यह पुण्य कमाने का वक्त...मजबूरी का लाभ न उठाएं।

 यह पुण्य कमाने का समय है।
कोरोना वायरस से समूची दुनियां संघर्ष कर रही है..लॉक डाउन की स्थिति ने उन लोगों की जिंदगी बहुत जटिल कर दी है जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है..मास्क, सेनिटाइजर तो दूर की बात उनके पास अनाज,दूध से घर के भरण पोषण की भी व्यवस्था नहीं है।
एक तरफ डॉक्टर्स कोराना संक्रमण से पीड़ितों को बचा रहे है तो दूसरी तरफ भूख से कोई जिंदगी न जाये यह बचाव भी उतना जरूरी है...
यहां यह पुण्य कमाने का वक्त है जो आर्थिक रूप से समृद्ध है उनको आज इस विकट परिस्थिति में अपनी तिजोरियों को खोल कर उन लोगों तक भरण पोषण की  आवश्यक सामग्री पहुंचाने का समय है।
बड़ी संख्या में सेवाभावी लोग इस पुण्य कार्य मे जुट चुके है .. आडंबर,दिखावे में खर्च करने की जगह वो धन अगर मानवता के काम आए तो फिर यह समृद्धि वरदान होती है और जो धन समय पर सहयोग न करे वो समृद्धि भी अभिशाप होती है।
आवश्यकता है कि हम सब अपनी अपनी स्थिति के अनुसार कुछ न कुछ अपने परिवेश,आसपास औऱ सबसे पहले अपने घर,ऑफिस,ब्लॉक,काम्प्लेक्स में कार्य करने वालों के लिए  भरण पोषण की सुरक्षा निश्चित करें उसके बाद अपने परिवेश के आसपास तक आगे बढ़े । एक एक हाथ बढ़ाते ही एक ऐसी सेवा की श्रृंखला बन जाएगी जिससे मानवता को बचाया जाना बहुत आसान हो जाएगा।
प्राइवेट नर्सिंग होम चलाने वाले प्रबंधन व  प्रबंधक डॉक्टर्स के सामने अपने सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूरी है अगर हम अपने आस पड़ोस के ऐसे सेवाभावी प्रबंधक डॉक्टर्स  के लिए अर्थ की शक्ति प्रदान कर दे तब इस जटिल समय वे मानवता के लिए औऱ अधिक वरदान बन सकते है।
इसके साथ साथ  धार्मिक आडंबर की जगह अगर आध्यात्मिक मन्त्रों का जाप हर घर से अपनी अपनी आस्था के अनुरूप होने लग जाये तब आध्यात्मिक  शक्ति का चमत्कार फिर क्या नही कर सकता!
एक खास निवेदन औऱ हमारे सेवाभावी योद्धा जब अपने अपने क्षेत्रों में मानवता को बचाने लगे है तब उनके परिवार का ख्याल क्या हम सबकी जिम्मेदारी नही बनती!
सरकार के दिशा निर्देशों की अनुपालना करते हुए हम अपने अपने क्षेत्र से सबके कल्याण के लिए जितना हो सकता है उतना दायित्व अपना धर्म समझते हुए निभाये।
भगवान के मंदिरों के दरवाजे बंद हो गए है तब क्या उन मन्दिर के पुजारियों के लिए हमारी जिम्मेदारी नही बनती!
अपने आसपड़ोस के धार्मिक स्थानों पर अपना दायित्व निभाने वालो तक पहुंचाइये अपनी सेवा-अनुदान।
कुछ लोग इस जटिल परिस्थिति का लाभ मुनाफा कमाने में उठा रहे है अर्थात वे पाप का बोझा अपने लिए बना रहे है उनका हिसाब भी वक्त की अदालत करेगी पर अगर उन्होंने भूल सुधार कर ली तब फिर वो दंडित होने से वक्त की अदालत से बच भी सकते है।
-संजय सनम

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