिए कारगर साबित नहीं हो सकती है मेरे को भी हजार व्यक्तियों ने कम से कम सलाह दी थी आप सावधान रहना केवल श्रावक और श्राविका में नहीं नहीं संतो ने भी मेरे को जबरदस्त सलाह दी थी जिनके साथ के अंदर महा भयानक चोट इस व्यक्ति ने की थी उन्होंने मेरे को अपनी आत्मकथा में भी सुनाई थी पर मैंने यह संकल्प कर लिया था जो व्यक्ति मेरे साथ के अंदर इस तरह का व्यवहार कर रहा है इतना विश्वास दिला रहा है मैं कभी भी उसका विश्वास नहीं करूंगा वही धोखा देना चाहे तो भले ही दे दे पर मैं अपनी तरफ से कभी भी धोखा देने का प्रयास नहीं करूंगा धोखा खाना मंजूर है पर धोखा देना है यह कभी भी मेरे को मंजूर नहीं है यह मेरा अपना एक सिद्धांत मैंने बना रखा है इसलिए मैंने अपनी तरफ से कार्य करने में कोई प्रकार की कमी नहीं रखी जिस स्थान के ऊपर में आया था उस स्थान को देखकर मेरे साथ में जो लोग थे वह मेरे को कहने लगे यहां आप कहां आगे जंगल में यहां आप क्या करोगे मैंने कहा कोई बात नहीं है जंगल में ही तो मंगल होता है 10 महीने तक लगातार यहां पर मेहनत की हमारे कर्मचारी लोगों ने बहुत ज्यादा मेहनत की जिसके अंदर मुख्य रूप से श्रवण कुमार शिव सिंह जी मोहन सिंह इन व्यक्तियों ने इसके निर्माण के लिए एक तरह से अपना जी जान लगा दिया था तब जाकर यह संस्था आज हरी भरी नजर आ रही है जब हरी-भरी कोई चीज हो जाती है हर व्यक्ति खाने के लिए तैयार होने प्रारंभ हो जाती हैं जब लाखों रुपए का डोनेशन आना प्रारंभ हो गया सब तरह की सुविधाएं यहां पर प्राप्त हो गई उसके पश्चात जब व्यक्ति के मन के अंदर खाने की भावना जागृत होने वह व्यक्ति अपनी अर्थ की लोलुपता के कारण कुछ भी करना मंजूर कर सकता है जब मेरे सामने तीन बात नहीं आई मैंने उसी समय उच्च शिक्षण या फाइनल कर दिया चाहे कुछ भी हो जाए मेरे को अब इस स्थान पर नहीं रहना है क्योंकि मैंने दो हजार सोलह के अंदर यह संकलन व्यक्त कर दिया था मैं जंगल में पेड़ के नीचे बैठ कर दिया अपनी साधना को संपन्न करने का प्रयास करूंगा उस जैसा केंद्र मैंने अपने चरणों को गतिशील बनाना प्रारंभ कर दिया इसलिए मेरे मन के अंदर कोई प्रकार का पश्चाताप नहीं है मैंने धोखा खा लिया है धोखा दिया है वह व्यक्ति पश्चाताप जीवन भर करता रहेगा पर मेरे लिए यह जो धोखा है नई शक्ति का संचार करने वाला बन गया है मैंने अपने मन में जो संकल्प किया है वह संकल्प हर हालत के अंदर पूरा होकर ही रहेगा चाहे कुछ भी हो जाए इसलिए धोखा है वह मेरे लिए और ज्यादा प्रेरणादाई बन गया है

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