भूपेंद्र मुनि जी...मेरे सवाल का यह जवाब नहीं है...

भूपेंद्र मुनि जी...आपके पास मेरे सवालों का जवाब ही नहीं है...

विषय से भटकाने की कोशिश मत कीजिए...अन्यथा यह विषय और उलझा देगा....
मेरे सवाल का मर्म समझिए.... भ्रम मत फेलाइए....

मुनि जी
आपने साधना साधना साधना के नाम पर अर्थ संग्रह का एक माध्यम खड़ा करने की कोशिश की थी और इसके लिए आपने विजय बोथरा जी के साथ गठबंधन बनाया था...पर वर्चस्व की लड़ाई ने असली उद्देश्य की पोल खोल दी...

मेरा सवाल पहले तो धरातल वाला था अब आपको थोड़ा गहराई से इसका अभिप्राय समझाने की जरूरत आ गई है...

क्या आप तेरापंथ धर्म संघ से ट्रस्ट निर्माण,मंदिर निर्माण के लिए धन उगाहने की साधना के लिए निकले थे!

साधना का  गहरा पथिक अंतरमन की साधना से दैविक आराधना,उपासना कर उनकी कृपा प्राप्त कर लेता है ...
साधना का पथिक बाहर कम भीतर अधिक रहता है...
या तो आप यह कहिए कि आप गहरे साधक नही है आपको साधना के लिए बाह्य जगत के सहारे की जरूरत है...!

अगर वो भी है तब भी आप अपने ईष्ट की मूर्ति,फोटो अपने सामने रखकर भी अपनी साधना कर सकते थे....आपको धन संग्रह के आयाम बनाने की क्या जरूरत थी...!

आप अपने कुल देव की पूजा उपासना से शक्ति प्राप्त कीजिए यह बात तो तर्क संगत है पर उनकी पूजा उपासना के नाम पर मंदिर निर्माण का चंदा लेने लग जाए तब साधना,उपासना की राह कैसे हुई?

बात साफ है आप साधना के नाम पर लोगों की आस्था का गलत लाभ लेने लगे...आपको अपना अंतर मन नहीं चमकाना था...आपको अपना ट्रस्ट,अपना आश्रम बनाना था....अब इस उम्र में दीक्षा के इतने वर्षो बाद आप धन और जमीन के लिए अपना समय लगा रहे है!

मुनि जी
साधना वाला व्यक्ति अपने खुद के लिए इतने गीत नही गाता....जो आप बार बार साधना के नाम की रट लगाकर आस्था के नाम पर लोगों की जेब ढीली कर रहे है...

या तो साधना की रट छोड़ दीजिए या फिर धन संग्रह की ललक छोड़ दीजिए...

ये दोनो रास्ते एक साथ नहीं चल सकते..
मेरा फोन क्यों नहीं उठा रहे है....आपको आमंत्रण देता हूं....अपनी बात खुल कर कहने के लिए पर मेरे सवालों का जवाब भी आपको देना पड़ेगा...
क्षमा याचना सहित
संजय सनम

मुनि जी ने मेरी पहली पोस्ट के सवाल का जवाब जिस रूप में विषय वस्तु से घुमाकर दिया है उसे पढ़िए और समझिए...
साधना के मर्म का जवाब यह नहीं हो सकता....

प्रश्न आपके❓‼️⁉️❗

उत्तर मेरे☑️☑️☑️☑️☑️

हजारी भूपेंद्र कुमार जी आप यहां पर अपनी दुकानदारी जमाने के लिए आए थे या साधना करने के लिए जो आपने यहां पर ट्रस्ट मंडल बनाकर लोगों से अर्थ सहयोग ग्रहण करना प्रारंभ कर दिया,

❓❓❓❓❓❓❓

कोलकाता के पत्रकार का प्रश्न मेरे सामने उपस्थित हुआ है प्रश्न अपने आप अंदर महत्वपूर्ण है अर्थ संग्रह करना यह उद्देश्य कभी भी नहीं हो सकता है उद्देश्य केवल इतना ही था जिस स्थान पर मैं साधना करने के लिए आया हूं वह स्थान साधनामय सबको नजर आए बार्शी आने वाला हर साधक अपने आपको साधना की स्थिति में पहुंचाने के लिए साधना करना प्रारंभ कर देश के लिए स्थान का भी अपने आपके अंदर बहुत बड़ा महत्व होता है जब मैं साधना करने के लिए पहुंच जाता हूं तब भक्त लोग हैं वह भी आना प्रारंभ हो जाते हैं और यहां का जमीन का उदय भी आना प्रारंभ हो जाता है और देखते देखते यह स्थान के अंदर परम शांति प्रदान करने वाला बनता जा रहा था आने वाली हर व्यक्ति का यहां पर रहकर साधना करने का मन होना प्रारंभ हो जाता था भक्त लोग आएंगे तब कोई ना कोई अरमान है अवश्य ही लेकर आते हैं और वह हर अरमान को पूरा करना भी चाहती है मेरे मन के अंदर मेरे जो को कुल प्रणेता पूनरासर बालाजी उनके प्रति हमेशा ही आस्था के भाव जागृत बनने प्रारंभ हो गई जब मेरे को यह पता लगा हमारे बोथरा कुल के प्रणेता पूनरासर बालाजी है दादा गुरु के पास जिन्होंने श्रावक के 12 व्रत धारण किए अंतिम समय में सल्लेखना संथारा करके देव लोक में 52 वीरों में विराजमान हुए 500 वर्षों तक दादा गुरु के शासन की सेवा के उनकी जन्मभूमि मेवाड़ी है जब मैंने साधना की तरफ अपने कदमों को गतिशील बनाना प्रारंभ कर दिया था उस समय मेरी मन की परिकल्पना थी श्री बोथरा बालाजी धाम मेवाड़ में स्थित बने भक्त लोगों ने अपने आप इस भावना को साकार रूप प्रदान करना प्रारंभ कर दिया जब भक्त जुड़ने प्रारंभ हो जाती है तो भगवान उनको अपने आप की शक्ति देना भी प्रारंभ कर देते हैं 11 महीने तक वातावरण बिल्कुल शांत रहा था और जब भक्त लोगों ने श्री बोथरा बालाजी धाम निर्माण के लिए ट्रस्ट मंडल का गठन कर लिया यह गठन ही स्वार्थी लोगों के मन के अंदर आग भड़काने वाला बन जाता है उनके मन में परिकल्पना ही उभर कर सामने आने प्रारंभ हो जाती है अब हमारी जो इच्छा है वह कब कैसे पूरी होगी उनकी इच्छाएं कि केवल अर्थ के ऊपर टिकी हुई थी मेरी इच्छा है बालाजी पर टिकी हुई थी बस केवल इतना ही अंतर था उन्होंने तत्काल वीटो पावर का प्रयोग करते हुए ट्रस्ट मंडल के अध्यक्ष को स्पष्ट रूप से लिख दिया सब के सब संपत्ति हमारी रहेगी अष्ट मंडल के अध्यक्ष ने जब मेरी को सूचित किया तब मैंने स्पष्टता के साथ में कहा ट्रस्ट मंडल स्वतंत्र अधिकार है इसके ऊपर किसी का भी अधिकार नहीं हो सकता है मैंने बालाजी के पास शक्ति प्राप्त की है मैं इसलिए बालाजी के ही शक्ति स्थल को अपना केंद्र बिंदु बनाकर अपनी साधना और ज्यादा तेजी के साथ में गतिशील बनाना प्रारंभ करूंगा जब यह संवाद स्वार्थी लोगों के सामने पहुंचा उनको बड़ा झटका लगा तत्काल उन्होंने रोती हुई है मेरे को आग्रह किया हमारी भूल हो गई है हमारी गलती हो गई है आप हमें क्षमा प्रदान करें पूरे परिवार को क्षमा प्रदान करें हम आपको गौरु के समान मान रही है भविष्य में भी गुरु के समान मानते रहेंगे आप जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं करवाएं हम आ रहे हैं मैंने सोचा चलो कोई बात नहीं है उनका भी इंतजार कर लिया जाए पर उनके मन के अंदर तो हो ही कोई दूसरा षड्यंत्र चल रहा था उन्होंने उस षड्यंत्र को पूरा करने में भी कोई प्रकार की कमी नहीं रखी थी हिंदू जैन मंदिर के अंदर मुसलमान को अपना मैनेजर बना कर हमारी जो कार्यकर्ता थे उनको वहां से बाहर का रास्ता दिखा दिया मेरे को जब यहां का दिशा निर्देशक बनाया था और मेरे को बिना पूछे ही यह सारा कार्य संपादित किया तब मैंने संकल्प किया अब मेरे को ऐसे स्थान में नहीं रहना है अर्थ मेरे लिए कोई मूल्य नहीं रखता है अर्थ तो भक्त लोग अपने आप ही इकट्ठा करना प्रारंभ कर देंगे श्रद्धा के साथ इसलिए मेरे को अब अपनी साधना के लिए अपने चरणों को गतिशील बनाना प्रारंभ कर देना चाहिए मैंने तत्काल 12:08 पर अपने चरणों को गतिशील बनाना प्रारंभ कर दिया स्वार्थी लोग केवल अपनी गर्दन झुका कर नीचे जमीन की ओर देखने के सिवा कुछ भी नहीं कर पाए आज भी मेरे मन के अंदर बालाजी के प्रति वही आस्था व श्रद्धा वही विश्वास है इसलिए मैंने अपने जीवन का सूत्र बना लिया था साधना साधना साधना


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