कोरोना के जिम्मेदार कौन!

:-संजय सनम(फर्स्ट न्यूज़)

कोरोना का गुनाहगार चीन

अति सूक्ष्म एक वायरस ने पूरी दुनियां को हिला दिया है....अपने आपको सुपर पावर कहने वाले उच्च टेक्नोलॉजी युक्त देश अपने आपको असहाय महसूस कर रहे है।संसार थम सा गया लगता है..संक्रमण के भय से लोग अपने अपने घरों में कैद हो गए है....अभी तक इसका निदान नहीं निकला है बस प्रयोग दर प्रयोग हो रहे है....यह वायरस कब तक अपना तांडव मचाता रहेगा कोई नहीं जानता बस अनुमान जरूर लग रहे है।
अब सवाल यह है कि इस आफत की जड़ कौन है?

 यह आया चीन से है तो जड़ भी चीन ही होगा पर चीन में इस वायरस की उपज क्या चीन की जानबूझ कर इस वायरस को बना कर दुनियां  विशेषकर अपने प्रतिद्वंदी देशों की प्रगति को खत्म करने की रही है! 
इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि चीन विश्वास के काबिल रहा ही कब है!  चीन में वायरस संक्रमण के समय विश्व को न चेता कर अंदर ही अंदर इसको रखने की साजिश भी इस आशंका को बल देती है..अमेरिका समेत विश्व के दूसरे देश चीन पर इसका आरोप भी लगा रहे है।
जर्मनी ने तो मुकदमा तक ठोक दिया है।इसका अर्थ अगर यह साजिश ही है तो फिर युद्ध का दूसरा रूप  भी हो ही गया और तब फिर मानवता को तबाह करने के लिए परमाणु बमों की आवश्यकता नहीं अब तो ये वायरस परमाणु युद्ध से भी खतरनाक हो जायेगे।
अब दूसरे रूपक पर भी चले अगर यह साजिश नही है तब भी चीन ही सबसे अधिक दोषी है क्योंकि  पशु,पक्षी ,व अन्य जीव जंतुओं को जिस बर्बरता से मार कर उनका बाजार लगाया जाता है अर्थात कुदरत के बनाये संतुलन के नियम को जिस तरह तोड़ा जाता है यह उस वातावरण की देन है।
चीन के खानपान के इस व्यवहार को देख कर यह आशंका भी हो सकती है कि ये लोग इतने बेदर्द है कि आदमी को भी काट कर खाने में हिचक नही करेंगे।
अब विश्व समुदाय को मांसाहार की भी नियमावली अंतराष्ट्रीय स्तर पर बनानी होगी अन्यथा  वायरस के हमलों से दुनिया को बचा नही पाएंगे।
एक की वेक्सीन निकलोगे तो दूसरा ईजाद हो जाएगा जब तक उसकी निकलेगी तब तक लाखों लोग मौत की नींद सो चुके होंगे।
विश्व समुदाय को चीन के अंदर घुस कर  जांच पड़ताल करने की कोशिश करनी होगी।विश्व स्वास्थ्य संगठन की मिली भगत का भी आरोप लग चुका है।

चीन के सामानों का दुनियां से बायकाट होना चाहिए।हमको सस्ती दर का लालच छोड़ना होगा क्योंकि  यह लालच दुनियां को अपंग कर रहा है।चीन पर कड़े प्रतिबंध लगने चाहिए और अगर वो दादागिरी दिखाए तो विश्व की महाशक्तियों को युद्ध से भी नही रुकना चाहिए क्योंकि  किस्तों में हमेशा के लिए सर दर्द मोल लेने से अच्छा है एक बार इस आफत को ही खत्म कर दिया जाए।

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