भूपेंद्र मुनि सवालों के घेरे में....
जवाब अपेक्षित है ..
(संजय सनम)
आचार्य भूपेंद्र मुनि ने संबोधी पार्श्वनाथ क्षेत्र क्यों छोड़ा!
यह उनकी पोस्ट में उनकी ही बात को हम दे रहे है...पर उनकी पोस्ट से कुछ सवाल जिज्ञासा के रूप में सुने जा रहे है...वे सवाल हम इस पोस्ट के बाद दे रहे है ...
पहले उनकी पोस्ट को पढ़िए और समझने की कोशिश कीजिए...
आचार्य भूपेंद्र कुमार जी श्री बोथरा बालाजी ध्यान में साधना करके धानीनगांव में पधारे
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आचार्य भूपेंद्र कुमार जी आज 16 अगस्त 2022 को 12:00 बज कर 8 मिनट पर श्री बोथरा बालाजी धाम के प्रांगण में पधारे जहां पर 2:00 बजे तक मंत्र शक्ति की साधना करने के पश्चात धानीन गांव चौरडिया जी के आवास पर पधार गए हैं पधारने के मुख्य कारण तीन उभरकर सामने आए पहला कारण विजय बोथरा विशाल बोथरा ने यह कहा यहां पर जितने भी यात्री लोग बाहर से आते हैं जो भी समान यहां देते हैं वह सब पर सब हमारा रहेगा
दूसरा जितना भी डोनेशन आता है वह सब पर सब हमारा रहेगा
तीसरा श्री बोथरा बालाजी धाम जो आप बना रहे हैं उस पर मालिकाना अधिकार हमारा रहेगा आप तो केवल यहां पर रह सकते हो
यह बात सुनकर आचार्य भूपेंद्र कुमारी ने तत्काल कहा इस बात के लिए मैं कदापि तैयार नहीं हूं और मैं इसी क्षण तुम्हारा स्थान है इस को तिलांजलि देकर मैं अपनी साधना के पथ को प्रशस्त करने के लिए यहां से प्रस्थान कर रहा हूं
जो व्यक्ति कल तक यह कह रहा था मैं आपको बड़ा भाई मानता हूं मेरे पास में एक रोटी होगी तो आधी रोटी पहले आपको दूंगा आज ही रोटी हमारा पूरा परिवार खाएगा उसकी रोटी पता नहीं कहां चली गई जब स्वार्थ की भावनाएं जागृत होने प्रारंभ हो जाती है तब आंखों के आगे अपने आप ही पट्टी बंधनी प्रारंभ हो जाती है आचार्य भूपेंद्र कुमार जी ने स्पष्टता के साथ ने कहा मैंने जो संकल्प किया है उस आधार पर ही में अपनी साधना को हमेशा गतिशील बनाए रखूंगा मैंने 2016 के अंदर संकल्प कर लिया था पेड़ के नीचे बैठकर भी साधना करनी पड़ेगी तो मैं करूंगा पर जिस व्यक्ति पर इतना विश्वास किया था उसने किस तरह का व्यवहार किया अपने आप ही सामने आ गया मेरे को कम से कम 1000 लोगों ने कहा था यह व्यक्ति कभी भी विश्वास के लायक नहीं है आप इस पर विश्वास मत करो यह आगे जाकर धोखा ही देगा और मैं भी जानता था यह धोखा देने वाला ही है पर जिस स्थान पर मे रह रहा हूं कम से कम मेरा यह दायित्व बनता है उस स्थान की प्रगति के बारे में अपना चिंतन प्रकट करके उसको सुव्यवस्थित बनाउ कम से कम 40 ₹5000000 लोगों के यहां पर लगाए और भी धीरे-धीरे लोग अपने आप ही जुड़ते जा रहे थे लगाते जा रहे थे बस इसको यह अभिमान हो गया मेरे इस धाम के कारण लोग पैसा दे रही हैं पर इस को पता नहीं है कहिए जितना भी आ रहा है यह सारा का सारा आचार्य भूपेंद्र कुमार जी के संपर्क वाले श्रद्धा वाले भक्ति वाले लोग ही दे रही हैं आचार्य भूपेंद्र कुमार जी तत्काल वहां से प्रस्थान कर के बालाजी बोथरा धाम पर दो घंटा की साधना करने के पश्चात अब धानी गांव में चोरडिया परिवार के आवास पर बिराज रहे हैं आचार्य भूपेंद्र कुमार जी ने संकल्प कर लिया चाहे कुछ भी हो जाए श्री बोथरा बालाजी धाम है वह तो इसी एरिया में बनकर ही रहेगा चाहे वह कितनी भी कोशिश कर ले एक मुसलमान को जेल मंदिर के अंदर रखकर यहां से लाखों रुपए का घोटाला का इल्जाम लगाकर जिसको निकाला था उसी मुसलमान को वापस यहां पर मैनेजर के रूप के अंदर ला कर रखा है केवल आसपास के लोगों को भड़काने के लिए जो तुमने आचार्य भूपेंद्र कुमार जी को जगह दी है उस जगह को वापिस ले लो तुम्हारे को 5000000 दिलवा देंगे एक करोड दिलवा देंगे सरकारी अफसरों के पास के अंदर ही दौड़-धूप करना कामों को रुकवा ना करना यह सारा का सारा घटनाचक्र चलता रहा अब भी चला रहा है पर आचार्य भूपेंद्र कुमार जी का संकल्प है चाहे कितना ही घटनाचक्र क्यों ही नहीं चला दे श्री बोथरा बालाजी धाम है वह तो निश्चित रूप से बनकर ही रहेगा आचार्य भूपेंद्र कुमार जी का संकल्प है अटल है आंचल है मजबूत है इसलिए बालाजी स्वयं शक्ति प्रदान कर रही हैं अपने आप ही विघ्न बाधाएं जो पैदा कर रही हैं बालाजी उनको जो करना है वह अपने आप ही करते रहेंगे आचार्य भूपेंद्र कुमार जी का मार्ग है वह हमेशा स्वस्थ है और आगे भी प्रशस्त रहेगा सभी भक्तजनों को कोई प्रकार की चिंता फिक्र करने की जरूरत नहीं है हमारे यहां पर चिंता फिक्र करने वाले बलिदानी कार्यकर्ता बैठे हुए हैं मुख्य रूप से शिव सिंह जी मोहन सिंह श्रवण कुमार लक्ष्मी लाल यह चारों के चारों व्यक्ति इतने ज्यादा समर्पित हैं चाहे कुछ भी हो जाए हम आचार्य भूपेंद्र कुमार जी के साथ ही रहेंगे साथ ही सब कुछ करेंगे हम इनको कभी भी अकेले नहीं रहने देंगे जहां यह देखेंगे हम वहीं पर धरना देकर बैठ जाएंगे हम इनके जीवन भर उपासना करेंगे चाहे कुछ भी हो जाए जब इतने बलिदानी कार्यकर्ता आचार्य भूपेंद्र कुमार जी के साथ है फिर चिंता और फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है आगे जो भी होगा अच्छा होगा भविष्य है और ज्यादा उज्जवल से उज्जवल तुम बनेगा इसलिए आचार्य भूपेंद्र कुमार जी के सपनों को साकार करने के लिए सभी भक्तगण अपनी अपनी तैयारियां प्रारंभ कर दी बालाजी के प्रति और आचार्य भूपेंद्र कुमार जी के प्रति आस्था है वह लोग अपने आगे आते जा रहे हैं सहयोग करते जा रहे हैं और बहुत ही जल्दी श्री बालाजी धाम प्रसिद्ध धाम के अंदर इस संसार में स्थापित होकर ही रहेगा
अब कुछ जिज्ञासा जो सवाल के रूप में भूपेंद्र मुनि जी से समाधान चाहते है...
साधना के पथ के राही को उन्ही के शब्दों में जिस व्यक्ति के लिए 1000 लोगों ने अपनी राय पहले ही दे दी थी
उसको समझने में इतनी भूल फिर भी हो गई..साधना की राह का व्यक्ति भी साधारण व्यक्ति की तरह कैसे चूक गया!
मुनि जी ...आपने जो तीन कारण अपने इस पत्र में बताए है वो तीनो कारण माया से जुड़े है...इसका अर्थ आप माया पर अधिकार रखने का मानस रखते है और बाते साधना की करते है...यह अपने आप में विरोधाभास है...
क्या आप भी यहां दुकानदारी के हिसाब से आए थे...आपने यहां मंदिर,ट्रस्ट के नाम पर अपने भक्तो से रकम दान करवाने में ही समय लगाया..साधना का पथिक इन सब से लाखो कोस दूर रहता है।
जब इस घटना का संवाद मुझे मिला मैंने मुनि जी और बोथरा जी दोनो को फोन किया पर दोनो का फोन नो रिप्लाई था...बाद में मुनि जी का व्हाट्स ऐप पर यह संदेश दिखा जिसके अंदर कथनी और करनी के बीच विरोध साफ दिख रहा था।
विजय बोथरा जी ने आपको धोखा दिया यह आप कह रहे है....हो सकता है पर आपने किसको धोखा दिया है इस पर आत्म चिंतन आप अभी भी नही कर पा रहे है।
आपकी हर पोस्ट में सिर्फ एक लक्ष्य साधना,साधना की बात जो कही जाती थी वो माया ...में तब्दील होती लग रही है।
आपका और विजय बोथरा का रिश्ता ही जब गुरु शिष्य का नहीं था...तब लगता है आप लोग गठबंधन की सरकार चला रहे थे...और माया की दौड़ में थे अब वो अधिकार जब आपका नही रहा तब दूसरी जगह फिर आप यही दौड़ लगाएंगे..
क्या आप माया की साधना करने अलग राह बनाए थे..!अब लोगों के मन में यह सवाल भी आयेगा..
क्षमायाचना सहित..
संजय सनम
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