प्रेम भरी पाती...

*मेरा प्रेम- मेरी प्रीत*


*प्रेम प्रीत प्यार ये शब्द नहीं मात्र*

*वरन हृदय -तल से उफनते हुए अहसास हैं*

*प्रेम की परिभाषा खोजने बैठी तो*

*हृदय के गहन कक्ष में जा पहुंचीं*

*वहां बहुत अंधेरा था*

* *आंखें बंद करके सोचने बैठी तो*

*एक चमकीली रौशनी से तुम मुस्कुरा रहे थे*

*मुझे प्रेम की परिभाषा मिल गई थी शायद?*

*पर फिर एक संशय सा हुआ*

*पानी का बुलबुला सा उठा*

*सोचा इतनी आसानी से कहां दूर होगा मेरा संशय?*

*और फिर बैठ गई ध्यानस्थ होकर ये निर्णय लेकर*

*कि अब तो तब ही उठूंगी जब पा जाऊंगी*

*अपने हर सवालों के जवाब*

*और प्रेम प्रीत प्यार की सच्ची परिभाषा*

*संसार से दूर,सबसे दूर फिर डूब जाती हूं*
*विचारों के महासागर में*

*बहुत गहरे बहुत गहरे डूबती जाती हूं*

*बंद आंखों से देखने की कोशिश करती हूं जबरदस्ती तो*

*मेरी आंखों के कोरों की नमी में तुम फिर मुस्कुरा रहे थे*

*पर फिर अनदेखा किया तुम्हें*

*और फिर अपनी सांसों के आरोह अवरोह को साधा तो*

*मेरी हर सांस तुम्हें ही पुकार रही थी*
*मेरी धड़कनें तुम्हारा ही नाम ले रही थी*

*अजीब असमंजस में फंसी थी मेरी हृदय नैया*

*प्रेम प्रीत प्यार का पहला अक्षर पहला अहसास*

*तुम से शुरू होकर तुम तक ही जाता है*

*मेरे होंठों की हंसी में तुम*

*मेरी आंखों की नमी में तुम*

*मेरी सुबह की पहली किरण में तुम*
*मेरी हर खुशी में तुम*

*मेरी हार में तुम,मेरी जीत में तुम*

*मेरे सपनों में तुम*

*मेरी हर कहानी के राजकुमार हो तुम*

*मेरे मरीज़ भी तुम,मेरे रोग भी तुम*

*मेरी दवा भी तुम*

*मेरा सजना भी तुम मेरा संवारना भी तुम*

*मेरे जीवन का प्रेमगीत भी तुम*

*संगीत भी तुम*

*मेरे घंघरू की आवाज भी तुम*

*मेरे सुर की तान भी तुम*

*मेरे मन की आवाज़ भी तुम*

*मेरे तन की तरुणाई भी तुम*
*
*मेरे रोम रोम में तुम*

*मेरे जीवन तुम , मेरी आत्मा में तुम*

*बाहर तुम,भीतर तुम*

*मेरी लेखनी में तुम, मेरे शब्दों में तुम*

*सब जगह तुम ही तुम*

*घबराकर खोलती हूं आंखें*

* *धड़कनों को संभालती हूं*

*अपने विचारों पर लगाती हूं अंकुश*

*मेरा प्रेम,मेरी प्रीत,मेरा प्यार*

 *सब-कुछ तुम ही हो*

*पर इस आत्मबोध को स्वयं से ही छुपाती हूं*

*क्योंकि इस परम पावन प्यारे*

*अहसास को किसी से बांट नहीं सकती तो*

*अपने हृदय कमल में तुम को बंद*

 *करके जीवन का मोक्ष पाती हूं*

*क्या देह परमात्मा का वर्णन कर सकता है?*

*मेरे लिए तो तुम ही परमात्मा की*

 *ओर ले जाने वाली प्रथम सीढ़ी हो*

*और परमात्मा को पाने वाली*

 *अंतिम सीढ़ी भी तुम ही हो*

*मेरा प्रेम,मेरी प्रीत,मेरा प्यार*

*तुम ही हो- तुम ही हो, तुम ही हो*

         *वन्दना "वामा"*










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