तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य श्री महाश्रमण जी से एक श्रावक के सवाल......

फर्स्ट न्यूज कार्यालय डेस्क:

जैन धर्म में साधु और श्रावक - श्राविका की यह कड़ी बहुत महत्वपूर्ण बताई गई है....यद्धपि आचार्य,संत धर्म का ज्ञान ,मार्गदर्शन देने वाले होते है पर श्रावक को साधु संत का अभिभावक समझा गया है।
एक सच्चे श्रावक की जिम्मेदारी जहां साधु संतो की सेवा करने की होती है वहीं उसको अपनी पैनी नजर भी रखनी पड़ती है कि साधु ,आचार्य अपनी मर्यादाओं का पालन सही रूप से कर रहे है या नहीं!
अगर कहीं श्रावक को विसंगति का आभास होता है तब उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वो उस विसंगति पर जो उसे किसी घटना को सुनने या समझने से लगी है तो उस पर वो संबद्ध साधु,आचार्य से सवाल पूछे।

सोशल मीडिया में तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य श्री महाश्रमण जी से सवालो की पोस्ट देखने को मिली.....चेन्नई के उद्योगपति  व सामाजिक रूप से सक्रिय श्री राजेंद्र हीरावत के ये सवाल कितने प्रासंगिक है .... क्या उनके सवालों का स्पष्टीकरण  समाधान मिलना चाहिए!
ये सवाल आप प्रबुद्ध पाठक वर्ग के लिए है।



सम्माननीय श्रावक समाज
                           सादर जय जिनेन्द्र,

तेरापंथ धर्मसंघ एक महान धर्मसंघ है, प्रातः स्मरणीय आचार्य  भिक्षु की सहेजी बगिया है जिसमें मर्यादा और अनुशासन ही सबसे पहले है । 
वर्तमान में इस धर्मसंघ को शायद किसी की नज़र लग गई है ,हरदिन कुछ न कुछ सुनने को मिलता है, इन फैल रही विसांगतियों के बारे में मैंने 23 - 11- 2020 को आचार्य महाश्रमण जी के नाम कुछ पत्र ,बहुत सी घटनाओं की जानकारी हेतु भिजवाए ,जिसमें मैंने आचार्यश्री से निवेदन किया कि इन सबका समाधान सार्वजनिक मंच से करें ताकि समाज की सभी शंकाओं का समाधान हो सके । 

लेकिन अफसोस उन पत्रों का कोई भी जवाब तेरापंथ के आचार्य की तरफ से नहीं दिया गया । हां इस पत्रों के बाद उन्होंने सार्वजनिक मंच से विश्रुतमुनि  ( *जिनका जिक्र पत्रों में विशेष तौर पर हुआ)* को सौ सौ साधुवाद,कई वरदान दिए गए व भविष्य में और भी जिम्मेदारियां संभालने को कहा गया । इससे साफ संकेत दिया गया कि हम तो ऐसे ही करते रहेंगे । मैंने दूसरा पत्र भी 9 - 2- 2021 को भेजा ,उसका भी कोई जवाब नहीं मिला ।
विशेष तौर पर मैंने 2 विषयों के बारे में जानकारियां मांगी लेकिन नहीं भेजी गई, इसके साथ दोनों विषय सलंग्न है ।

राजेन्द्र हिरावत चेन्नई 

06.02.2021
परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी ,
                   सादर वंदन 

दिनांक 23 -11-2020 को मैंने एक पत्र e mail द्वारा व प्रिंट कॉपी द्वारा जिसमें मेरी कुछ भावनाएं व संदेह था जिसको आप द्वारा समाधान हेतु आपके चरणों में प्रेषित की ।

मेरे द्वारा अनेक विषयों पर पत्र में विशेषकर प्रमुख 2 जिज्ञासाएं है - 
2. तेरापंथ धर्मसंघ के न्यायाधीश  से न्याय की उम्मीद
3. साध्वीवर्या पद की आवश्यकता क्यों ? 

वर्तमान में तेरापंथ धर्मसंघ में कई ऐसी घटनाएं हो रही है जो चर्चा का विषय बनी हुई है , जिसे सुनकर हृदय को आघात लगता है एवं मन बड़ा विचलित रहता है ,परन्तु उपरोक्त 2 घटनाओं से समाज की धार्मिक भावनाओं एवं विश्वास को ठेस पहुंची है ।

आचार्य भिक्षु की तेरापंथ धर्मसंघ रूपी बगिया जिसे उन्होनें बड़े कष्टों से संजोया,उसमें यदि मर्यादाओं का अतिक्रमण हो तो असहनीय होगा ।

आपको पिछले पत्रों में मैंने सविनय निवेदन किया था कि समाधान सार्वजनिक मंच पर हो ताकि पूरे समाज को स्पष्टीकरण मिल सके,

अफसोस उत्तर नदारद - मैने आचार्य भिक्षु को तो नहीं देखा लेकिन पढ़ा जरूर है कि वे छोटी से छोटी जिज्ञासाओं का समाधान करते थे यहां तक की आचार्य तुलसी भी श्रावकों की जिज्ञासाओं का समुचित समाधान करते थे ।

लेकिन आपके द्वारा तो समाधान करने की बजाय जिस विश्रुतमुनि के बारे में समाज में भी कई चर्चाएं है उनके बारे में प्रश्न किए जाने पर ,आप द्वारा उनको सार्वजनिक मंच पर पुरुस्कृत करने के साथ सौ- सौ साधुवाद और 50 वरदान से नवाजा गया व आगे कई जिम्मेदारियां सम्भालने को कहा गया,क्या आप समाज और श्रावकों की भावनाओं को ताक पर रखकर यह दिखाने की कोशिश में है कि आप जो मर्जी होगी करेंगे,समाज की भावनाओं से आपका कोई वास्ता नहीं । आपके इस रुख से हमें बहुत कष्ट हुआ है रातों की नींद हराम हो गई है,धार्मिक भावनाओं एवं विश्वास को आघात लगा है ।

मेरा उद्देश्य आद्य प्रवर्तक आचार्य भिक्षु के धर्मसंघ में कोई भी साधु - साध्वी एवम श्रावक - श्राविकाएं अपनी सीमाएं न लांघे ।

मैं और श्रावक समाज आपसे न्याय की आस में टकटकी लगाए इंतज़ार कर रहें हैं इस आशा के साथ कि आप भी आचार्य तुलसी की तरह श्रावक समाज को निराश नहीं करेंगे व अतिशीघ्र सभी शंकाओं का समाधान करेंगे ।

उपरोक्त दोनो जिज्ञासाए इस पत्र के साथ संलग्न है
2. तेरापंथ धर्मसंघ के न्यायाधीश  से न्याय की उम्मीद
3. साध्वीवर्या पद की आवश्यकता क्यों ?

ओम अह्रम, जय महावीर, जय भिक्षु
     


राजेन्द्र हिरावत, चेन्नई 
C. C. सुरेश चंद गोयल अध्यक्ष जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा कोलकाता

Rajendra Hirawat No. 10, Montieth Lane, Egmore Chennai 600008 E-mail: rkh@polypipes.in 


 23.11.2020
2. तेरापंथ धर्मसंघ के न्यायाधीश से न्याय की उम्मीद               

◼️गौहाटी चातुर्मास के समय चातुर्मास स्थल पर एक बहन के साथ घटी घटना,जिसमें आपश्री ने उसे न्याय देने के बदले कोर्ट ही लगा दिया ।

◼️गौहाटी चातुर्मास के समय एक संत विश्रुतमुनि के द्वारा गलत तरीके से एक बहन को छूने की  शिकायत सामने आई ।

◼️हमारे धर्मसंघ में हमेशा से यह प्रथा रही है कि यदि किसी साधु या साध्वी पर किसी के द्वारा झूठा या सच्चा लांछन लगता है तो साधु -साध्वी स्वयं दंड स्वीकारते है बात को खत्म कर देते हैं ।

◼️लेकिन बहुत ही अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि इस मामले में आपके प्रिय शिष्य विश्रुतमुनि ने इतनी चर्चा होने के बावज़ूद भी कोई दंड स्वीकार नहीं किया,उल्टा आपसे उस बहन को दंड दिलवा दिया जो बहुत ही दुखदपूर्ण है ।

◼️फोटोग्राफर बबलू और पवन के बीच फोन पर वार्तालाप का एक ऑडियो समाज के बीच आया जिससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा था कि विश्रुतमुनि से गलती हुई थी और आपश्री द्वारा उस गलती पर पर्दा डाल दिया गया । 

वो ऑडियो भी आपके संज्ञान में जरूर आया होगा और यदि नहीं आया तो अफसोस है कि आपसे छुपाया गया होगा । 

◼️उस बहन को ज़िल्लत कर ,चुप्पी साधने के लिए फिर से दवाब बनाया गया,फिर एक और शर्मसार कर देने वाला ऑडियो वायरल किया गया । जिसमें साफ जाहिर हो रहा था कि यह सब व्यवस्था समिति के ही एक व्यक्ति द्वारा रचा गया घिनौना अपराध था,जिसमें बहन को अप्रत्यक्ष रूप में धमकी थी कि चुप्पी साध कर घर बैठ जाए । इस बहन के जैसी घटनाएं इसी संत के द्वारा और भी कई बार की गई लेकिन बहनों ने अपने परिवार और धर्मसंघ की मान - मर्यादा के लिए मुंह नहीं खोला । इसी बात का फायदा यह संत बार - बार उठाता रहा । 

◼️अविश्वसनीय और अकल्पनीय है यह सब,सोच कर शर्म आती है कि आचार्य भिक्षु के उज्ज्वल तेरापंथ धर्मसंघ में ऐसी क्रिमिनल घटनाएं होने लगी । जो पंथ दूसरों को राह दिखाता है उसमें ऐसा व्याभिचार ? चिंतनीय और अफसोसजनक ....

◼️अफसोस है कि सच्चाई से अनभिज्ञ समाज उस संत की बजाय बहन को गलत समझने लगा, क्यों आज फिर सीता को अग्निपरीक्षा देने के लिए खड़ा किया गया ? वो भी धोबी के कहने पर ? .... आप समझ ही गए होंगे ।
आपश्री को इस विषय में विश्रुतमुनि को दंड स्वीकार करने के लिए बोलना चाहिए था,बल्कि आपने इस विषय में जो छानबीन की वो उचित नहीं थी । कालांतर में भी ऐसी घटनाएं हुई होगी लेकिन सूझबूझ से उनको समाज के बीच उजागर नहीं होने दिया,किसी बहन - बेटी की इज्जत नहीं उछाली गई ।

◼️आप तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य है आपका न्याय सदियों तक समाज का प्रेरणास्रोत रहेगा,लेकिन अफसोस इस बात का है कि आपश्री ने स्वयं काफी समय तक बाई से interrogation ( पूछताछ) की,जैसे थानेदार करता है, सबसे पहले तो आपने उसके परिवार को बुलाया,लेकिन पूछताछ के दौरान आपने उसके पति और बेटे को अंदर आने की अनुमति नहीं दी,उनको नहीं पता था कि आप बाई से पुलिस अफसर की तरह सवाल - जवाब कर उसे गलत साबित कर,संत की बजाय उसे ही दंड देंगे,यदि उन्हें ऐसा भान भी होता तो शायद वे भी मौजूद रहने की ज़िद करते और  सारी घटना के गवाह बनते, जबकि विश्रुतमुनि,दो साध्वियां एवं कनकप्रभाजी एवं साथ मे विडिओ ग्राफर मौजूद थे । क्या आपने इस घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग करने की इजाजत दी ? यदि नहीं तो
क्या आप पर इतना प्रेशर है कि आपके लिए उसे रोक पाना सम्भव नहीं ?


◼️ क्या ऐसे ओडियो बनाकर बड़े पदाधिकारियों से मिलकर धर्मसंघ को ब्लैकमेल कर अपनी मर्ज़ी से चलवा रहे हैं ? नहीं तो ऐसे घिनोने कार्य करने व एक स्त्री को बदनाम करने पर बबलू को धर्मसंघ से क्यों नहीं निकाला गया? 

◼️ क्या यह आडियो आपकी मर्जी से बना है या आपने दवाब में आकर बनवाया है?
इसका खुलासा आपको करना ही होगा । यह सब आपको शोभा नहीं देता ।

◼️चर्चा में है कि आपश्री ने पूछताछ के दौरान बाई पर एक के बाद एक बेतुके प्रश्नों की झड़ी लगा दी,प्रश्नों को करते करते आपश्री ने  शर्मसार करने वाला प्रश्न कर डाला,जो बेहद शर्मिंदा करने वाला है ऐसे प्रश्न तो अक्सर कोर्ट में मुज़रिम को बचाने के लिए वकील द्वारा किए जाते हैं ताकि शर्म के मारे शिकायत करने वाला शख्स चुपचाप घर बैठ जाए ।

◼️चर्चा में है कि आपश्री ने उस बहन से प्रश्न किया कि हल्का पकड़ा या जोर से पकड़ा और पकड़ा था तब तुम्हें कैसा महसूस हुआ ? मैं समाज के प्रतिनिधि के रूप में आपसे पूछता हूं कि 
आपश्री ने किस सोच के साथ ऐसे प्रश्न पूछे ?

◼️आपके प्रश्न के प्रत्युत्तर में उस बहन ने आपको कहा कि अच्छा होता आप यह प्रश्न मुझसे करने की बजाय उस संत से करते , उससे पूछते उसने किस सोच के साथ पकड़ा था और उसे कैसा महसूस हुआ । इस जवाब पर आपश्री ने फिर बहन से कहा कि उससे तो मैं पूछूंगा ही पर तुम्हीं बता दो .... ?  महाराज ऐसे प्रश्नों को सुनकर हम भी आपसे पूछने पर मजबूर हैं कि 
आपको ऐसे प्रश्न पूछकर कैसा महसूस हुआ ?
सूर्य के प्रकाश की तरह चहुं और आध्यात्मिक रोशनी फैलाने वाले तेरापंथ धर्मसंघ को शर्मसार कर दिया विक्षिप्त मानसिकता से किए प्रश्नों से ।
                                                                                                                                        
◼️आपश्री द्वारा किए गए ऐसे प्रश्न प्रमाणित करते हैं कि बहन को बदनाम करने के लिए जो गन्दा ऑडियो वायरल किया गया था वो हमारी व्यवस्था का ही कृत्य है ।
◼️आपके प्रश्नों से आघात हुई वह बहन प्रमुखाश्री जी के साथ उनके कमरे में गई और उनके चरणों में बैठकर रोने लगी,तब प्रमुखाश्री जी के मुंह से निकला कि भिक्षु स्वामी पर भरोसा रख , एकदिन तुम्हें अवश्य न्याय मिलेगा और पाप का घड़ा एकदिन अवश्य फूटेगा । 

◼️कुछ अंधभक्तों ने समाज द्वारा बहन पर दवाब बनवाया कि तुम्हारी दो बहनें धर्मसंघ में साध्वियां है उनके बारे में सोच और चुप्पी साध ले, कहीं ऐसा न हो कि उन्हें तड़ीपार का फरमान जारी हो जाए ।  

◼️इससे साफ जाहिर होता है कि हमारे धर्मसंघ में बहुत कुछ गड़बड़ चल रही है, मैनें खुद कई साधु - साध्वियों में भय का माहौल देखा है, सच जानते हुए भी वे बयां नहीं कर पाते, कहीं आपकी तरफ से तड़ीपार कर दिया गया तो ... ।

क्या आप और अन्य साधु - साध्वियां सत्य के मार्ग पर चलने वाले क्रांतिकारी भिक्षु के अनुयायी हैं ?
समाज इन सब प्रश्नों पर समाधान चाहता है जो आपको देना ही पड़ेगा ।

◼️चर्चा में आया कि उस बहन के साथ आपकी मौजूदगी और पूछताछ की कार्यवाही पूरे ढाई घण्टे चली और इस ढाई घण्टे की कार्यवाही को फोटोग्राफर ने  वीडियो रिकॉर्डिंग किया । इस ढाई घण्टे की कार्यवाही ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है,आप हमें यह अवगत कराएं की मुजरिमों की तरह उस बहन को आपकी अदालत के कठघरे में खड़ा कर आपश्री द्वारा जो प्रश्न पूछे गए,आपको कैसा महसूस हुआ ?


 ◼️दुख इस बात का है कि तेरापंथ के न्यायाधीश ने उस बहन को न्याय देने की बजाय उस संत का साथ दिया और उस संत को क्लीन चिट दे दी । यह कैसा न्याय है महाराज ? आपका यह न्याय तेरापंथ धर्मसंघ में सन्तो को उदंड बना देगा महाराज ।

◼️आपश्री हर विषय में श्रावकों से प्रमाण पूछते हैं,ताकि प्रमाण के अभाव में आपसे कुछ पूछा न जाए । आप प्रमाण के अभाव में विषयों की गंभीरता को भी देखना सुनना पसंद नहीं करते ,लेकिन हर जगह प्रमाण नहीं दिया जा सकता,जैसे कि उस बाई के विषय में,कहाँ से लाती वो प्रमाण? क्या भगवान है का प्रमाण आप दे सकते हैं ? नहीं ,वो हमारे विश्वास और आस्था पर निर्भर करता है, इस विषय में सबसे बड़े प्रमाण तेरापंथ धर्मसंघ के सर्वोच्च पद ,आचार्यश्री आप है ,दूसरा विश्रुतमुनि, साथ में दो साध्वियां एवं प्रमुखाश्री जी थे, यह बात आप और पूरा समाज जानता है । सत्य महाव्रत की एक बार फिर से शपथ लेते हुए समाज के सामने कोर्ट लगाकर समाज को सच्चाई से रूबरू कराइए महाराज । बाई को इंसाफ दीजिये ।

◼️आपने समुचित न्याय नहीं किया,फिर भी वो बहन आपसे न्याय के बदले वो ढाई घण्टे की रिकॉर्डिंग मांग रही है वो चाहती है कि रिकॉर्डिंग समाज के सामने रखकर उनके प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान कर सके । जितनी बार समाज उससे पूछता है तो उसको दर्द होता है वो रो पड़ती है । कितनी बार समाज के सवालों का जवाब दे वो ? वो यदि न्याय के रूप में रिकॉर्डिंग चाहती है तो क्यों नहीं आप उसे रिकॉर्डिंग देकर न्याय करते ?  कर्मों के बंधनों ने तीर्थंकरों को भी नहीं छोड़ा महाराज । दे दीजिए उसे वो वीडियो ।

◼️इस विषय पर आपश्री से विनती है कि आप समाज मंच पर में एक बार आपकी अदालत लगवाकर चर्चा कर दूध का दूध और पानी का पानी करने की कृपा करवाएं ।

◼️इस विषय पर सम्पूर्ण चर्चा होनी चाहिए,आपश्री द्वारा प्रकाश डाला जाए तो ही समाज में पूर्ण विराम लगेगा अन्यथा यह चर्चा बनी रहेगी ।

23.11.2020
3. वर्या पद की आवश्यकता क्यों ?

◼️हमारे धर्मसंघ में गुरु को सर्वेसर्वा माना गया है ,गुरु जरूरत पड़ने पर कुछ नया व नियमों में बदलाव कर सकते हैं , जिसका समाज अनुसरण करता है ।आपश्री ने भी  "वर्या" पद बनाकर कुछ नया किया लेकिम जनमानस में यह पद चर्चा का विषय बन गया,जो लोगों की सोच को एक अलग रुख प्रदान करती है,आपने एक छोटे से गांव में जब विश्रुतमुनि के जन्मदिन पर उनको बधाई के रूप में उनकी बहन सम्बुद्ध यशा जी को एक नया पद सृजन कर वर्या पद से अलंकृत किया ।

◼️चर्चा है कि आपने यह पद अपने चहेते संत की सलाह पर बनाया । जिसमें समस्त साध्वियों की भावनाओं एवं योग्यताओं को दरकिनार किया गया । समाज इस बात को जानना चाहता है कि साध्वी संबोधयशा जी के अलावा हमारे संघ मेँ विदुषी साध्वियां नहीं थी ? यदि थी तो फिर वर्या की पोस्ट के लिए संबोधप्रभा जी को ही क्यों चुना गया? 

◼️चेन्नई चातुर्मास में भी समाज में कई बातों की चर्चा है - जिसमें साध्वीवर्या जी का अमृत हॉस्पिटल में ऑपेरशन होना,आपका 5 बार वहां जाना । यदि विहार में रास्ते से गुजरते वक्त गुरु का मंगलपाठ सुनाना हो तो उचित है और मंगल है लेकिन बिना कारण गुरु का बार - बार साता पूछने अस्पताल जाना सामाजिक सोच को अलग दिशा प्रदान करता है । और उसके बाद जब साध्वीवर्या जी स्वस्थ होकर चातुर्मास स्थल पहुंची तो उनके आगमन पर आपश्री का 
पाट छोड़कर उनको रिसीव करने मुख्य द्वार तक जाना लोगों में चर्चित विषय है जिसका जवाब आपको देना चाहिए ।

◼️चर्चा है कि आपश्री जब कोयम्बटूर में विराजमान थे तो एक रोज साध्वीवर्या जी आपके सामने से गुजर रही थी,आपने उनसे पूछा - कहाँ जा रहे हैं ? जवाब में उन्होंने बताया निवास स्थल (जो वहां से कुछ ही दूरी पर था)। जैसे ही वर्याजी जाने लगे आपने एक संत द्वारा कहलवाया कि रुको मैँ छोड़ने आता हूं, आप फिर उन्हें छोड़ने उनके निवास स्थल तक गए,जहां वर्या जी के अनुरोध पर आपने सभी साध्वियों को दर्शन और सेवा का लाभ दिया,यह अच्छी बात थी । परंतु प्रश्न यह उठता है कि आपके नियमोंनुसार साध्वियों के निवास स्थल पर कोई भी संत नहीं जा सकता,फिर यह बात आप पर लागू क्यों नहीं ? हमें तो प्रतिदिन यही सुनने को मिलता है कि "निज पर शासन फिर अनुशासन”। क्या यह नारा सिर्फ श्रावकों के लिए बनाया गया है ? यह आप पर भी लागू होता है ।
जब आप वापस आने लगे तो साध्वीवर्या जी आपको छोड़ने आई, यह उनका कर्तव्य बनता था,इसलिए वे आपको छोड़ने आई । लेकिन  चर्चा इस बात पर गर्म है कि जब वे वापस आपके स्थान तक छोड़कर जाने लगी तो आपश्री ने कहा कि मेरी छोड़ने की बात थी,और आप फिर उनको छोड़ने उनके निवास स्थान तक गए । यदि यह सब बातें सच है तो समाज की सोच कुछ अलग इशारा कर रही है । आप इस पर सच के साथ प्रकाश डाले भिक्षु स्वामी का अनुयायी होने के नाते एवं एक तेरापंथी श्रावक होने के नाते मेरा आपसे अनुरोध है कि यह बात कितनी सच है जवाब जरूर दें ।

◼️चेन्नई चातुर्मास के दौरान चातुर्मास स्थल पर मेरा आना जाना कम ही था लेकिन मैंने भी कई बार गौर किया कि आपश्री साध्वीवर्या को विशेष सेवाएं प्रदान करते थे । ऐसा ही बेंगलोर जब मैं दर्शन करने गया था तब मैंने अचानक देखा कि जब आपके सामने से  सभी साधु - साध्वियां उठकर चले गए तब भी वर्या जी आपसे कुछ ही दूरी पर बैठी थी, जब मैंने किसी को पूछा तो मुझे बताया गया कि साध्वी वर्या को आप द्वारा पढ़ाया जाएगा ।

◼️ पढ़ाने के लिए हमारे धर्मसंघ में विदुषी साध्वियों की कमी है क्या?
यह सब कर आप समाज में क्या संदेश देना चाहते हैं? 
कि आप जो कुछ कर रहे हैं वो सही है?
यह सारी घटनाएं कुछ कहती है .. 

◼️मेरा तात्पर्य आपको संदेह के घेरे में रखना कदापि नहीं ,लेकिन आपश्री की ऐसी कार्यशैली जब समाज में चर्चा का विषय बनती है तो दुख होता है । तेरापंथ धर्मसंघ के प्रति कोई भी गलत चर्चा  समस्त तेरापंथियों  की प्रतिष्ठा पर असर डालती है । दूसरे जैन सम्प्रदाय में इस प्रकार की कार्यशैली चर्चा में होने के कारण समाज चिंतित है । हमारे समाज के जागरूक श्रावकों का मत है कि आपश्री किसी भी बात का समाधान नहीं कर रहे ।

◼️गौहाटी में बहन के साथ विश्रुतमुनि द्वारा दुर्व्यवहार एवं आपश्री का उसी बहन के साथ कोतवाली प्रश्नावलियाँ करना, अपने किसी चहेते संत को खुश करने के लिए साध्वी वर्या के पद का निर्माण एवं उनके प्रति विशेष अनुराग ,समाज को कुछ सोचने पर मजबूर कर रहा ।

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