जैन धर्म में साधु मार्ग पर आगम क्या कहता है!

जैन धर्म में साधु मार्ग पर आज के दौर की विसंगतियों की पोल खोलता आगम सम्मत विवेचन....

जैन धर्म में साधु यात्रा नहीं विहार करते है!
आजकल यात्राओं के नाम से संतो ,आचार्य के विहार को क्यों महिमामंडित कर रहे हम!
जैन धर्म में उग्र विहार,तेज रफ्तार से विहार क्यों आगम सम्मत नहीं है!
जैन धर्म में राष्ट्र संत  व राजकीय अतिथि का अलंकार किसी भी साधु व आचार्य के लिए आगम सम्मत क्यों नहीं है!
क्या संतों व आचार्य के विहार में श्रावकों के लिए सुविधा का मार्ग प्रशस्त करना उचित है!
क्या श्रावक इसमें पाप के भागी बन रहे है!
खास साक्षात्कार जिसमे आज के संदर्भ में अध्यात्मिक क्षेत्र में दिख रही विसंगतियों पर आगम सम्मत विवेचन कर रहे है  श्री कैलाश राज  सिंघवी.....
https://youtu.be/yvNJd2u4QAM इस लिंक को क्लिक कीजिए....
इस साक्षात्कार को पूरा सुनिए तभी समझ  पाएंगे
आने वाले दिनों में   प्रबुद्ध वर्ग से भी इन विषयों पर साक्षात्कार लिए जाएंगे।
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