महाराष्ट्र के पुणे में शुरुआती दिनों में जिन्होंने 90रुपए मासिक की नोकरी की...
फिर ड्राइवरी से ट्रेवलर्स के रूप में बदलाव...
अपनी मेहनत,व्यवहार कुशलता से उस वक्त के समाज में मुख्य माने जाने वाले लोगों का अपनी विनम्रता व कार्य कुशलता से दिल जीता..
फिर रियल एस्टेट में लग गई लंबी छलांग..
समृद्धि के जब चारो और से दरवाजे खुलते गए और अब वो नाम समाज के समृद्ध,मुख्य पंक्ति के लोगो की कतार में आ गया....
कड़ी मेहनत,विनम्रता,दूरदर्शिता,अध्यात्मिक रुझान,व्यवहारिक कुशलता के गुणों से बना एक खास व्यक्तित्व का नाम....श्री बालासाहीब धोका।
अत्यंत सहज,सादगी के साथ सबके साथ घुल मिल जाने वाले बाला साहिब अपनी जिंदगी में ड्राइवरी के उन दिनों को सहज भाव से जब याद करते है तब आंखो में चमक व ओंठो पर मुस्कान होती है।
करीब 50वर्ष की उम्र से पहले इतनी समृद्धि कमा ली कि फिर कमाने की चाह ही छोड़ दी और अब समाज सेवा,अध्यात्मिक सेवा का कार्य कर रहे है।
श्री धोका अपने साक्षात्कार में सामाजिक,अध्यात्मिक विसंगतियों का कड़वा सच कहने से नहीं चूकते..
सुनिए यह खास साक्षात्कार खास व्यक्तित्व के साथ..
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