फर्स्ट न्यूज(संजय सनम)
भाजपा पर आरोप कि उसने अपने बागी उम्मीदवार श्री लादूलाल पितलिया के निर्दलीय नामांकन वापिस लेने के लिए अनावश्यक दवाब व भय का माहोल बनाया।प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्थान की भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा विधानसभा सीट से श्री लादुलाल पितलिया ने 2018 के विधानसभा में भी बागी बनकर मैदान में उतरे थे और लगभग 30हजार मत प्राप्त कर अपने साथ जनता के स्नेह ,विश्वास की झलक दिखा दी थी और कुछ अंतराल बाद पार्टी ने उनकी घर वापसी करते हुए आश्वासन भी दिया था और खबरों के मुताबिक इस बार उपचुनाव में उन्होंने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी थी पर पार्टी ने अन्य उम्मीदवार के नाम जब टिकट कर दी तब श्री पितलिया ने बागी बनकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा बनाए रखा।
उनकी उपस्थिति व जन मान्यता की वजह से पार्टी का समीकरण खराब हो रहा था इसलिए पार्टी ने उनको नामांकन वापिस लेने के लिए दबाव बनाया और इस दबाव का असर बैंगलोर तक गया बताया जाता है जब वहां पर उनके परिवार वालो को प्रतिकूल स्थिति का सामना प्रशासनिक व अराजक तत्वों के साथ देखना पड़ा।
इस तरह के हालातो को रोकने के लिए परिवार के दबाव की वजह से संभवतया पितलिया जी को नामांकन वापिस लेना पड़ा ऐसा खबरों की दुनिया से व कुछ विश्वस्त सूत्रों से नाम न बताने की शर्त पर यह बात आ रही है।
इस घटना की सोशल मीडिया में हुई चर्चाओं के कुछ अंश हम आपको यहां प्रेषित करेंगे ...यह वीडियो लिंक आप जरूर सुनिएगा....
अब सोशल मीडिया की पोस्ट भी देखिए.....
*लादुलाल पितलिया के चुनाव मैदान से अपना नामांकन वापस लेने की संभावना*?
🙋♂️ *भाई शांति लाल पितलिया के जयपुर आला भाजपानेताऔ से मुलाकात करने के संकेत*,
✍️भूपेन्द्र औझा
भीलवाड़ा।
*सहाड़ा विधानसभा उपचुनाव में प्रमुख दलों के राजनैतिक समीकरण मे खासा प्रभाव डालने वाले निर्दलीय उम्मीदवार लादुलाल पितलिया द्वारा आजकल मे अपना नामांकन वापस लेने के संकेत मिले हैं।इस कवायद में लादुलाल पितलिया परिवार का बेंगलुरु कारोबार संभालने वाले भाई शांति लाल पितलिया की अहमः भूमिका निभाने की पुख्ता जानकारी प्राप्त हुई हैं*।
*शांति लाल पितलिया के इस बाबत गुजरे दिनो भीलवाड़ा से जयपुर जाने ओर भाजपा आलानेताऔ से मुलाकात करने के संकेत मिले हैं।आलासूत्रो के मुताबिक जयपुर मुलाकात में शांति लाल पितलिया ने भाई लादुलाल पितलिया के सहाड़ा उपचुनाव से अपना नामांकन वापस लेने का आश्वासन-भरोसा दिया है*।
*लादुलाल पितलिया का गुजरे दो दिनों से निजी मोबाइल नंबर बंद होने तथा क्षेत्र में अपना चुनाव प्रचार फिर शुरू नहीं करने से कयासों का बाजार गर्म हो गया।लादुलाल पितलिया अपना नामांकन वापस लेगे,कि नहीं* *को लेकर खासी चर्चा होने लगी है*।
*लादुलाल पितलिया के खासे निकट सूत्रोनुसार, नामांकन दाखिल दिवस के अंतिम दिन बेंगलुरु में पितलिया कारोबार पर हुई कार्यवाही के बाद से शांतिलाल पितलिया ने सहाड़ा उपचुनाव सेअब दुर होने की इच्छा- मानस बनाया तथा इस सेअपने भाई लादुलाल पितलिया को अवगत कराने के संकेत मिले हैं। आला सूत्रोनुसार लादुलाल पितलिया ने भी अपने नामांकन दाखिल दिवस पर सहाड़ा उपचुनाव हेतु क्षेत्र में आये हुये भाजपा प्रदेश संगठन के एक आला नेता से अकेले में मुलाकात करने के संकेत दिए।उसमे भरोसेमंद सूत्रोनुसार, पितलिया ने आलानेता कोअपनी नामांकन दाखिल रैली बाबत समर्थकों के गंगापुर आने के कारण अपना नामांकन दाखिल करने ओर उसे बाद मे वापस लेने का भरोसा देने के संकेत दिये है। इसके बाद से लादुलाल पितलिया ने अपना निजी मोबाइल नंबर को बन्द कर, अपने समर्थकों एवमअन्य नेताओं से मोबाइल पर बातचीत-सम्पर्क नहीं कर,वह एकांत में चले गये।साथ ही नामांकन दाखिल के बाद बीते दो दिन से पितलिया ने अपना जनसंपर्क अभियान तक फिर शुरू नहीं किया*।
*आलासूत्रो के मुताबिक लादुलाल पितलिया को निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव नहीं लडने बाबत भाजपा आलानेताऔ द्वारा किये जा रहे अनुरोध- सम्पर्क दबाव की खासी मशक्कत पर लादुलाल पितलिया ने अपने भाई शांति लाल पितलिया को बातचीत बाबत अधिकृत करने तथा उसे भीलवाड़ा से जयपुर भेजने के संकेत मिले है। शांतिलाल पितलिया के भी भीलवाड़ा से जयपुर जा, बकायदाआला नेताओ से मुलाकात कर अंतिम फैसला करने के संकेत मिले है ।पितलिया के निकटभरोसेमंद सूत्रोनुसार, उसमे आलानेताऔ को शांति लाल पितलिया ने लादुलाल पितलिया द्वारा अपना नामांकन वापस लेने का आश्वासन दिया है। शांति लाल पितलिया के जयपुर मुलाकात के बाद, अपने कारोबार को संभालने बेंगलुरु वापस जाने ओर बेंगलुरु में कर्नाटक सरकार के राजस्व मंत्री आर.अशोक तथा मेवाड़ क्षेत्र से जुडे कर्नाटक में एमएलसी लहर सिह के सम्पर्क मे ह़ोने की जानकारी प्राप्त हुई हैं। पितलिया के निकट सूत्रोनुसार शांति लाल पितलिया के शुक्रवार को फिर गंगापुर आने तथा भाई लादुलाल पितलिया से मिलकर नामांकन वापस लेने हेतु मनाने की कवायद करने की संभावना है*।
*इसके मद्देनजर लादुलाल पितलिया के आजकल मे अपना नामांकन वापस लेने के आसार हैं*।
🛑 *सहाडा विधानसभा उप चुनाव* 🛑
*पितलिया की गलती ,खुद को ही ले डुबी*
*भाजपा-कांग्रेस की अब क्या रहेगी खुबी*
✍️.. *दिलीप मेहता , मांडलगढ़*
🌈🌈 *भीलवाड़ा जिले की राजनीति में सहाडा विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत गरमा गई है* । बिते समय में जिले के बूंदी सीमा से सटे मांडलगढ़ विधानसभा सभा के उप चुनाव हुये थे जहां. से कांग्रेस विजयी रही थी और अब राजसंमद जिले से सटे भीलवाड़ा जिले की सहाडा विधानसभा सीट के भी उप चुनाव हो रहे है जिसमें कांग्रेस अब उभरती दिखाई दे रही.है ।। *गरमाई राजनीति में एक बार फिर लादूलाल पितलिया सुर्खियों में आ गये है और अन्य राज्यों में अपने कारोबार पर मंडराते खतरे को देखते हुये शुक्रवार को सहाडा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी से भरे फार्म को आनन फानन में उठा लिया लेकिन उनका दर्द आमजन की नजरो में सामने आ गया* । चल रही चर्चाओं को लेकर बात करे तो इसके पिछे पितलिया की खुद की गलती ही पितलिया पर भारी पडी..?
*पितलिया ने कुछ समय पहले ही भाजपा का दामन थाम कर आगे बढ़ने का सपना सजोया लेकिन वह बिखर कर टूट गया..। आज के समय को देखते हुये यही गलती पितलिया पर भारी पडी और खुद को भी ले डुबी* । भाजपा में शामिल होकर फिर बागी बनकर निर्दलिय फार्म भरना पितलिया पर भारी पड गया और दबाव की राजनीति का यह खेल सहाडा से लेकर बेंगलूर तक जा पहुंचा । *अगर पितलिया भाजपा ज्वोइन नहीं करते और उप चुनाव में भी इस बार फिर निर्दलिय की ताल ठोकते तो हो सकता वह फायदे में रहते लेकिन भाजपा में शामिल होकर उन्होने खुद ने ही अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मार ली जिसका नतीजा ,सब के सामने है* ।
दबाव की राजनीति कहे या कोई और कारण रहे होगें लेकिन पितलिया का भाग्य किनारे की और बढ़ते बढ़ते ..फिलहाल ठहर सा गया है ..यानी.... *रूकावट के लिए खेद* होने जैसा है।
🌈🌈 *पितलिया के चुनावी मैदान से हटने के बाद अब सीधा मुकाबला भाजपा व कांग्रेस में दिखाई दे रहा है और कांग्रेस भारी पडती दिखाई दे रही है* । समाचार पत्रो से लेकर हर जगहो पर पितलिया के प्रति सहानुभूति की चर्चाएं चल रही है .. *इन चर्चाओं की हवाओं का रूझान अब जादूगर अशोक गहलोत की और बढ़ता हुवा नजर आ रहा है*
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और यहां पर कांग्रेस चुनाव जीत जाती है तो क्षैत्र का विकास होगा और अगर भाजपा जीत जाती है तो विकास कैसे हो पायेगा ... *यहीं संदेश आम जन में कांग्रेस की और से दिया जा रहा जिस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए* ।
पिछले चुनावों की चर्चाएं भी यहीं है कि भाजपा प्रत्याशी *रूपलाल जाट क्यों चुनाव हारे और किस किस ने कार सेवा की ... इसका भी शौर सुनाई देने लगा है* ।। समय... सभी का आता है और वह किसको ऊपर उठायेगा और किसको निचे गिरायेगा.. *इसका फैसला सहाडा विधानसभा क्षैत्र के मतदाता ही करेगे..* ?
इस चुनावी समर में पितलिया का अगला पैंतरा क्या होगा *उनके प्रति एकाएक चली सहानुभूति की लहर से कांग्रेस व भाजपा को कितना फायदा होगा* इसके आगे की तो बडे बडे रणनीतिकार राजनेता ही जाने ..या फिर.. *राम ही जाने* ..🤷♂️🤷♂️
नामांकन वापसी का संभावित चित्र(साभार सोशल मीडिया)
अब सवाल यह है कि संविधान के लोकतांत्रिक अधिकारों से बड़ी राजनीति हो गई है!
चुनाव में निर्दलीय खड़े होने के लिए अधिकार नहीं रहा!
बागी होना अगर गुनाह है तो पार्टी से निकाल सकते है पर क्या चुनाव में खड़े होने से भी रोका जा सकता है
ये सवाल जवाब मांगते है।
संजय सनम
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