*मेरा प्रेम- मेरी प्रीत*
*प्रेम प्रीत प्यार ये शब्द नहीं मात्र*
*वरन हृदय -तल से उफनते हुए अहसास हैं*
*प्रेम की परिभाषा खोजने बैठी तो*
*हृदय के गहन कक्ष में जा पहुंचीं*
*वहां बहुत अंधेरा था*
* *आंखें बंद करके सोचने बैठी तो*
*एक चमकीली रौशनी से तुम मुस्कुरा रहे थे*
*मुझे प्रेम की परिभाषा मिल गई थी शायद?*
*पर फिर एक संशय सा हुआ*
*पानी का बुलबुला सा उठा*
*सोचा इतनी आसानी से कहां दूर होगा मेरा संशय?*
*और फिर बैठ गई ध्यानस्थ होकर ये निर्णय लेकर*
*कि अब तो तब ही उठूंगी जब पा जाऊंगी*
*अपने हर सवालों के जवाब*
*और प्रेम प्रीत प्यार की सच्ची परिभाषा*
*संसार से दूर,सबसे दूर फिर डूब जाती हूं*
*विचारों के महासागर में*
*बहुत गहरे बहुत गहरे डूबती जाती हूं*
*बंद आंखों से देखने की कोशिश करती हूं जबरदस्ती तो*
*मेरी आंखों के कोरों की नमी में तुम फिर मुस्कुरा रहे थे*
*पर फिर अनदेखा किया तुम्हें*
*और फिर अपनी सांसों के आरोह अवरोह को साधा तो*
*मेरी हर सांस तुम्हें ही पुकार रही थी*
*मेरी धड़कनें तुम्हारा ही नाम ले रही थी*
*अजीब असमंजस में फंसी थी मेरी हृदय नैया*
*प्रेम प्रीत प्यार का पहला अक्षर पहला अहसास*
*तुम से शुरू होकर तुम तक ही जाता है*
*मेरे होंठों की हंसी में तुम*
*मेरी आंखों की नमी में तुम*
*मेरी सुबह की पहली किरण में तुम*
*मेरी हर खुशी में तुम*
*मेरी हार में तुम,मेरी जीत में तुम*
*मेरे सपनों में तुम*
*मेरी हर कहानी के राजकुमार हो तुम*
*मेरे मरीज़ भी तुम,मेरे रोग भी तुम*
*मेरी दवा भी तुम*
*मेरा सजना भी तुम मेरा संवारना भी तुम*
*मेरे जीवन का प्रेमगीत भी तुम*
*संगीत भी तुम*
*मेरे घंघरू की आवाज भी तुम*
*मेरे सुर की तान भी तुम*
*मेरे मन की आवाज़ भी तुम*
*मेरे तन की तरुणाई भी तुम*
*
*मेरे रोम रोम में तुम*
*मेरे जीवन तुम , मेरी आत्मा में तुम*
*बाहर तुम,भीतर तुम*
*मेरी लेखनी में तुम, मेरे शब्दों में तुम*
*सब जगह तुम ही तुम*
*घबराकर खोलती हूं आंखें*
* *धड़कनों को संभालती हूं*
*अपने विचारों पर लगाती हूं अंकुश*
*मेरा प्रेम,मेरी प्रीत,मेरा प्यार*
*सब-कुछ तुम ही हो*
*पर इस आत्मबोध को स्वयं से ही छुपाती हूं*
*क्योंकि इस परम पावन प्यारे*
*अहसास को किसी से बांट नहीं सकती तो*
*अपने हृदय कमल में तुम को बंद*
*करके जीवन का मोक्ष पाती हूं*
*क्या देह परमात्मा का वर्णन कर सकता है?*
*मेरे लिए तो तुम ही परमात्मा की*
*ओर ले जाने वाली प्रथम सीढ़ी हो*
*और परमात्मा को पाने वाली*
*अंतिम सीढ़ी भी तुम ही हो*
*मेरा प्रेम,मेरी प्रीत,मेरा प्यार*
*तुम ही हो- तुम ही हो, तुम ही हो*
*वन्दना "वामा"*
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