आर्थिक गति बेहद धीमी हो गई है...दूसरे शब्दों में अर्थ शास्त्र ही डगमगा गया है...एक एक पैसे को बचाने की कोशिश चल रही है तभी सांसद निधि के 2 वर्ष की जोड़ भी सरकारी खजाने में लेनी पड़ी इसके अतिरिक्त 30 प्रतिशत का वेतन कटौती भी हुआ ।यह मार सरकारी कर्मचारियों पर भी व पेंशन पाने वालों पर भी पड़ी है पर इस आपदा की घड़ी में सबकी एक जुटता व सहयोग भी आवश्यक था।
इस विकट समय मे क्या संसद भवन की नई ईमारत 20 हजार करोड़ के खर्च पर बनानी जरूरी है!
इस सवाल को विवेचित करने की कोशिश इस वीडियो में की गई है...अगर आपकी सहमति बने तो वीडियो को लाइक व शेयर जरूर कीजियेगा।
नीचे लिंक पर क्लिक करते ही आप यु ट्यूब के इस वीडियो से जुड़ जाएंगे ...कृपया पूरा सुनियेगा क्योकि देश के लिए यह एक गंभीर सवाल है।
https://youtu.be/BKYTO8oTOJo
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