क्या भीलवाड़ा तेरापंथ समाज में आक्रोश है!

सोशल मीडिया से प्राप्त यह पत्र तेरापंथ सभा भीलवाड़ा के पूर्व अध्यक्ष का क्या यह नहीं बताता कि समाज के पटल  पर राजनीति का किस रूप में समावेश हुआ है!

क्या भीलवाड़ा तेरापंथ समाज के आम सदस्य के मन में सवाल उठ रहे है.....आक्रोश पनप रहा है!

हमने इस पत्र को सवाल के साथ आपके सामने रखा है बहुत जल्दी  हम इस पत्र के लेखक श्री शेलंद्र बोरदिया के साथ सीधी बात करके आपके सामने रखेंगे।

हम उस पक्ष तक भी जायेंगे जिन पर सवाल उठ रहे है अगर वो अपना स्पष्टीकरण देना चाहेंगे तब उनकी बात भी आप  तक पहुंचाई जाएगी।

हम भीलवाड़ा तेरापंथ समाज के आम व्यक्ति के मन की बात भी आप तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।
आप पहले इस पत्र में भावनाओं का ज्वार व सवालों के उबाल की आंच को महसूस कीजिए....
संजय सनम(फर्स्ट न्यूज)

तेरापंथ धर्मसंघ के सम्माननीय श्रद्धाशील श्रावकगण एवं तेरापंथी सभा , भीलवाड़ा के आदरणीय सदस्यगण,
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सादर जय जिनेन्द्र । आज दि. 28-2-21 को महाप्रज्ञ भवन आज़ाद नगर में तेरापंथी सभा की साधारण सभा की बैठक , जिसमें आगामी दो वर्षों के लिये अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया भी सम्पन्न होनी थी , में वही हुआ जिसकी आशंका समाज के कई प्रबुद्ध जनों ने मुझे पहले ही जता दी थी । 
सभा के वर्तमान पदाधिकारियों ने सुनियोजित साज़िश के तहत   निर्वाचन न करा पदों पर बने रहने की मंशा से सभा की योजना तेरापंथ नगर के सामान्य मुद्दे पर माननीय सदस्यों के स्पष्टीकरण चाहने पर लम्बे समय तक गोलमाल जवाब दे, सदन को गुमराह किया और तेरापंथ नगर के हिसाब सहित सभा के करोड़ों रूपयों के आय व्यय का वांछित ब्यौरा न दे माननीय सदस्यों का अमूल्य समय बरबाद किया । 
इस दौरान सभा के माननीय मंत्री जी, जो विगत तीन वर्षों से सभा के हर काम व ज़िम्मेदारी से सीधे जुड़े रहे ,मंच छोड़ नीचे आ गये तो एक माननीय उपाध्यक्ष जो तेरापंथ नगर योजना से भी सभा द्वारा मनोनीत संयोजक के साथ  जुड़े हुए है , तो सदस्यों का आक्रोश देख ग़ायब हो गये।सभा के माननीय अध्यक्ष जी का साधारण सभा में मनमानी भरा व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा किन्तु उन्होंने वही किया जो उन्हें करना था और बाद में बिना हिसाब किताब दिये, बिना निर्वाचन प्रक्रिया सम्पन्न कराये साधारण सभा की बैठक अनिश्चित काल के लिये स्थगित कर बैठक स्थल छोड़ रवाना हो गये ।

जिस समाज ने परम् पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी के चतुर्मास को ध्यान में रख कर सभा के पदाधिकारियों व सभा द्वारा मनोनीत तेरापंथ नगर योजना के संयोजक को करोड़ों रूपये की राशि सौंप दी , उन द्वारा माननीय सदस्यों द्वारा आय व्यय की सामान्य जानकारी चाहने पर एक नम्बर दो नम्बर की बात कह, तेरापंथ नगर संयोजक द्वारा हिसाब न देने की बात कह मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की गई, जिसे सभा में मौजूद सभी जागरूक सदस्यों ने असफल कर दिया। 
सभा की योजना तेरापंथ नगर के संयोजक को बैठक में बुलाने की माँग व माननीय सदस्यों द्वारा चाही जानकारी का स्पष्ट जवाब हाथो हाथ न देकर चार घंटे से भी अधिक का समय निकाल , अपने तानाशाही भरे व्यवहार का निर्लज्ज प्रदर्शन करने के बाद यह स्वीकार किया गया कि तेरापंथ नगर की योजना सभा की ही योजना है और सारा हिसाब योजना प्रभारी से प्राप्त कर सभा के हिसाब के साथ जोड़ कर प्रस्तुत  किया जायेगा और इस योजना से होने वाला सारा मुनाफ़ा सभा में जमा कराया जायेगा । 

यह सुनियोजित साज़िश का ही अंग था , ताकि बैठक का सारा समय इसी तरह ख़राब कर निर्वाचन न होने देना था तेरापंथ नगर को लेकर सभा की दि. 14 जनवरी 2018 की साधारण सभा की बैठक की कार्यवाही पुस्तिका में जब सब कुछ स्पष्ट रूप से लिखा हुआ था तो तो उसकी जानकारी देने में चार घंटे का समय बरबाद करना क्या दर्शाता है ?

विचारणीय यह भी है कि सन् 2018 में सभा की तेरापंथ नगर योजना का हिसाब जो प्रति वर्ष सभा के अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष को लेना था , क्यों नहीं लिया गया । 

सभा द्वारा मनोनीत प्रभारी द्वारा हिसाब नहीं दिया गया तो इन पदाधिकारियों ने क्यों नहीं कार्यवाही की और क्यों नहीं समाज को अवगत कराया ।भीलवाड़ा तेरापंथ के इतिहास में आज जो कुछ भी हुआ वह किसी भी दृष्टि से अच्छा नहीं हुआ । 

इन पदाधिकारियों के पद पर बने रहना था तो क्यों साधारण सभा की बैठक और निर्वाचन करवाने का नाटक किया गया । साधारण सभा की बैठक अनिश्चितकाल के लिये स्थगित करने का मतलब अब जब ये पदाधिकारी चाहेंगे तब ही बैठक होगी और जब ये चाहेंगे तब ही निर्वाचन होंगे ।

अब जब पूज्य प्रवर का भीलवाड़ा में चतुर्मास प्रारम्भ होने में मात्र साढ़े चार माह का समय बचा है तब समाज में चली आ रही परस्पर सहयोग, सौहार्द व समन्वय की भावना पर वर्तमान पदाधिकारियों की मनमानी व ग़लत कार्यप्रणाली से गंभीर आघात लगा है ।

एक ओर जहाँ महिला मण्डल और युवक परिषद पूज्य प्रवर के चतुर्मास को लेकर उत्साह के साथ अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे है वहीं सभा के पदाधिकारी अपनी अकर्मण्यता से चतुर्मास को लेकर अपनी ग़ैर ज़िम्मेदारी का प्रदर्शन कर रहे है ।

सर्वाधिक चिन्ता की बात तो यह है कि पूज्य प्रवर द्वारा भीलवाड़ा में चतुर्मास करने की घोषणा के बाद पहली बार हो रही समाज की इस विशाल बैठक में भीलवाड़ा में ही मौजूद होने के बावजूद प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष का न आना समाज की उपेक्षा का सूचक है जो उनके अहंकार और ग़ैर ज़िम्मेदार रवैये को दर्शाता है । ( शेष कल )
सादर,
शैलेन्द्र बोरदिया - पूर्व अध्यक्ष
श्री जैन श्वे.तेरापंथी सभा भीलवाड़ा                          
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