यहां पाप करके कोई साफ निकल नहीं सकता...(सिरियारी विशेष)

सिरियारी में श्री सुरेंद्र सुराणा जी के त्यागपत्र से लेकर अब तक का जो माहौल दिखा है उसमें अमर्यादित,अनैतिकता के आरोप लगे है तथा मामला न्यायालय के विचाराधीन है।

श्रीमती पवन देवी बाफना व उनके पति श्री हरकचंद बाफना जी का जीवट संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर आ गया लगता है।

समय अवधि से पहले त्यागपत्र इस बात का घोतक है कि संभावनाओं के आकाश से इनको इस बात का डर लगने लगा है कि अगर अभी त्याग पत्र हमने नही दिया तो कही कोई निर्णय हमे बेइज्जत न कर दे....शायद उस अज्ञात आशंका की हलचल ने उनको त्यागपत्र देने को मजबूर किया लगता है।

न्याय के डंडा उठे उससे पहले ही छोड़ कर चल दिया जाए.... इतिहास में इनको ही शायद रण छोड़ कहा जाता होगा।

इनको सुकून है कि बेआबरू नही हुए.....पर इन्हें नही मालूम जमाना सब समझता है।

अगर कहा जाए तो माननीय न्यायालय के अदालती निर्णय से पहले यह श्री व श्रीमती बाफना की नैतिक जीत हो गयी है।

समाज के लोग समयकाल से पहले दिए हुए त्यागपत्र व वर्तमान की स्थितियों को भली भांति समझते है...

लोग बोलते नही इसका मतलब यह कतई नही कि वे समझते भी नहीं है।

यह सम्पूर्ण घटनाक्रम अन्याय पर न्याय की जीत व दंभ पर संघर्ष की जीत है।

आध्यात्मिक परिसर को सियासती अखाड़ा बनाने वालों की यह हार नही तो और क्या है!

समाज के हित मे  अपनी आवाज बुलंद करने वाले व भारतीय संविधान के अंतर्गत अपना अधिकार मांगने वाली श्रीमती पवन बाफना का यह विजयी शंखनाद नहीं तो क्या है!

भागने के अंदाज में दिया गया यह त्यागपत्र रौशनी की किरण दे रहा है....इस रोशनी का अभिनंदन कीजिये क्योकि अब अंधेरा छंटता लग रहा है....भोर होती दिख रही है।

आचार्य भिक्षु जी के इस परिसर का कोना कोना ऊर्जित है...यहां से पाप करके कोई साफ निकल नही सकता ।

इस आध्यात्मिक परिसर को नमन-वंदन।

:संजय सनम
संपादक-फर्स्ट न्यूज़
(72780-27381)






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