पायलट पर भारी पड़ रहे गहलोत
क्या गहलोत के नेतृत्व में ही 2023 का चुनाव लडा जायेगा!
सचिन पायलट पर क्यों नहीं बोल रहा हाई कमान...
जिस तरह से भाजपा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लिए कहा जाता है कि पार्टी में भी उनके विरोधी उनके सामने टिक नहीं सकते क्योंकि मोदी अपने विरोधियों को इस तरह साइड लाइन करते है कि विरोधियों का राजनीतिक अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता है ठीक इसी तरह कांग्रेस पार्टी में श्री अशोक गहलोत के लिए यह बात कही जाती है कि वे भी अपने विरोधियों के पर कतरने में खासे माहिर है।
उनके राजनीतिक जीवन में भी पार्टी के भीतर चुनौतियों के पंख फड़फड़ाए तो खूब पर गहलोत को हिला नही सके।
सचिन पायलट अशोक गहलोत के लिए पार्टी में सबसे बड़ी चुनौती कहे जा सकते है और पायलट ने अपना दम खम भी पूरा दिखाया पर अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री की कुर्सी से नीचे नही उतार सके।
अभी हाल ही के कांग्रेस चिंतन शिविर के बाद सीएम अशोक गहलोत और मजबूत बनकर उभरे हैं।
अब लगता है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 का चुनाव गहलोत के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा क्योंकि चिंतन शिविर में पार्टी आलाकमान ने सचिन पायलट की भूमिका को लेकर स्पष्ट तौर पर कोई संकेत नहीं दिए हैं।
मतलब साफ है कि राजस्थान कांग्रेस में वही होगा जो गहलोत चाहेंगे। राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट से पहले भी गहलोत कई दिग्गजों को पटखनी दे चुके हैं। प्रदेश की सियासत में सीएम अशोक गहलोत से जो भी उलझा उलझता चला गया।
साल 2020 में पायलट की बगावत के समय गहलोत ने सही समय पर संकट को भांपते हुए 109 विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया था। परिणाम यह निकला कि पायलट खेमे को सुलह करनी पड़ी।
राजस्थान कांग्रेस के अंदर मचे सियासी घमासान में अशोक गहलोत एक बार फिर सचिन पायलट पर भारी पड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।
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