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*आदरणीय तेरापन्थ समाज एवम भिक्षु शासन के जागरूक श्रावक एवम श्राविका गण एवम नई पीढ़ी के जागरूक सदस्य गणो सादर जय जिनेन्द्र* 🙏🏾👏
*क्या मेरी व्यथा परम् पूज्य आचार्य प्रवर महाश्रमण जी तक कोई पहुंचा पाएंगे*
*मुझे यंहा तक भी ज्ञात है कि इन लोगो ने ऐसी व्यवस्था भी कर रखी है कि इस तरह के समाचार गुरुदेव के पास नहीं पहुंच सके कोई बात नही अभी बात पँहुच पाये या नहीँ लेकिन गुरुदेव भीलवाड़ा में चार माह विराजेंगे तब कैसे रोक पाएंगे*
*आदरणीय बन्धुओं में अपने कुच्छ वरिष्ठ सदस्यों के साथ स्वयम एक प्रोजेक्ट बना कर उड़ीसा स्थित केसिंगा में गुरु देव के समक्ष भवानी पाटन व केसिंगा के बीच गुरुदेव के समक्ष प्रोजेक्ट रखते हुए एवम तेरापंथ नगर योजना रखते हए भीलवाड़ा में चातुर्मास की अर्ज की गुरुदेव ने पूरे 38 मिनिट तक हमारी बात को सुना व समझा और हमारी यह भावना चेन्नई में 27 जुलाई को बड़े उमंग के साथ फलीभूत हो गयी जो उत्साह मेने भीलवाड़ा व मेवाड़ समाज का देखा मेने शायद कभी नही देखा इस चातुर्मास को ऐतिहासिक बनाने का सपना देखते हुए इस प्रवास व्यवस्था के संयोजक व तेरापंथ नगर के संयोजक की ढाल बन कर खड़ा रहा कि 260 वर्षो में पहली बार आचार्य का चातुर्मास होने जा रहा है जिसे हम वापस शायद अपने जीवनकाल में देख पाये या नही, बड़ी उमंगे लेकर आगे बढ़ रहे थे उस वक्त देश मे भारी चल रही आर्थिक मंदी में जंहा प्रोपर्टी का व्यवसाय बिल्कुल नही चल रहा था किसी के भी प्लॉट नही बिक रहे थे ऐसे दौर में भी अपने गुरुदेव के नाम पर लोगो ने आंख मीच कर 551 लोगों ने अग्रिम राषि भेज दी उसमे से 350 लोगो को प्लॉट मिल सके यह योजना नो लॉस नो प्रॉफिट पर बनाई गई थी लोगो से 800/₹ वर्ग फिट से रकम ली गयी और लोगो ने आंख मीच कर रकम दे दी, फिर इन्होंने उसे 1000/₹ कर दी तो लोगो ने वो भी स्वीकार कर ली अब शुरू होती है बदनीयती की इन्होंने इसे 1200/₹ कर दी और लागत से ज्यादा करोड़ो रूपये जमा कर लिए ओर यंहा से इनका नया इतिहास शुरू होता है यह कहते रहे कि बचे रुपये वापस लौटाएंगे भोली जनता विस्वास करती रही और गुरुदेव के नाम ओर उनसे जुड़ी भावना से बनी कॉलोनी के प्लॉटों के रेट दुगनी होते ही इन संयोजक जी एवम इनकी चौकड़ी की बदनीयती की शुरूआत चालू होती है सबसे पहले इन्ही संयोजक जी अपना प्लॉट को बेच कर करोड़ो रूपये का लाभ मिलते ही इन्होंने अपना एक पदाधिकारी जो कपड़े का काम करता है जो इस धंदे से जुड़ा हुआ भी नही है उसको प्लॉटों की लिस्ट थमा दी और उसके मार्फ़त कई प्लॉट बेच दिए और खरीद लिए जब इनको करोड़ो का फायदा दिखा ओर इनकी नियत में फीत्तूर आगया लोगों का 1200/₹ की रेट से लिया करोड़ो रूपये जमा होने से इनको न तो समाज की परवाह रही न चन्दे की यह खुली छाती ठोक कर कहते है कि हमको केंद्र से खुला आशीर्वाद मिला हुआ है कि किसी की परवाह करने की आवश्यकता नही, तो भोली जनता क्या कर लेगी यह सब क्या है गुरुदेव से मिलने पर ही पत्ता पड़ेगी*
*बन्धुओ यह सब कृत्य पहले 28 फरवरी को देखने को मिला यह महाशय मीटिंग से गायब हो गए और सभाध्यक्ष जनता को गुमराह करते रहे सुबह से शाम हो गयी और उस मीटिंग को अनिश्चितकालीन समय तक स्थगित कर दी फिर उस स्थगित मीटिंग को 21 मार्च को स्थान बदल कर तेरापंथ नगर में बने अधूरे भवन में क़ी वँहा पर संयोजक महोदय पधारे पर आगे क्या हुआ उन्होंने सम्पूर्ण सदन का अपमान करते हुए पूरे समाज को ठोकर मार दी क्योंकि उनका कहना था कि मुझे तो ऊपर केंद्र से निर्देश है कि किसी की परवाह करने की आवश्यकता नही है अब वो ही बता सकते है कि यह निर्देश कौन देता है,*
*में प्रातः स्मरणीय गुरुदेव से एवम तमाम साधु साध्वी जी से यह पूछना चाहता हु की किसी भी श्रावक आदि की किसी भी चीज को अपने उपयोग में लेते है तो शायद उनसे पूछते है कि क्या हम इसको काम मे ले सकते है लेकिन इन प्रवास व्यवस्था के अध्यक्ष जी ने तो तेरापंथ नगर के प्लाटधारियो के करोड़ो रूपये उनसे बिना पूछे बिना आज्ञा के गुरुदेव वआपके साथ साधु साध्वियों के विराजने के लिए करोड़ो रुपयों से आपके बनाये नियमो के विपरीत आदित्य विहार में अधबने ढांचे खरीद लिए जाते है जिसके सभी प्रमाण मेरे पास मौजूद है ऐसा करना सही है या नही इसका फैसला गुरुदेव ही करेंगे या गुरुदेव के बनाये नियमो में ऐसी गलियां निकाल सकते है इसका निवारण या प्रतुत्तर तो गुरुदेव ही देंगे यह भी बताएंगे कि केंद्र में कोन सी ज्यूरी है जो समाज से खिलवाड़ करने की ऐसे संयोजकों को छूट देती है*
*गुरुदेव की अहिंसायात्रा में सोहाद्र व समन्वय का नारा भी निहित है क्या यह जो हो रहा है उसके अनुकूल है हमतोश्रद्धा और आस्था से बन्धे हुए है उसकी पालना कर लेंगे पर आने वाली पीढ़ी का क्या होगा यह चिंतनीय प्रश्न है*
*अतिशीघ्र 2021 का गुरुदेव आचार्य प्रवर महाश्रमणजी का हमारी नगरी भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास होने जा रहा है आप सबके प्रयास और बड़े विश्वास से मिले चातुर्मास की गुरुदेव के लिए पलक पावड़े बिछाये हम बाट जो रहे है हमने बड़े बड़े सपने सजोये की हम सब अपना समस्त समर्पण कर गुरु आराधना एवम मेवाड़ की इस धरा पर सब अतिथियों का आदरपूर्वक सम्मान कर इस चातुर्मास को ऐतिहासिक बनाएंगे बड़े उत्साह से आप और हम सबने चेन्नई में गुरुमुख से उद्गोसित चातुर्मास से बड़ी उमंगों से लौटे ओर समय का इंतजार कर रहै है लेकिन विडंबना है की हमारे इन सपनों पर कुछ चन्द लोगों ने कब्जा कर लिया है इन लोगो ने इसे अपना निजी चातुर्मास समझ कर समाज को दर किनार कर दिया है, फिर भी समाज के भोले भाले लोग यह आस लगा कर बैठे रहे कि आज नहीं तो कल समाज को अवश्य जोड़ेंगे समय निकलता गया लोग इंतजार की घड़ियां गिनते रहे और समय अति निकट आगया इसका मूल कारण है कि समाज इनका विश्वास करता रहा और यह विश्वासघात करते रहे, इसमे कुछ दोष हमारा भी रहा कि हम आगे की सोचते रहे कि बिना समाज के सहयोग के कैसे यह चातुर्मास का कार्य कर सकेंगे लेकिन इन्होंने हमारा विश्वास तोड़ते हुए अपनी जागीरी बना दी, उसका सीधा कारण है तेरापंथ नगर जिसका करोड़ो रूपया समाज का इनके पास जमा है इन्होंने पहले धीमी गति से हेराफेरी शुरू की कुछ बड़े बड़े प्लॉटों को इन्होंने रख कर करोड़ो रूपये कमा लिए, समाज गम खाता रहा क्यो की एक तरफ गुरुदेव का चातुर्मास हम जैसे भी इनकी भावनाओं में बह गए, तो यह चौकड़ी अमानत में खमानत करने लगी हेराफेरी शुरू की फिर भोली भाली जनता चातुर्मास को लेकर चुप रहीऔर इनका साहस बढ़ता गया और तेरापंथ नगर के करोड़ो रूपये को इधर का उधर कर दिया गुरुदेव की अहिंसा यात्रा में पहला सूत्र सद्भावना सोहाद्र नैतिकता का है, जिसे इन्होंने दरकिनार कर दिया, और तो और अपने गुरु से भी झूठ बोलने से नही चुके, जब इनको मालूम हुआ कि अब किसी हालत में नए भवन में नहीँ विराजने वाले है तो तुरन्त इन्होंने पाला बदला और गुरुदेव की डायरी में यह लिखवा दिया कि हमारे समाज मे अलग अलग लोगो के निजी मकान है जो एक साथ है और तुरत फुरत में आदित्य नगर में जो 50 लाख में नही बिक रहे मकानों को 70, 70, लाख में अधबने15 मकान ले लिए और उस प्रत्येक भवन में 20, 20, लाख रुपये लगा दिए, अब इसमें कितनी हेरा फेरी है में इसलिए नही बता सकता कि अभी मेरे पास प्रमाण नही है, लेकिन यह सच है कि इसमें गफले है*
*क्योंकि इन्होंने गुरुदेव की डायरी में अलग अलग निजी मकान बताये थे लेकिन यह सब सफेद झूठ था उसमें सिर्फ 3 मकान निजी खरीदे बाकी सब तेरापंथ नगर के करोड़ो रूपये इन बचे 12 मकानों में बिना पूछे लगा दिया कौन सा अधिकार है इनको हेरा फेरी करने का जब कि इनकी रजिस्ट्री भी अभी 6 महीने पहले तेरापंथ नगर के नाम हुई जो कि गुरु के नियमो के विपरीत है मुझे अभी तक यह समझ मे नही आया कि जो लोग एक मिनिट भी अपना व्यवसाय सुना नही छोड़ते थे वो यंहा पूरा दिन कैसे लगा रहे है, आज तक इन्होंने किसी को यह नही बताया कि कितना इधर से उधर किया,*
*मैं हमेशा यह चाहूंगा कि गुरुदेव का चातुर्मास निर्विघ्न हो ऐतिहासिक हो*
*में आपको इतना विश्वास दिलाता हूं कि यह सब स्तिथि चाहे यह कितना भी जोर लगा ले गुरुदेव के समक्ष अवश्य लाऊंगा*
*समाज के लोगो की खून पसीने के करोड़ो रूपये जो तेरापंथ नगर में लगा है जिसकी पूरी जांच हो सके और दूध का दूध और पानी का पानी हो सके*
🙏🏾👏 *क्या भिक्षु बाबा तुमने इसीलिए मर्यादा बनायी थी कि भिक्षु के नाम पर गलियां निकालते रहना* *भिक्षु स्वामी तुम्हे वंदन सभी आचार्यो को वंदन*
* *प्रभाकर सिंह नैनावटी*
* *9414115966*
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