न जमीर बचा न जमीन बची...

गड़करी जी गड़बड़ी कहा हुई!

सत्ता भी गई और फजीहत भी हुई......


गड़करी ने ठीक कहा था कि क्रिकेट की आखिरी गेंद की तरह राजनीति में आखिरी लम्हे में पासा पलट सकता है पर उनको यह पता नहीं था कि पासा इस तरह से पलट जाएगा अर्थात शादी का सेहरा पहना हुआ दूल्हा इसलिए कुंवारा रह जाएगा क्योंकि जितनी संख्या बारातियों की आवश्यकता थी वो जुगाड नहीं हुई..........

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सियासत की यह दुल्हन कभी इसकी ...कभी उसकी बनती दिखी थी पर अब तक यह संभावित दूल्हों को छकाती रही।

बेचारा दूल्हा ....अब जो जग हंसाई हो रही है....जब गणित आपके पास नहीं थी तब उछल कूद क्यों की.....और जब शादी का सेहरा ही पहन लिया तब बाराती का जुगाड फिर कर दिए होते।

अब चाणक्य क्या जवाब देंगे?शिव सेना ने जो किया वो न तो इतिहास माफ करेगा न ही महाराष्ट्र पर भाजपा ने अपने हाथ काले क्यों कर लिए!

अति आत्म विश्वास की यह थपड्ड पड़ी है कि दूल्हे को बीच बारात से भागना पड़ा है।

भाजपा ने अपनी लुटिया खुद डुबोई है.....शिव सेना ने अपना सब कुछ गवा कर सत्ता तो पाई पर भाजपा ने  जमीर भी गवाया और जमीन भी नहीं बची।

...संजय सनम
7278027381

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