भावना की जोत तू जगा कर तो देख....एक प्रेरक संदेश

भगवान संत महात्माओं को ही नहीं मिलते बल्कि साधारण से साधारण व्यक्ति को भी मिल जाते है और कई बार तो बड़े बड़े तपस्वी भी तपस्यारत वर्षो से रह कर भी भगवान के दर्शन से वंचित रह पाते है और साधारण से व्यक्ति को उसकी सहज भक्ति और अटूट विश्वास की बदौलत त्वरित मिल जाते है।
सोशल मीडिया में व्हाट्स एप से श्री विष्णु गुप्ता जी के माध्यम से आया एक प्रेरक संदेश जो भगवान के प्रति मन की सच्ची जोत का संदेश देता है...अगर वो लग जाती है तो मन में भक्ति के आंतरिक दिए जल जाते है....इसी संदेश को आवाज दे कर आपके पास तक पहुंचाने की मेरी कोशिश......सुनिए यह you tube video.... सिर्फ 5मिनट दीजिए और भगवान को पाने का अटूट विश्वास,मन की जोत को समझिए।

नोट...यह वीडियो इस घटना में उल्लेखित कुए में लटकने की प्रेरणा नहीं देता बल्कि मन से भगवान के प्रति विश्वास की प्रेरणा देता है।
साभार:श्री विष्णु गुप्ता
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संजय सनम
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🌹🌹तू भावना की जोत को जगाके देखले l बोलती है मूर्ति बुलाके देख ले ll ये कौनसी भाषा मे बोले ज्ञान भी तो हो l बात इसकी सुनने को तेरे कान भी तो हो🌹🌹एक सन्त कुएं पर स्वयं को लटका कर ध्यान किया करते थे और कहता थे, जिस दिन यह जंजीर टूटेगी, मुझे ईश्वर के दर्शन हो जाएंगे। 
उनसे पूरा गांव प्रभावित था। सभी उनकी भक्ति, उनके तप की तारीफें करते थे। एक व्यक्ति के मन में इच्छा हुई कि मैं भी ईश्वर दर्शन करूँ।
वह रस्सी से पैर को बांधकर कुएं में लटक गया और कृष्ण जी का ध्यान करने लगा। .
जब रस्सी टूटी, उसे कृष्ण ने अपनी गोद में उठा लिया और दर्शन भी दिए। 
तब व्यक्ति ने पूछा- आप इतनी जल्दी मुझे दर्शन देने क्यों चले आये, जबकि वे संत महात्मा तो वर्षों से आपको बुला रहे हैं।
कृष्ण बोले, वो कुएं पर लटकते जरूर हैं, किंतु पैर को लोहे की जंजीर से बांधकर। उसे मुझसे ज्यादा जंजीर पर विश्वास है।
तुझे खुद से ज्यादा मुझ पर विश्वास है, इसलिए मैं आ गया। 
आवश्यक नहीं कि दर्शन में वर्षों लगें। आपकी शरणागति आपको ईश्वर के दर्शन अवश्य कराएगी और शीघ्र ही कराएगी। 
प्रश्न केवल इतना है आप उन पर कितना विश्वास करते हैं।
ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में स्थित हैं। शरीररूपी यंत्र पर चढ़े हुए सब प्राणियों को, वे अपनी माया से घुमाते रहते हैं, इसे सदैव याद रखें और बुद्धि में धारण करने के साथ व्यवहार में भी धारण करें।🙏🌹जय बाबा बासुकीनाथ 🌹🙏

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