होली पर भी मजबूरी है....

यह कैसी मजबूरी है!

अबकि बार होली में यह कैसी मजबूरी है
जोश है जुनून है रंग है,चंग है
मीठी गालियों में घुले हुए गीत भी संग है
शरारतों का  फागुनी मन है..भीगने को आतुर यह तन है
उधर आप है....इधर हम है
 पर हमारे बीच में उस जालिम का डर है.
शायद इसलिए यह अजब सी दूरी है
हाय यह कैसी मजबूरी है!

इसलिए कहता हूं

अबकी होली दूर से मनाए
 दूर से रंग दिखाकर...कल्पना से लगाए
कोरोना के जोखिम से खुद बचे
और अपनों को भी बचाए..
जिस्म पर रंग न लगा सके तो न सही
भावनाओं के मीठे रंगो से
दिलों को रंग जाए..
रंगो की होली में
आई इस मजबूरी को खुद समझे
और अपनों को समझाएं
इस बार होली
एक निश्चित दूरी के साथ
मास्क से चेहरा ढके हुए
ढप व चंग की आवाज से मनाएं।

इस लिंक को क्लिक करके वीडियो को सुनिए

रंगीली होली की आपको दिल से शुभकामनाएं....

संजय सनम
7278027381



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