तेरापंथ विशेष: सिरियारी प्रकरण में सवालों की आंच गरम क्यों है!




फर्स्ट न्यूज: संजय सनम
फोटो: (साभार सोशल मीडिया)

क्या अब भिक्षु बाबा के चमत्कार का परिणाम आता दिख रहा है!

 इस आलेख की शुरुआत में दी गई आचार्य भिक्षु की तस्वीर के साथ जो प्रेरक शब्द अंकित है यदि आचार्य भिक्षु जी के इस उपदेश को ही समझ लिया जाए और धर्म को जीवन में उतार लिया जाए तो फिर कोई मतांतर इस तरह का होने की संभावना फिर कैसे रहती! सामाजिक मुद्दे फिर अदालतों में नही गए होते।

क्या अध्यात्मिक परिसर व्यक्तिगत मनमानी को पूरी करने के मैदान होते है!

मतलब साफ है कि तेरापंथ धर्म संघ के प्रथम पूज्य जिनसे तेरापंथ का श्री गणेश हुआ उनकी समाधि स्थल के इस  स्थान को भी धर्म की जगह पद,मनमानी,आम आदमी के सवाल पर आनाकानी की स्थिति बनाई गई और समाज के आम आदमी के सवालों की तड़फ  को नजरंदाज करने की वजह से श्रीमती पवन देवी बाफना को अदालत के समक्ष न्याय की गुहार के लिए जाना पड़ा।

लोग कहते है शुरुआती दौर में जब समाज को बरगलाने में सफल हो गए तब इन्होंने समझ लिया कि वे जो करेंगे वो सब उनके मुताबिक ही चलेगा पर अदालत की कारवाई के दौर के बाद इनको जब अपने पद से त्यागपत्र देकर जाना पड़ा तब समाज के आम लोग भी समझने लगे कि सिरियारी में श्रीमती पवन बाफना के साथ जो हुआ वो सोची समझी साजिश या समाज में सियासत की शतरंज का हिस्सा था पर समय कर्मो का पाई पाई हिसाब देता है और अब अपने किए का फल जब मिलने लगा है तब ऊपरी व्यवहार को भी सही रूप से निभा नहीं पा रहे है।

तेरापंथ समाज की सबसे बड़ी श्रद्धा व आस्था का केंद्र आचार्य भिक्षु की कृपा का प्रसाद है और अब समाज के लोग आपसी बातचीत में यही कह रहे है जिन लोगो ने आचार्य भिक्षु के समाधि स्थल पर समाज की सद्भावना व नैतिकता की जाजम को उठाकर सियासत की जाजम  बिछाने का अपराध किया अब उनको इसका हर्जाना तो भुगतना पड़ेगा फिर वो चाहे सम्मानीय अदालत का निर्णय से हो या फिर समाज के आम लोगों की जागरूकता से एक स्वर में उठी आवाज़ से हो....

क्योंकि लोगों का मानना है कि एक के बाद एक घटित होने वाले घटनाक्रम अब यह जता रहे है कि आचार्य भिक्षु के समाधि स्थल के साथ जो इन्होंने किया अब उसका फल पाने का वक्त आ रहा है।

श्रद्धा से अभिभूत कुछ लोग यह कहते है कि लगता है बाबा भिक्षु के चमत्कारों की कतार में एक और चमत्कार जुड़ने वाला है और इसको देखने,समझने के बाद भविष्य में कोई भी व्यक्ति सियासत की जाजम बिछाने की नापाक हरकत यहां नही कर सकेगा।

लोग यह कहते है कि एक वक्त यह भी था जब ये लोग तारीख पर तारीख लेने की तकनीक को अपनाकर पीड़ित पक्ष को थकाना चाहते थे और एक वक्त यह है कि अब ये खुद थके थके नजर आ रहे है!

यह थकावट या सामने नजर आ  रहे संभावित परिणाम की वजह से क्या ये भाषा,शब्दो का संयम खो रहे है!
जयपुर के प्रबुद्ध श्रावक श्री आलोक हीरावत के साथ घटी घटना क्या यही दर्शा रही है!
क्या कानूनी धमकी या असंयमित शब्दों का प्रयोग उचित है!

अब यह आरोप क्यों इन पर लगने लगा है कि संस्थान को चंद लोग अपनी प्राइवेट कंपनी की तरह इस्तेमाल कर रहे है!

क्या ये कुछ लोग अपने आपको समाज से बड़ा समझने लगे है!

इस  पूरे  घटनाक्रम में अध्यात्मिक पथिको की भूमिका कही संदेहास्पद तो नहीं अर्थात पर्दे के पीछे बड़ी भूमिका किनकी है!

अब समाज के लोग इस पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रहस्यों से क्या पर्दा उठाना नही  चाहते!

सुनिए आज के इस वीडियो में श्री आलोक हीरावत की अपनी जुबानी....अब क्या हो रही कहानी!
पुणे से श्री कमल कोठारी ने सिरियारी प्रकरण को शुरुआती दौर से बहुत नजदीक से देखा है....इसलिए आज हमने अपने इस साक्षात्कार के वीडियो में उनको भी जोड़ा है।

हम आने वाले दिनों में सिरियारी संस्थान के साधारण सदस्यो की आवाज आप तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे क्योंकि साधारण सदस्यो की ताकत व आवाज  इस समय असाधारण भूमिका अदा कर सकती है।

एक पत्रकार के रूप में हमने उस पक्ष से भी बात सिरियारी में करने की कोशिश की थी पर उनकी मंशा नहीं होने की वजह से हम उनकी बात को समाज के पटल पर नहीं रख सके।

आज हम फिर आमंत्रण दे रहे है कि अगर वो अपनी बात समाज के पटल पर हमारे माध्यम से रखना चाहे तो ह्रदय से स्वागत है।

अब इस वीडियो लिंक को क्लिक करके श्री आलोक हीरावत व श्री कमल कोठारी के अहसास सुनिए और सोचिए कि आपका मन इनकी भावनाओं का समर्थन कर रहा है या नहीं।

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