पार्टी से बड़ा नेता होता है... लादूलाल पितलिया का जन समर्थन चर्चा में।

 फर्स्ट न्यूज (संजय सनम)
(आने वाले अंक में फर्स्ट न्यूज की कवर स्टोरी)


उनके पास साजिशे थी और वो चाले  चल कर भी हार गए
इनके पास जन समर्थन की ताकत थी और ये पार्टी को झुका गए।

जनता

 का एक हीरों....पार्टी को जिसके पीछे पीछे  दौड़ना पड़ा।
जनता के हीरो लादूलाल पितलिया ने बता दिया कि साजिशों को जन समर्थन के सामने झुकना पड़ता है।
देश में इन दिनों बंगाल विधानसभा चुनाव पर सबकी नजर है बंगाल के साथ असम,पांडिचेरी,तमिलनाडु ,केरल भी चुनाव प्रक्रिया से गुजर रहे है पर बंगाल में भाजपा ममता से सत्ता की आखिरी दौर की लड़ाई लड़ती दिख रही है और ममता अपने ताज को बचाने का संघर्ष कर रही है।


राजनीति के इस रोमांचक मैच में अगर राजस्थान की सहाड़ा रायपुर विधानसभा का उपचुनाव इस लिए चर्चा में आ जाए क्योंकि वहां से भाजपा के बागी उम्मीदवार को पार्टी के कुछ नेता नामांकन वापिस लेने के लिए धमकाते दिखे और बैंगलोर में उनके प्रतिष्ठानों को भी बंद करवा दे तब उस उम्मीदवार को अपने परिवार व व्यापार के हितों को देखते हुए अपने कदम चुनावी मैदान से पीछे  लेने पड जाए।

जब वह उम्मीदवार अपना नामांकन वापिस ले ले और अपनी मजबूर स्थिति का उनका ऑडियो क्लिप सार्वजनिक हो जाए   उस विधानसभा क्षेत्र की जनता का तांडव फिर इस सीट पर सबका ध्यान बरबस खींच देता है।
जनता की उमड़ती भावनाओ का जनसैलाब ,जनता के आहत मन का अपने नेता के लिए सड़कों पर उतरना,भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर सवाल खड़े करना और धमकी देने वाले नेताओं को 2023 में सबक सिखाने का संकल्प लेना और इस विधानसभा सीट से भाजपा के वर्तमान उम्मीदवार को भारी अंतर से हराने की बात कहना,नोटा पर वोट देने की कसम लेना यह सब काफी है कि बागी उम्मीदवार पार्टी के कुछ नेताओं की साजिश का शिकार भले ही हुआ हो पर सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र की जनता के दिलो दिमाग में दिवानगी की हद तक बैठा है ऐसे में भाजपा की नीतियों पर प्रश्न उठना व राजनीति को निम्न स्तर पर लाने वाली उन साजिशों के खलनायको पर जनता का गुस्सा होना स्वाभाविक ही था।
राजस्थान भाजपा में गुटबाजी की बात पहले से ही जोर से आती रही है।क्योंकि वर्तमान नेतृत्व की वसुंधरा राजे गुट से सीधी टक्कर बताई जाती है और राजस्थान की वर्तमान भाजपा पर यह आरोप भी है कि वे पार्टी में अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने में अधिक वक्त लगा रहे है इसलिए गहलोत सरकार के खिलाफ न तो मजबूत विरोध के स्वर आते है और न ही योग्य,काबिल  उम्मीदवार को वे सही स्थान पर देकर पार्टी का भला कर पा रहे है।
अर्थात भाजपा प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व पावर को अपने पास रखने की लड़ाई लड़ रहा है और अपने प्रति निष्ठावान को पुरुस्कार मिल रहा है इस वजह से कई स्थानों पर योग्य काबिल उम्मीदवार नजरंदाज भी हो रहे है और कुछ के साथ साजिश भी हो रही है।
सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र के  गोभक्त  श्री लादूलाल पितलिया अपनी सेवाभवना से समूचे विधानसभा क्षेत्र में हर समुदाय तक अपनी पकड़ रखते है और सभी जाति धर्म के लोग इस व्यक्तित्व की सेवा भावना,सुख दुख में सबके साथ खड़े होने की इस व्यवहार कुशलता से परिचित है।
जैन समाज से आने वाले श्री पितलिया के अपने क्षेत्र के सेवा कार्य एक के बाद एक कतारों में दिखते है तब लोग अपनी जाति,धर्म  व पार्टी के प्रति निष्ठा को भी भूलकर इस व्यक्ति के साथ दिल से खड़े होते है।

बताया जाता है कि 2018 में भी पार्टी ने इस व्यक्ति को नजरंदाज किया था मगर पितलिया उस वक्त भी जन समर्थन के विश्वास पर निर्दलीय उतरे और उन्होंने 30हजार से अधिक वोट लेकर पार्टी को यह चेता दिया था।चुनाव परिणाम से पहले बागी बनने के बाद ही पार्टी ने उनको निलंबित कर दिया था पर चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी ने जन समर्थन देख कर उनको पार्टी में पुन सम्मान सहित लिया भी था और यह भी  कहा जा रहा है कि श्री पितलिया जी को पार्टी ने आश्वस्त भी संभवतया किया था।

अभी सुजानगढ़,सहाड़ा(रायपुर) और राजसमंद सीटों में उप चुनाव हो रहे है।सहाड़ा से श्री लादुलाल पितलिया ने इस सीट पर न सिर्फ प्रचार  बल्कि चुनावी जन संपर्क भी शुरू कर दिया था।प्राप्त जानकारी के अनुसार अपने क्षेत्र में सेवा कार्य करते रहते लादुलाल के लिए यह सीट बहुत आसान थी पर जब उनको भाजपा की टिकट नहीं मिली तब उन्होंने जनता के उम्मीदवार के रूप में निर्दलीय ताल ठोक दी बस यही से वो सियासत शुरू हुई जो अटल वाली भाजपा के तहत कतई स्वीकार नहीं की जा सकती।
उनको नामांकन वापिस लेने का दबाव आया फिर तो धमकी भरे अंदाज के ऑडियो भी सोशल मीडिया में आ गए और उनका असर भी श्री लादूलाल के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ा अर्थात उनको बंद करवा दिया गया।
पारिवारिक जन को भी प्रताड़ना के आरोप लगे है पहले सिर्फ यह जुबानी चर्चा हुई बाद में इस तरह के जब ऑडियो वायरल हुए जहा एक नेता दूसरे नेता से खुले आम गंगापुर से बेंगलुरु तक रगड़ने की धमकी देते सुना गया।
इन सब दबाबो के बाद पितलिया जी ने अपना नाम वापिस लेने के बाद एक इंटरव्यू में इस तरह के दबाव की पुष्टि भी की थी।
जब यह सब मीडिया की सुर्खियों में आया तब भाजपा नुकसान कंट्रोल करने की ताबड़तोड़ कोशिश करने लगी और फिर पितलिया जी से संपर्क कर मनुहार से या दबाव से उनको भाजपा का सिपाही बता कर अपनी  तीनो सीटो पर प्रचार के लिए उतारने की बात होने लगी पर गहलोत की कांग्रेस सरकार ने महामारी एक्ट के तहत कोरेनटाइन का नोटिस जारी कर दिया जिसके फलस्वरूप बैंगलोर से आए लादूलाल जी को पहले कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ा।
इस बीच उनके क्षेत्र की जनता का आक्रोश उबलता भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ दिखा।लोगो की मांग कि पहले उनके साथ हुई अराजकता की माफी मांगे पार्टी के नेता,पितलिया जी को सम्मानजनक पद प्रदान करे व 2023 में भाजपा का उम्मीदवार की घोषणा भी इनके नाम से अग्रिम करे।

राजनीति में ऐसे नेता कितने मिलते है जो पार्टी के कद से बड़े लगते है क्योंकि उस क्षेत्र की जनता की आवाज बन जाते है और जब इनके साथ कुछ गलत होता दिखता है तब समूची विधानसभा की 36 कोम एक साथ अपने नायक के समर्थन में उतर जाती है।

अब सवाल यह नहीं कि लादूलाल पर पार्टी का दबाव है या पार्टी ने अपनी भूल को दिल से स्वीकार किया है सवाल यह है कि सेवा करने वाले व्यक्ति को लोग धर्म, जाति के नजरिए से नही देखते ।वे उस व्यक्ति को मसीहा के रूप में देखते है जो सबका होता है।
इस विधानसभा का चुनाव परिणाम जो भी आए पर सहाड़ा के लोगो ने यह बिना चुनाव के ही बता दिया कि हमारा हीरो कोन है!
अब भाजपा को भी सोचना पड़ेगा कि अराजक दबाव से सीट नहीं जीती जा सकती क्योंकि जनता अहसान भूलती नही ....और वक्त आने पर क्रांति की चिंगारी के साथ सूद सहित चुकाती है हिसाब।

अब सवाल लोगों के मन में यह सबसे बड़ा है कि क्या अटल वाली भाजपा कही खो गई है!

संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की पुरजोर बात करने वाली भाजपा  ने खुले आम लोकतंत्र का चीरहरण कैसे होने दिया!

जो खबरे बैंगलोर से आई वह यह बताने के लिए काफी थी कि  निर्दलीय नामांकन भरने की सजा भाजपा अपने कार्यकर्ता को इस रूप में दे सकती है!

सहाड़ा ही नहीं देश के लोगों में बल्कि उससे भी अधिक जिन लोगों की भाजपा में आस्था है उन लोगो का सवाल यह भी है कि क्या भाजपा का शीर्ष नेतृत्व प्रदेश के उन नेताओं पर तथा बैंगलोर के उन नेताओं पर जिन्होंने पितलिया के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को अनेतिक,अराजक कारवाई के तहत बंद करवाया तथा परिवार को मानसिक उत्पीड़न करके यह दबाव बनाया कि लादूलाल पितलिया चुनावी मैदान से हट जाए!क्या इन नेताओ पर कड़ी कारवाई होगी या लीपा पोती कर दी जाएगी।

एक बात खबरों में आ रही थी कि इस सीट पर अमित शाह जी की नजर है  तब सवाल यह है अमित शाह जी ने यह अराजकता क्यों होने दी या फिर उनकी इसमें सहमति थी!
अब देश की जनता को इन सवालों के जवाब चाहिए।अब यह भी स्पष्ट हो गया कि कोई एक व्यक्ति जनता की सेवा करके पूरी पार्टी को हिला सकता है!
पार्टी ने जन सेवक को नजरंदाज किया फिर उसके साथ अराजक व्यवहार किया यह राजनीति के पृष्ठ का काला पन्ना भाजपा के नाम बना है।
अगर आज अटल होते तो क्या यह सब इनको करने देते!
अपनी विचारधारा से भटकती भाजपा और इनके नेताओ की  कारस्तनी जनता माफ करेगी!
सहाड़ा विधानसभा में भाजपा पर अपनी आस्था रखने वालो के मन में अपनी ही पार्टी के प्रति ग्लानि आती दिख रही है कुछ लोग यह भी आरोप लगा रहे है कि विधान सभा चुनाव 2018 में जब पितलिया ने 30 हजार से अधिक मत निर्दलीय के रूप में ले लिए तब पार्टी ने उनको सम्मान सहित वापिस लिया था उस वक्त पार्टी ने इनको आश्वासन दिया था कि अब इस क्षेत्र से पार्टी श्री पितलिया जी को ही उम्मीदवार बनाएगी लेकिन पार्टी ने पितलिया जी के साथ धोखा किया यह सहाड़ा की जनता अब माफ नही करने वाली।
कुल मिलाकर यह घटनाक्रम सियासत की अनैतिकता व अराजकता को बताता है तो वही सियासत में त्वरित चाल की कुशलता भी दिखाता है...भाजपा ने लादूलाल जी को प्रचार के लिए मनाया तो कांग्रेस ने महामारी एक्ट का नोटिस पकड़ा कर कोरेनटाइन ही बिठा दिया अर्थात भाजपा की चाल धरी की धरी रह गई ।अब यह स्लोगन भी सहाड़ा में लोग बोल रहे है भाजपा का धोखा तो कांग्रेस ने रोका पर लादूलाल पितलिया जी के प्रति जनता के मन का सम्मान,विश्वास वह आज की सियासत में किसी मिसाल से कम नही लगता।



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