उपमा बहार होली 2020


होली उपमा बहार 2020*

इस उपमा बहार में सिर्फ वे लोग शामिल  है जिन्होंने फेस बुक,संदेश या फोन में अपनी स्वीकृति  प्रदान की थी। 

बुरा मत मानियेगा....आनंद लीजियेगा.....

1 श्री राज कुमार सोनी:

-साहित्य की डोर से बंधा

शब्द पथिकों का अजब दौर देख रहा हूँ।


2  श्री प्रकाश लुनिया(सिलीगुड़ी)

- मन मे चिंगारी मेरे भी धधकती है

बोलता हूँ तो लोग आग कह देते है।


3 अमित पाठक:

-मार्केटिंग का फंडा कोई हमसे सीखे

ब्रांड बनने के लिए ब्रांडों के पीछे  चलना पड़ता है।



4 मधु खण्डेलवाल (दिल्ली):

-नाम मे मधु...खांड भी जुड़ी है

अरे!मोहब्बत तो अपने मिजाज में जुड़ी है।


5 बंदना त्रिपाठी(सासाराम)

- सूरत-सीरत का कमाल रखती हूं

सरकारी कार्यालय में भी रप्तार रखती हूं।


6 श्रीमती प्रमिला जैन:

-जिंदगी में दर्द का उपचार रखती हूं

जोक्स अड्डा अपने पास रखती हूं।


7 श्रीमती निशा कोठारी(कोलकाता):

-शब्द,स्वर,लय सब कुछ है मेरे पास

मैं अपने हुनर पर विश्वास रखती हूं।


8  सुश्री अनुराधा सिंह (हावड़ा)

नाम मे राधा का जुड़ाव रखती हूं

कलम की दुनियां से खास अनुराग रखती हूं।


9  श्रीमती माया धामी(ऋषिकेश)

  -देवो की नगरी में मायावी मुस्कान रखती हूं

हीलिंग की मल्लिका का खिताब रखती हूं।


10 श्रीमती सुरेखा सैनी,हिंदुस्तानी(देहरादून)

सिर्फ चिंगारी नही...मैं आग भी रखती हूं।

उस नापाक पाक पर शब्दों की कटार भी रखती हूं।


11 श्री जीत पारीक(जयपुर)

गुलाबी नगरी से गुलाब लाया हूँ

प्रेम का मैं उपहार लाया हूँ।


12  श्रीमती सूंदर संचेती(रिसड़ा)
      - उसकी कृपा का प्रसाद साथ रहता है
        मेरे सर पर उसका हाथ रहता है।


13  कृष्णा कुमार
    - हम उपकारों को याद रखने वाले है
       पुराने  रिश्तों को कभी भूलते नहीं।


14   श्रीमती प्रेम सिंगी(दिल्ली)
    - कभी छुई मुई जैसी थी मैं
      अब लोग मुझे दबंग कहते है।


15 श्री प्रकाश भूतोड़िया(कोलकाता)
    - महादेव की इबादत में मन इतना लगता है
       उस वक्त दुनियां भी भूल जाता हूँ।


16  श्रीमती वीणा वत्सल सिंह
    -  माँ शारदे की वीणा-वत्सल का भाव भी जुड़ा है
      मुझे जानने की चाह रखने वालों..मेरे आखरो में मेरा         परिचय छुपा है।


17 कवयित्री नम्रता श्रीवास्तव(भोपाल)
    - कविता की दुनियां से परिचय मेरा
     लोग मोहब्बत में हास्य की फुलझड़ी कहते है।


18   अर्चना वर्मा
    - दिल  आज भी उसकी आहट का....करता है
      ख्वाबों में आकर जो बेकरार करता है।

19 श्री विजय संचेती(रिसड़ा)
    - मेरे घर मे उसका दरबार सजा है
      उसके चरणों मे मेरा नाम लिखा है।


20 श्री विनोद बलदेवा(दिल्ली)
    - मेरी दोस्ती आखिर सांस तक साथ निभाती है
      जीवन के सफर में सच्ची प्रीत बताती है।


21 श्रीमती सरिता खोवाला(हावड़ा)
    - शब्दों की दुनियां निराली है
      यहां खामोशी भी  बोलती लगती है।


22  श्रीमती अनिता अग्रवाल(हावड़ा)
    - एक हुनर मुझमे अब तक छिपा था
      जब से वो मिला--हम बिंदास बोलने लगे।


23 श्रीमती रेखा श्रीवास्तव(कोलकाता)
     शब्दों का अंकन हमे न सिखाइये
      इनसे हमारी यारी बरसों पुरानी है।


24   श्री मुरारीलाल थानवी
    - औऱ कभी याद करू या न करू
      भैरव जी की पूजा पर सबको याद रखता हूँ।


25 श्री धनराज खटेड(हावड़ा)
   लोग हमें नही समझ पाते
   हमे यह दुनिया समझ मे नहीं आती।


26 श्रीमती सीमा भावसिंका(कोलकाता)
   - अब दिल से करार क्या करना
   जो इंतजार में है उसे बेकरार क्या करना।


27  श्री रामचन्द्र सारस्वत(दिल्ली)
   - अब औऱ कोई अरमान बाकी नही रहा
     काश सियासत में सरपंची ही मिल जाती।


28 श्रीमती चन्द्र प्रभा सुड(दिल्ली)

   - मेरी उम्र से मेरे मन का अंदाज मत  लगाना
     मेरे शब्दों में आज भी बेकरारी दिखती है।


29   श्री विजय बेद(कोलकाता)
   - हमारी जूट इंडस्ट्री की रौनक पर
    यश बैंक की कयामत देखिये।


30 श्री अनिल जैन(कोलकाता)
   वायरस कम्प्यूटर में भी अक्सर आते है
     पर तेजी इस बार आई है।

31 श्री प्रदीप बंसल(कोलकाता)
    छोड़ों पुरानी बातें--अब संत हो गया हूँ
     कृष्ण राधे का अब भक्त हो गया हूँ।






https://youtu.be/i_Hl-E6Bpgk

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