वसुंधरा गहलोत पर सीधा वार क्यों नहीं करती...?
गहलोत सरकार पर बोलने वाली वसुंधरा राजे अशोक गहलोत पर प्रहार क्यों नहीं करती?
जन आक्रोश रैली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा के सामने वसुंधरा ने क्या संदेश दे दिया !
फर्स्ट न्यूज(संजय सनम)
यद्धपि संकेतो में सी एम और पूर्व डिप्टी सी एम कह कर गहलोत और पायलट के बीच चल रही खींच तान पर चुटकी तो ली पर अशोक गहलोत के खिलाफ खुल कर एक शब्द भी नहीं कहा.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कांग्रेस में गहलोत और पायलट के बीच दिखने वाली सुलह से प्रेरित होकर वसुंधरा और सतीश पूनिया के बीच सुलह करने की कोशिश इस आयोजन की आड़ में की है
कांग्रेस की एकता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान में प्रवेश को सफल बनाने की कोशिश में हुई है कब तक टिकेगी ?कहना मुश्किल है पर भाजपा संगठन ने इससे प्रेरणा लेकर अपने घर की तकरार को रोकने के लिए गंभीरता दिखाई है क्योंकि अब 2023 का काउंट डाउन शुरू हो गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने एक कड़ा संदेश देते हुए.कहा कि कार्यकर्ता प्रेस और पोस्टरों में दिखने की नहीं, पब्लिक में दिखने की होड़ करें.।
जन आक्रोश यात्रा के आगाज के मौके पर आयोजित सभा में राजे यह सलाह देने से भी नही चुकी कि यदि पार्टी को जीत के रिकॉर्ड तोड़ने हैं तो ज़्यादा आत्म विश्वास में रहने के बजाय एकजुट, एकमुख और एक सुर होकर कड़ी मेहनत करनी होगी फिर देखिये, कैसी जीत होती है?
राजे ने कहा कि एकजुटता से मिलने वाली जीत, ''न भूतो, न भविष्यति'' वाली होगी. जन आक्रोश रैली में राजे ने कहा कि, अब कांग्रेस की इस सरकार के साल नहीं, बल्कि दिन बचे हैं. उन्होंने कांग्रेस के आपसी संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि, सीएम-पूर्व डिप्टी सीएम में बोलचाल ही नहीं है. कहीं मंत्री-मंत्री और मंत्री-अफ़सर आपस में लड़ रहे हैं. राजे ने कहा कि इन्हें जनता के आंसू पोंछने से कोई मतलब नहीं.।
इस अवसर पर राजे ने पिछले चुनावों में मिली सीटों की जोड़ बताते हुए अपने कार्यकर्ताओं पर 2023 में बंपर जीत का भरोसा जताया ।
वर्तमान कांग्रेस की सरकार को झांसे की सरकार बताते हुए खूब खरी खोटी तो सुनाई पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सीधा वार उन्होंने नहीं किया।
राजनीतिक हलकों में वसुंधरा और गहलोत के बीच राजनीतिक रिश्तो पर कई बार सवाल उठे है और दोनो नेताओं ने एक दूजे के लिए विरोधी दल में होने के बाद भी संकट मोचन की भूमिका अदा की गई है।
वसुंधरा गहलोत सरकार पर तो वार करती है पर गहलोत पर सीधे वार से परहेज भी करती दिखती है।
अतीत के पन्ने दो राजनीतिक विरोधी दलों के नेताओं के बीच एक दूजे को बचाने की जो भूमिका निभाने वाली गवाही देते है कि किस प्रकार गहलोत ने वसुंधरा का सरकारी बंगला बचाया और वसुंधरा ने गहलोत की सरकार ही बचा दी...
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