क्या गहलोत देंगे कांग्रेस को तगड़ा झटका!
क्या वैभव गहलोत भाजपा का दामन थामेंगे!
राजस्थान में राजनीतिक भगदड़ के आसार..
कांग्रेस के कई नेता भाजपा में एंट्री के लिए तैयार खड़े..
अडानी के बहाने गहलोत का सिक्सर
फर्स्ट न्यूज(संजय सनम)
राजनीति में रिश्ते निभाए नही जाते वरन रिश्तों के साथ अपनी सुविधा के अनुसार खेला जाता है..इसलिए राजनीति में दुश्मन भी कब दोस्त हो जाते और दोस्त कब जानी दुश्मन बन जाते यह पता ही नहीं चलता।
जब तक अपनी मनचाही कुर्सी सुरक्षित रहती है तब तक लोग पार्टी के प्रति निष्ठा और अपने हाई कमान के प्रति वफादारी ऐसे निभाते है जैसे इनसे बड़ा शुभचिंतक कोई नहीं..
जब पार्टी उनसे कुर्सी मांग लेती है किसी और को बिठाने के लिए तो जो नेता पहले हाईकमान के लिए अपना त्याग पत्र उनको दिया हुआ रखता था वो फिर अपने लोगों से बगावत करवा लेता है और जब किरकिरी होती है तो चुपचाप जाकर हाईकमान से सॉरी बोल कर आ जाता है।
कांग्रेस के पक्के वफादार श्री अशोक गहलोत साहिब ने भी यही किया पर उनकी इस सॉरी में भी जादूगिरी थी दरअसल सॉरी कहकर उन्होंने अपनी रणनीति तय करने का कुछ वक्त ले लिया और हाईकमान को अडानी के माध्यम से कड़ा संदेश दे दिया।
जिन अडानी को राहुल पानी पी पी कर कोसते थे उन्हीं अडानी को भाई से संबोधन और तारीफों के पुल बांधकर जादूगर गहलोत ने हाईकमान को स्पष्ट संदेश दे दिया कि मेरी कुर्सी के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करुंगा..
अब हाईकमान निश्चित रूप से बैकफुट पर है.. जो गहलोत गांधी परिवार के लिए इतने समर्पित थे उन्होंने हाईकमान को जिस अंदाज में चिड़ाया है...यही तो जादूगर की जादूगिरी है।
अब कयास इस बात के लगाए जा रहे है अडानी का हाथ पकड़कर न सिर्फ अपने बुढ़ापे में सुरक्षित राजयोग बल्कि अपने बेटे वैभव के लिए सुरक्षित भविष्य की इंश्योरेंस जादूगर ने करवा ली है।
राजस्थान सबमिट तो बहाना था दरअसल जादूगर का मिशन अपने बेटे को सेट करना था।
अब यह कयास यह भी लग रहे है कि जादूगर अभी अपने हाईकमान की प्रतिक्रिया को समझेंगे और उनकी कुर्सी पर अगर हल्की सी भी आंच आते दिखी तो अपने बेटे वैभव को भाजपा में शामिल कर हाईकमान को एक कड़ा संकेत दे देंगे।
हाईकमान ने पंजाब में जो स्वाद चखा है वो राजस्थान में प्रयोग करने से पहले तब सोचने को और मजबूर हो जायेगा जब जादूगर भी बगावत की खुली सीटी बजाता दिखेगा।
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