क्षमा
दिल से की जाए
और दिल से
स्वीकारी जाए..
क्षमा दिल की हो
न दिखावटी और न बनावटी..
क्षमा
जाने अनजाने
प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष
हुई भूलों
का
आत्म चिंतन की प्रक्रिया से
दिल से भूल स्वीकारने
और प्रायश्चित सा बोध है
यह औपचारिकता की
सिर्फ हाथ जोड़ने की रस्म नहीं
यह अपनी भूल की सहज स्वीकृति है
मैं
मन,विचार,शब्द,आवाज
कर्म,क्रिया
से
जाने अनजाने हुई
समस्त भूलों
के लिए
विनय पूर्वक
क्षमा याचना करता हूं
आइए विकार मुक्त होकर
सद्भावना के साथ आगे बढ़ें।
क्षमा पर्व
आत्म चिंतन के लिए प्रेरित करता है
तब स्वयं की गलतियां चमकती दिखती है..
बस उनको स्वीकारने और सुधारने
का क्षमा एक मंत्र है
क्षमा याचना के साथ
:संजय सनम सरिता वैभव हर्ष बाफना
टिप्पणियाँ