मजबूरी का दोहन नही तो फिर क्या है!

हम अपना दर्द बेचने आये थे पर ये लोग तो दौलत के खरीददार निकले...

लोगों की तमाम समस्याओं को सुलझाने के दावे करने वाले अधिकांश दरबारों के नाम बड़े व दर्शन छोटे जैसी कहावत लगनी लगी है।
देश विदेश से लोग इनकी शक्तियों पर भरोसा करके आते है और कुछ अपवादों को छोड़ कर अधिकांश लूट कर जाते है...हजारों--लाखों तक रुपये लोग चुका देते है पर समस्या उनकी वैसी ही बनी रहती है।
इस पोस्ट में कुछ वीडियो की लिंक आपको इस कड़वी हकीकत से मिलाएगी।--
अमेरिका से श्रीमती संतोष जी के दर्द भरे अनुभव को सुनिये....इस लिंक को क्लिक कीजिए..

नागपुर से श्री चौधरी  के अहसास कमजोर मानसिकता को जगाने वाले लग रहे है...आपकी कमजोर मानसिक स्थिति की वजह से ही लोग आपको छल रहे है---

इस लिंक पर क्लिक करके कड़वी हकीकत सुनिये...

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