ममता चक्रव्यूह में घिरी हुई सी क्यों है!
फर्स्ट न्यूज:संजय सनम
(साभार फोटो)
बंगाल में अब सियासी पारा गरम दर गरम हो रहा है मुख्य रूप से प्रमुख विपक्षी दल भाजपा व तृणमूल के बीच जली कटी इस आंच को हर दिन गर्म कर रही है पर ममता बनर्जी के लिए छोटे दलों ने भी परेशानी खड़ी कर दी है।जातिगत आधार पर आदिवासी वोटो पर अब नजर सोरेन गुट ने लगा दी है वहीं ममता के मुस्लिम वोट बैंक पर सेंधमारी के लिए ओवैसी आ रहे है जिन्होंने बिहार में राजद का गणित बिगाड दिया था। बंगाल में 30फीसदी मुस्लिम व लगभग इतने ही अनुसूचित जाति व जनजाति के समीकरणों की गणित पर छोटे क्षेत्रीय दलो का प्रभाव पड़ने व हिंदीभाषी वोट बैंक लगभग इकतरफा भाजपा की झोली में जाने की चिंता ममता को परेशानी का सबब बन सकती है और रही सही कसर वाम व कांग्रेस का गठबन्धन भी ममता के लिए वोट कटवा बन सकता है।
ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की शह पर बांग्लाभाषी मुस्लिमों पर प्रभाव रखने वाले फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) नामक पार्टी बनाने के साथ चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। ऐसे में ओवैसी-सिद्दीकी की जोड़ी से किसे नुकसान और किसे फायदा होगा, यह बड़ा सवाल है।
कुल मिलाकर ममता के लिए ये क्षेत्रीय दल बिल्कुल ऐसे है जिनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है पर उनके होने से ममता को बहुत कुछ खोना पड सकता है इस लिहाज से ममता की स्थिति चक्रव्यूह में फस जाने वाली सी लग रही है।अब देखना यह है कि इन हालातो को भाजपा किस हद तक भुना सकती है या भाजपा की आंतरिक कलह ममता के लिए संजीवनी बन सकती है।
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