कटक मारवाड़ी समाज मे सियासी चर्चे...

अब मामाजी पर सबकी नजर.... 


भीतर घात का जबाब कैसे देंगे! 


कुर्सी  राजनीति के क्षेत्र मे ही मह्त्व नहीं रखती बल्कि सामाजिक क्षेत्र मे भी लोग कुर्सी के लिए अपने साथ के उन खास रिश्तों को भी भुला देते है और अपनी अलग राह सी बना कर अनजान से बेवफ़ा बन जाते है!

जब जब सामाजिक परिवेश मे ऐसी स्थिति आती है तब तब सियासत से कभी कर्नाटक की याद ताजा हो जाती है तो कभी महाराष्ट्र मे भाजपा शिवसेना के अलगाव की कहानी याद आ जाती है!

कटक मारवाड़ी समाज  मे  आगामी  5 जनवरी को चुनाव होने है.. पर सत्ता के लिए टूट और नई खेमेबाजी की घटनाओ ने कही यह सोचने के लिए मजबूर भी कर दिया है कि लोकतंत्र की सड़क का नाम लेकर तुच्छ राजनीति की चाल भला क्यों चली जा रही है!

कटक मारवाड़ी समाज का पिछले साढ़े चार वर्षों से नेतृत्व करने वाले श्री विजय खंडेलवाल को ही पता नहीं चलता कि उनके साथ कदम से कदम बढ़ाने वाले उनके साथी अचानक  अलग राह बना कर उस निर्णय के लिए चुनौती देने के लिए खड़े हो जाते है जिस निर्णय को घोषणा तक लाने मे उनकी सक्रिय भागीदारी रही है!

जिस  नाम को अध्यक्षीय प्रत्याशी बनाने के लिए सक्रिय समर्थन दिया वे आज उस नाम के विरोध मे एक नया नाम खड़ा  करते हुए अपना पाला बदल देते है... आख़िर क्यों!

यह सवाल कहीं, न कहीं श्री खण्डेलवाल को भी मन ही मन मे कचोट रहा होगा और वे सोच रहे होंगे कि उनके विश्वास के साथ यह छल हुआ है!

डिजीटल फर्स्ट न्यूज के यू ट्यूब चैनल के एक साक्षात्कार मे श्री विजय खंडेलवाल के इस दर्द को आप समझ सकते है l

https://youtu.be/fNZA2pJ4_F8

उस वीडियो की लिंक को प्रेषित कर रहा हूँ.. उसे सुन कर  अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कीजिएगा l

सवाल सामाजिकता मे सियासत का है और उससे मिल रही हरारत का है... समाज के आम व्यक्ति को यह स्थिति बहुत तकलीफ देती है l

कटक मारवाड़ी समाज मे मातृ शक्ति का संगठन तथा उनकी वोटिंग इस चुनाव को विशेष प्रभावित करेगी इसलिए मातृ शक्ति अर्थात कटक नारी समाज की सक्रियता जीत हार मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती दिख रही है!

चुनावी माहौल मे रंग तो बनेंगे - बिगड़ेंगे पर देखना यह है कि  समाज का निर्णय क्या होता है!

अभी के हालात मे मामा जी के नाम से विख्यात मारवाड़ी समाज के प्रत्याशी चुनौती का सामना कर रहे है पर फिर भी उनका पलड़ा भारी बताया जा रहा है l

बताया जा रहा है कि मामाजी कटक मारवाड़ी समाज के मतदाताओं की पहली पसंद होने की वज़ह से इस टक्कर मे आगे ही रहेंगे इसलिए   भीतर घात  उनको सिर्फ तनाव भरी चुनौती ही दे सकती है उनको हरा नहीं  सकती l

अब देखना यह है कि  मामा जी इस चुनौती का जबाव किस अंदाज मे देते है!


संजय सनम 
सम्पादक - फर्स्ट न्यूज 

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