आज बंगाल भाजपा की आपात बैठक....

क्या हार के असली कारण शाह को बता पाएंगे!

 बंगाल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री दिलीप घोष के नेतृत्व में आज भाजपा बंगाल के प्रमुख नेता हार के कारणों की समीक्षा करने के लिए आपात बैठक कर रहे है और वो रिपोर्ट के रूप में श्री अमित शाह जी को भेजी जाएगी।


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बंगाल में हुए उपचुनाव की 3 सीट में से खड़गपुर व कालियागंज भाजपा की झोली में आनी थी, करीमपुर की स्थिति उतनी सकारात्मक नहीं थी पर भाजपा के नेताओं की बयानबाजी ऐसी थी जैसे जीत उनके लिए तश्तरी में सजी हुई है और उनको उठाना है।कालियागंज में भाजपा की हार उनकी बदकिस्मती का रूप है क्योंकि कांटे की टक्कर में बहुत कम अंतर से यहां भाजपा हारी है पर खड़गपुर का दुर्ग नहीं बचना इस समीक्षा का सबसे बड़ा सवाल है और इसका जवाब वर्तमान भाजपा बंगाल अध्यक्ष व खड़गपुर के पूर्व विधायक दिलीप घोष को ही देना है जो अब सांसद भी है।

आखिर वे अपने घर को क्यों नहीं बचा पाए...क्या उम्मीदवार  का चयन उचित नहीं था या फिर उनके अपने कार्यकाल में उन्होंने जनता के लिए वो नहीं किया जिससे जनता उनकी अपील पर भरोसा करती। अगर उम्मीदवार का चयन उनकी पसंद से नहीं भी हुआ तब भी जंग जीती जा सकती थी अगर जनता पर दिलीप का जादू रहता। अर्थात खड़गपुर विधानसभा की हार में दिलीप घोष खुद कटघरे में खड़े है और यह हार ही भाजपा के माहौल पर भारी पड़ रही है। 

अब पार्टी के लोग कमजोर संगठन व बूथ लूट की बात करने लगे है जब परिणाम विपरीत आ गया.....उससे पहले फिर खुमारी किस बात की थी यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए।


ये लोग हार का असली कारण नहीं बता सकते......और वो है इनका आपस में कुत्ते बिल्लियों की तरह लड़ना,एक दूजे की टांग खिंचाई और अपने आपको तीस मारखा समझना।


हम चोडे गली संकरी वाली कहावत चरितार्थ हो रही है अभी भाजपा में समानांतर गुट चल रहे है और एक दूजे की जमीन काट रहे है.....किसी एक को मार पड़ती है तब दूसरे को इतना आनंद आता है जैसे  उसकी कोई मन्नत पूरी हो गई हो।


भाजपा के कुछ बड़बोले नेताओ को मीडिया के सामने बात करने की तमीज नहीं है...केंद्र में सरकार की खुमारी में  वे यह तहज़ीब भुल गए है कि किसके साथ कैसे बात करना चाहिए।उनकी शब्दावली व अंदाज में विनम्रता का पुट नहीं है और जो तहज़ीब वाले लोग है उनकी भाजपा संगठन में जगह नहीं है।

कोई यह बताए कि पूर्व सांसद जॉर्ज बेकर अभी सक्रिय क्यों नहीं दिखते!

ईमानदार  उसूल पसंद नेताओ की आवश्यकता क्या है क्योंकि यहां चापलूसी करने वाले, मिल बैठ कर रहने खाने वाले साथी चाहिए...केंद्र की पावर का गुमान  मोदी जी को नहीं है पर बंगाल भाजपा के कुछ तो अपने आपको बादशाह से कम नहीं समझते।

बंगाल भाजपा की हार की एक वजह वोट लूट हो सकती है पर बड़ी वजह बंगाल भाजपा के नेताओं का अहम व अपनी हस्ती का झूठा वहम है और यह बात अमित शाह जी को भेजी जाने वाली रिपोर्ट का हिस्सा नहीं बन सकती।

श्री कैलाश विजयवर्गीय के हास्यास्पद बयान यह बताने को काफी है कि हमने मेंच खेला ही ऐसे है जैसे जीता हुआ ही है।
चुनाव परिणाम से पहले के बयान मिथ्या घमंड का प्रमाण है और यह घमंड ही आपकी हार का सबसे बड़ा जिम्मेदार है।

लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद तृणमूल  के केडर सहमे दिखे थे अब आप पीट रहे है....यद्धपि राजनीति में यह हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है पर आप कहां तक आ गए थे और अब कहां पर लुढ़क गए है यह सोचने की बात है।


आदमी वक़्त के परिणाम की चोट खाने के बाद अगर सुधर जाए तो वह भविष्य बदल सकता है पर बंगाल भाजपा तो थपड़ का भी जश्न मना रही है और उनके नेता इस हार में भी जीत के कसीदे पढ़ रहे है।

अब इन हालातो में 2021 ममता का  लगने लग गया है...भाजपा जो सरकार बनाने की सोच रही थी अब प्रतिष्ठा बचाने की पहले सोचे......अगर आप अहंकार में ही रहेंगे तो सरकार तो बहुत दूर की बात है आपकी प्रतिष्ठा भी खतरे में है।


- संजय सनम
संपादक - फर्स्ट न्यूज
72780-27381

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